भारत बनेगा इस्पात उत्पादों का बड़ा निर्यातक: धर्मेन्द्र प्रधान

  •  प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क
  •  सितंबर 23, 2019   19:14
भारत बनेगा इस्पात उत्पादों का बड़ा निर्यातक: धर्मेन्द्र प्रधान

दूसरी तरफ इस्पात का आयात 78.30 लाख टन का हुआ जो कि पिछले साल के मुकाबले 4.7 प्रतिशत अधिक रहा। पूरी तरह से तैयार सामान का भारत शुद्ध रूप से आयातक रहा। बहरहाल, अगस्त 2019 में देश से तैयार इस्पात उत्पादों के निर्यात में वृद्धि का रुख दिखाई दिया।

नयी दिल्ली। इस्पात मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान ने सोमवार को कहा कि अगले दो- तीन साल में भारत ऐसी स्थिति में पहुंच जायेगा जब वह कई सालों तक विशुद्ध रूप से इस्पात का निर्यातक देश होगा। प्रधान यहां इस्पात मंत्रालय द्वारा आयोजित ‘चिंतन शिविर’ कार्यक्रम में बोल रहे थे।इस कार्यक्रम का आयोजन घरेलू इस्पात क्षेत्र को ‘‘गतिमान, क्षमतावान और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी’’ बनाने केलिये किया गया।  उन्होंने कहा कि वर्तमान में भारत की सालाना 14 करोड़ टन इस्पात उत्पादन क्षमता है जबकि उत्पादन 10 करोड़ टन से कुछ अधिक होता है। 

प्रधान ने कहा, ‘‘हम बिक्रीयोग्य तैयार इस्पात का भी उत्पादन करते हैं। कई बार हम शुद्ध आयातक होते हैं तो कभी हमरा इस्पात निर्यात इसके आयात से ज्यादा होता है। वर्तमान में हम शुद्ध रूप से आयातक हैं। हर साल हम 20 से 30 लाख टन इस्पात का आयात कर रहे हैं। इस चिंतन शिविर का यह परिणाम होना चाहिये कि अगले दो से तीन साल के भीतर भारत आने वाले कई सालों के लिये इस्पात का शुद्ध रूप से निर्यातक बनना चाहिये। कोई आयात नहीं होना चाहिये।’’प्रधान ने कहा कि देश से इस्पात का निर्यात बढ़ाने के लिये भारत ने उन देशों से बातचीत शुरू की है जहां से वह पेट्रोलियम पदार्थों का आयात करता है। प्रधान इस्पात मंत्री होने के साथ ही पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री भी हैं।  उन्होंने कहा, ‘‘तेल एवं गैस खरीदने के लिये मैं कई देशों की यात्रा करता हूं।मैंने उन्हें यह पूछना शुरू कर दिया है क्या आप हमारा इस्पात खरीदेंगे? मैं हाल ही में खाड़ी देशों में गया। मैंनें उन्हें उनसे खरीदे जाने वाले तेल और गैस के बारे में आंकड़े बताये, इसके साथ ही उनके इस्पात खपत के आंकड़े भी उन्हें बताया और कहा कि इसमें हमारा हिस्सा नहीं है।’’ प्रधान ने कहा कि हमें व्यापार में एक दूसरे के उत्पादों का आदान- प्रदान करना चाहिये।

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उन्होंने कहा कि व्यापार संरक्षण और व्यापार वार्ता के नये तौर- तरीके ढूंढे जाने चाहिये। उन्होंने कहा कि घरेलू इस्पात उद्योग को अच्छी गुणवत्ता और लागत प्रभावी उत्पाद बनाने चाहिये ताकि मुक्त व्यापार समझौतों का लाभ उठाया जा सके।उन्होंने कहा कि जापान हमसे कच्चा माल खरीदता है और उससे अच्छी गुणवत्ता के उत्पाद बनाकर पूरी दुनिया में आपूर्ति करता है। ‘‘भारत क्यों नहीं ऐसा कर सकता है।’’ आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक 2018- 19 में इस्पात निर्यात 63.60 लाख टन का रहा।पिछले साल के मुकाबले इसमें 33.87 प्रतिशत की कमी रही। दूसरी तरफ इस्पात का आयात 78.30 लाख टन का हुआ जो कि पिछले साल के मुकाबले 4.7 प्रतिशत अधिक रहा। पूरी तरह से तैयार सामान का भारत शुद्ध रूप से आयातक रहा।  बहरहाल, अगस्त 2019 में देश से तैयार इस्पात उत्पादों के निर्यात में वृद्धि का रुख दिखाई दिया।





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