वित्त वर्ष 2021 में नहीं हुई 2000 के नोटों की सप्लाई, नोटबंदी के बाद सबसे ज्यादा चलन में 500 के नोट

वित्त वर्ष 2021 में नहीं हुई 2000 के नोटों की सप्लाई, नोटबंदी के बाद सबसे ज्यादा चलन में 500 के नोट

आरबीआई की वार्षिक रिपोर्ट 2020 में कहा गया है कि चलन में 2,000 रुपये के नोटों की संख्या मार्च 2018 के अंत में 33,632 लाख नोटों से घटकर मार्च 2019 के अंत में 32,910 लाख नोट और मार्च 2020 के अंत में 27,398 लाख नोट हो गई।

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने गुरुवार को कहा कि वह वित्तीय वर्ष 2021-2022 के लिए 2,000 रुपए के नए नोटों की कोई सप्लाई नहीं हुई है। बता दें कि बैंक ने पिछले वर्ष भी  2,000 रुपए के नए नोटों की कोई सप्लाई नहीं की थी। इंडियन एक्सप्रेस में छपी एक खबर के मुताबिक, यह जानकारी 26 मई को जारी आरबीआई की वार्षिक रिपोर्ट के माध्यम से आई है। आरबीआई की वार्षिक रिपोर्ट में कहा गया है कि वित्त वर्ष 2021 में पेपर कैश की कुल आपूर्ति 0.3 प्रतिशत से घटकर 2,23,301 लाख रही, जो पिछले वर्ष 2,23,875 लाख थी।वहीं 500 रुपये का नोट और 2,000 रूपये के नोटों का अर्थव्यवस्था में उच्चतम मूल्य है, जोकि बैंक नोटों के सभी मूल्य का 85.7 प्रतिशत है। यह आंकड़ा पिछले साल के 83.4% से थोड़ा अधिक है। बता दें कि 500 रुपए के नोट का हिस्सा सबसे ज्यादा यानि की 31.1 प्रतिशत था।

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आरबीआई ने लगातार वर्षों से नए नोटों को शामिल नहीं करते हुए, देश में सबसे अधिक चलन वाले नोटों की मात्रा को कम रखा है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने अपनी पिछले साल की वार्षिक रिपोर्ट में उल्लेख किया है कि वित्त वर्ष 2020 में 2000 रुपये का एक भी नोट नहीं छापा गया था क्योंकि सुरक्षा चिंताओं के कारण अस्थायी रूप से उच्च मूल्य के नोटों की छपाई बंद कर दी गई थी।आरबीआई की वार्षिक रिपोर्ट 2020 में कहा गया है कि चलन में 2,000 रुपये के नोटों की संख्या मार्च 2018 के अंत में 33,632 लाख नोटों से घटकर मार्च 2019 के अंत में 32,910 लाख नोट और मार्च 2020 के अंत में 27,398 लाख नोट हो गई। वहीं 2016 में, केंद्र सरकार ने काले धन की जमाखोरी पर अंकुश लगाने के लिए दो उच्चतम मूल्य के नोटों, पुराने 500 रुपये के नोट और पुराने 1,000 रुपये के नोटों को अचानक बंद करने की घोषणा कर दी थी। इसके बाद 2000 रुपये के नोट प्रचलन में आ गए थे।