नितिन गडकरी ने कहा- लॉजिस्टिक्स की लागत कम करने के लिए माल ढुलाई क्षमता को बढ़ाने की जरूरत

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केंद्रीय सड़क परिवहन एव राजमार्ग मंत्री ने नितिन गडकरी ने कहा कि लॉजिस्टिक्स लागत घटाने की जरूरत है और पुराने रक्षा विमानों को मालवाहक विमानों में बदला जा सकता है।एसोसिएशन के सदस्यों को वीडियो कॉन्फ्रेंस से संबोधित करते हुए गडकरी ने कहा कि देश में कृषि, मछली और अन्य उत्पादों का परिवहन एक बड़ी समस्या है।

नयी दिल्ली। भारत को लॉजिस्टिक्स की लागत को कम करने के लिए माल ढुलाई क्षमता को बढ़ाने की जरूरत है। केंद्रीय सड़क परिवहन एव राजमार्ग मंत्री ने नितिन गडकरी ने मंगलवार को यह बात कही। इसके साथ ही गडकरी ने कहा कि रक्षा और एयरलाइन कंपनियों के पुराने विमानों को मालवाहक या कार्गो विमान में बदलने की संभावना तलाशी जानी चाहिए। डोमेस्टिक एयर कार्गो एजेंट एसोसिएशन के सदस्यों के साथ परिचर्चा में सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री ने कहा कि मत्स्य पालन क्षेत्र में व्यापक संभावनाएं हैं। मत्स्य अर्थव्यवस्था को अभी के एक लाख करोड़ रुपये से छह लाख करोड़ रुपये पहुंचाया जा सकता है। एसोसिएशन के सदस्यों को वीडियो कॉन्फ्रेंस से संबोधित करते हुए गडकरी ने कहा कि देश में कृषि, मछली और अन्य उत्पादों का परिवहन एक बड़ी समस्या है।

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‘‘लॉजिस्टिक्स की लागत को कम करने के लिए हमें माल ढुलाई क्षमता बढ़ानी होगीद्य। पुराने रक्षा विमानों तथा एयरलाइन कंपनियों के पुराने विमानों को मालवाहक विमानों में बदलने की संभावना तलाशी जानी चाहिए।’’ उन्होंने कहा कि भारत में लॉजिस्टिक्स की लागत 13 प्रतिशत बैठती है। वहीं विकसित देशों में यह आठ प्रतिशत बैठती है। उन्होंने कहा कि रक्षा क्षेत्र और एयरलाइन कंपनियों के पुराने विमानों को कार्गो विमानों में बदला जाना चाहिए और इनका इस्तेमाल विदेशों को उत्पाद पहुंचाने के लिए किया जाना चाहिए। इन विमानों के लिए पायलटों की नियुक्ति अनुबंध पर की जा सकती। उन्होंने एसोसिएशन के सदस्यों के जेट एयरवेज के विमानों के बेड़े के इस्तेमाल की संभावना तलाशने को कहा। गडकरी ने एसोसिएशन से हवाईअड्डों के आसपास बुनियादी ढांचे के विकास की संभावना तलाशने को कहा। उन्होंने कहा कि वहां शीतगृह लगाए जा सकते हैं, इसकी संभावना का पता लगाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) 17 ऐसे राजमार्ग रास्तों पर काम कर रहा है जहां हवाई पट्टी लगाई जा सकती है। बादे में इसपर विचार किया जाएगा। उन्होंने कहा कि भारत के पास कृषि उत्पाद, फल, सब्जियों और मछलियों के लिए निर्यात की व्यापक संभावना है। उन्होंने कहा कि अभी मत्स्य अर्थव्यवस्था एक लाख करोड़ रुपये की है। इसे बढ़ाकर छह लाख करोड़ रुपये पर पहुंचाया जा सकता है।

डिस्क्लेमर: प्रभासाक्षी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।


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