मित्तल कॉर्प के लिये संशोधित बोली जमा करने को लेकर एनसीएलटी का आदेश खारिज

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राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (एनसीएलएटी) ने बुधवार को जिंदल स्टेनलेस को राहत देते हुए उसकी अपील को अनुमति दे दी और एनसीएलटी के आदेश को खारिज कर दिया।

राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (एनसीएलएटी) ने बुधवार को जिंदल स्टेनलेस को राहत देते हुए उसकी अपील को अनुमति दे दी और एनसीएलटी के आदेश को खारिज कर दिया। न्यायाधिकरण ने अपने आदेश में कर्ज में फंसी मित्तल कॉर्प लि. के लिये जिंदल की प्रतिद्वंद्वी कंपनी श्याम सेल एंड पावर लि. को संशोधित बोली जमा करने की अनुमति दे दी थी। इससे पहले, राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) की मुंबई पीठ ने 11 अगस्त, 2022 को अपने आदेश में श्याम सेल एंड पावर लि. को संशोधित समाधान योजना जमा करने को मंजूरी दी थी।

यह मंजूरी तब दी गयी जब मित्तल कॉर्प के कर्जदाताओं की समिति का मतदान सात अगस्त, 2022 को ही शुरू हो गया था। अपीलीय न्यायाधिकरण की दो सदस्यीय पीठ ने एनसीएलटी के आदेश को खारिज करते हुए कहा, ‘‘...बिना वैध कारण के समाधान योजना को लेकर सात अगस्त, 2022 को जारी मतदान में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए था।’’ समाधान पेशेवर ने एनसीएलटी के आदेश को देखते हुए मतदान प्रक्रिया को छोड़ दिया।

चेयरपर्सन न्यायाधीश अशोक भूषण की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा, ‘‘हमारा मानना है कि एनसीएलटी का 11 अगस्त, 2022 को जारी आदेश उपयुक्त नहीं है और वह खारिज करने लायक है।’’ अपीलीय न्यायाधिकरण ने कहा कि मतदान प्रक्रिया को फिर से शुरू करने और समयबद्ध तरीके से पूरा करना चाहिए। साथ ही कंपनी ऋण शोधन समाधान प्रक्रिया (सीआईआरपी) 28 फरवरी, 2023 तक के लिये बढ़ा दी गयी। इस बीच, समाधान पेशेवर एनसीएलटी के समक्ष उपयुक्त आदेश देकर प्रासंगिक तथ्य और समाधान प्रक्रिया की गतिविधियों को रख सकते हैं।

एनसीएलटी ने मित्तल कॉर्प के लिये ऋण शोधन समाधान प्रक्रिया 10 नवंबर, 2021 को शुरू की थी। उस समय जिंदल स्टेनलेस और श्याम सेल एंड पावर लि. समेत छह समाधान योजनाएं मिली थीं। समाधान योजनाओं पर विचार करने के बाद कर्जदाताओं की समिति ने श्याम सेल समेत चार प्रस्तावों को मतदान के लिये रखा। मतदान पांच अगस्त से 26 अगस्त, 2022 तक होना था। बाद में, श्याम सेल ने समाधान पेशेवर से संपर्क कर संशोधित प्रस्ताव की पेशकश की, जिसे उन्होंने ठुकरा दिया। उसके बाद श्याम सेल मामले को लेकर एनसीएलटी के पास चली गयी थी।

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