क्रिप्टो एक्सचेंज WazirX पर ED का बड़ा एक्शन, 65 करोड़ रुपये की बैंक संपत्ति फ्रीज, ये है पूरा मामला

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अभिनय आकाश । Aug 05, 2022 6:34PM
ट्विटर पर ईडी की तरफ से जारी एक बयान में बताया गया कि वज़ीरएक्स क्रिप्टो-मुद्रा एक्सचेंज के निदेशक की तलाशी ली गई। वर्चुअल की खरीद और हस्तांतरण के माध्यम से धोखाधड़ी के पैसे की लॉन्ड्रिंग में आरोपी इंस्टेंट लोन एपीपी कंपनियों की सहायता के लिए 64.67 करोड़ रुपये की बैंक संपत्ति को फ्रीज किया गया।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने शुक्रवार को कहा कि उसने मनी लॉन्ड्रिंग जांच के एक हिस्से के रूप में क्रिप्टोक्यूरेंसी एक्सचेंज वज़ीरएक्स की लगभग 65 करोड़ की बैंक संपत्ति को फ्रीज कर दिया है। कंपनी के निदेशक पर आरोप है कि उन्होंने क्रिप्टो संपत्तियों की खरीद और हस्तांतरण के माध्यम से धोखाधड़ी के पैसे की मनी लॉन्ड्रिंग में आरोपी इंस्टेंट लोन ऐप कंपनियों की मदद की है। ट्विटर पर ईडी की तरफ से जारी एक बयान में बताया गया कि वज़ीरएक्स क्रिप्टो-मुद्रा एक्सचेंज के निदेशक की तलाशी ली गई। वर्चुअल की खरीद और हस्तांतरण के माध्यम से धोखाधड़ी के पैसे की लॉन्ड्रिंग में आरोपी इंस्टेंट लोन एपीपी कंपनियों की सहायता के लिए 64.67 करोड़ रुपये की बैंक संपत्ति को फ्रीज किया गया। 

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एजेंसी ने कहा कि उसने 3 अगस्त को हैदराबाद में वज़ीरएक्स के मालिक ज़ानमाई लैब प्राइवेट लिमिटेड के एक निदेशक के खिलाफ तलाशी अभियान चलाया।  क्रिप्टो एक्सचेंज के खिलाफ ईडी की जांच भारत में काम कर रहे कई चीनी ऋण ऐप (मोबाइल एप्लिकेशन) के खिलाफ चल रही जांच से जुड़ी है। ईडी द्वारा वज़ीरएक्स को फेमा अधिनियम के तहत नोटिस दिए जाने के कुछ दिनों बाद यह कार्रवाई हुई है। । ईडी ने पिछले वर्ष वजीरएक्स पर विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (फेमा) का उल्लंघन करने का आरोप लगाया था। एजेंसी ने कहा, ‘‘वजीरएक्स के निदेशक समीर म्हात्रे की वजीरएक्स के डेटाबेस तक दूर रहते हुए भी पूरी पहुंच थी। 

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ईडी ने कहा वजीरएक्स की 64.67 करोड़ रुपये की चल परिसंपत्तियों पर धनशोधन रोकथाम कानून के तहत रोक लगाई गई है। बता दें कि ईडी ने देश में काम करने वाली तमाम एनबीएफसी कंपनियों और उनके फिनटेक पार्टनर्स के खिलाफ भारतीय रिजर्व बैंक के गाइडलाइन का उल्लंघन करने और पर्सनल डाटा का दुरुपयोग व मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में जांच कर रही है। इन कंपनियों पर आरोप है कि ये टेली कॉलर्स का इस्तेमाल कर कर्ज लेने वालों से ऊंचे ब्याज दरों की वसूली के लिए अभद्र भाषा का प्रयोग करते हैं।  

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