जोखिम के मापदंड पर पहचान में आई इकाइयों का GST ऑडिट होगा

entitles-identified-on-basis-of-risk-parameters-to-face-gst-audit
आडिट महानिदेशालय (अप्रत्यक्ष कर) ने आडिट योजना का खुलासा करते हुए कहा कि सीबीआई की विश्लेषण इकाई ऐसे जीएसटी दाताओं की सूची तैयार करेगा जो जोखिम वाले हैं। इस सूची को जांच के लिए आडिट आयुक्तालयों को साझा किया जाएगा।

नयी दिल्ली। राजस्व विभाग ने जीएसटी पंजीकरण वाली कंपनियों के खातों के आडिट की जोखिम मापदंड के आधार पर योजना बना रहा है। इसमें कर चोरी के इतिहास वाली, समय पर रिटर्न दाखिल नहीं करने वाली और सवालों के घेरे में आए लेखाकारों की नियुक्ति करने वाली कंपनियां आएंगी। आडिट महानिदेशालय (अप्रत्यक्ष कर) ने आडिट योजना का खुलासा करते हुए कहा कि सीबीआई की विश्लेषण इकाई ऐसे जीएसटी दाताओं की सूची तैयार करेगा जो जोखिम वाले हैं। इस सूची को जांच के लिए आडिट आयुक्तालयों को साझा किया जाएगा। 

इसे भी पढ़ें: वाहनों पर GST में कमी से अर्थव्यवस्था को होगा लाभ: आनन्द महिंद्रा

जोखिम के आधार पर पहचान में आए करदताओ को तीन श्रेणियों छोटे (10 करोड़ रुपये तक कारोबार वाले) मध्यम (10 से 40 करोड़ रुपये तक के कारोबार वाले) और बड़े (40 करोड़ रुपये से अधिक के कारोबार वाले) में बांटा जाएगा। यह आडिट वित्त वर्ष 2017-18 के वार्षिक रिटर्न के आधार पर किया जाएगा। यह जीएसटी के क्रियान्वयन का पहला वर्ष है। माल एवं सेवा कर (जीएसटी) को एक जुलाई, 2017 को लागू किया गया था। वित्त वर्ष 2017-18 के लिए वार्षिक रिटर्न दायर करने की आखिरी तारीख 31 अगस्त, 2019 है।

इसे भी पढ़ें: GST अधीक्षक पर अधिक संपत्ति जुटाने का लगा आरोप, CBI ने दर्ज किया मामला 

यह आडिट योजना उन इकाइयों पर लागू होंगी जो केंद्रीय जीएसटी अधिकारियों के अधिकार क्षेत्र में आते हैं। कर रिटर्न की बिना दखल जांच सुनिश्चित करने के लिए महानिदेशक आडिट ने जीएसटी और केंद्रीय उत्पाद के मुख्य आयुक्तों से ‘डेस्क आधारित आडिट’ की प्रक्रिया अपनाने को कहा है। अभी इसके लिए मौजूदा प्रणाली परिसर आधारित आडिट की है। आडिट महानिदेशक ने कहा कि परिसर आधारित आडिट ऐसे मामलों में आयुक्त की अनुमति से किया जा सकता है जिनमें छोटे करदाता सहयोग से इनकार कर रहे हों। 

Disclaimer:प्रभासाक्षी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।


अन्य न्यूज़