RBI ने डीबीएस इंडिया के साथ लक्ष्मी विलास बैंक के अंतिम विलय की योजना को अगले सप्ताह के लिये टाल दिया

  •  प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क
  •  नवंबर 21, 2020   09:28
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RBI ने डीबीएस इंडिया के साथ लक्ष्मी विलास बैंक के अंतिम विलय की योजना को अगले सप्ताह के लिये टाल दिया
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लक्ष्मी विलास बैंक में प्रवर्तकों के पास महज 6.8 प्रतिशत हिस्सेदारी है। इसमें 4.8 प्रतिशत हिस्सेदारी केआर प्रदीप के पास तथा शेष दो प्रतिशत हिस्सेदारी अन्य तीन प्रवर्तक परिवारों एन राममित्रम, एनटी शाह और एसबी प्रभाकरन के पास है।

मुंबई। रिजर्व बैंक ने डीबीएस इंडिया के साथ लक्ष्मी विलास बैंक (एलवीबी) के अंतिम विलय की पक्की योजना की घोषणा को संभवत: अगले सप्ताह के लिये टाल दिया है। पहले केंद्रीय बैंक यह योजना शुक्रवार को जारी करने वाला था। केंद्रीय बैंक के एक अधिकारी के अनुसार, रिजर्व बैंक के अगले सप्ताह ऐसा करने की संभावना है। रिजर्व बैंक ने लक्ष्मी विलास बैंक के ऊपर पाबदियां लगाने के साथ ही 17 नवंबर को उसके विलय का मसौदा भी जारी किया था। रिजर्व बैंक ने कहा था कि वह 20 नवंबर को अंतिम विलय योजना जारी करेगा। हालांकि 20 नवंबर की रात 10 बजे तक रिजर्व बैंक ने अंतिम योजना जारी नहीं की। संपर्क किये जाने पर रिजर्व बैंक के एक वरिष्ठ अधिकारी ने पीटीआई-को बताया कि अब यह योजना अगले सप्ताह की शुरुआत में जारी की जायेगी। 

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लक्ष्मी विलास बैंक में प्रवर्तकों के पास महज 6.8 प्रतिशत हिस्सेदारी है। इसमें 4.8 प्रतिशत हिस्सेदारी केआर प्रदीप के पास तथा शेष दो प्रतिशत हिस्सेदारी अन्य तीन प्रवर्तक परिवारों एन राममित्रम, एनटी शाह और एसबी प्रभाकरन के पास है। बैंक में इंडियाबुल्स हाउसिंग की अगुवाई वाले संस्थागत निवेशकों की 20 प्रतिशत से कुछ अधिक तथा खुदरा शेयरधारकों की 45 प्रतिशत से अधिक हिस्सेदारी है। अन्य संस्थागत निवेशकों में प्रोलिफिक फिनवेस्ट (3.36 प्रतिशत), श्रेई इंफ्रा फाइनेंस (3.34 प्रतिशत), कैपरी ग्लोबल एडवाइजरी सर्विसेज (2 प्रतिशत), एमएन दस्तूर एंड कंपनी (1.89 प्रतिशत), कैपिटल ग्लोबल होल्डिंग्स (1.82 प्रतिशत), ट्रिनिटी अल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट मैनेजर्स (1.61 फीसदी), बॉयेंस इंफ्रास्ट्रक्चर (1.36 फीसदी) और एलआईसी (1.32 फीसदी) शामिल हैं।







बढ़ते FDI से भारत के प्रति निवेशकों के भरोसे का पता चलता है: पीयूष गोयल

  •  प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क
  •  नवंबर 28, 2020   17:27
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बढ़ते FDI से भारत के प्रति निवेशकों के भरोसे का पता चलता है: पीयूष गोयल
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत में अनुकूल होते माहौल के प्रति वैश्विक निवेशकों के भरोसे का पता चलता है। एफडीआई जुलाई-सितंबर तिमाही में साल भर पहले के 14.06 अरब डॉलर से बढ़कर 28.1 अरब डॉलर हो गया है।

नयी दिल्ली। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने शनिवार को कहा कि प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) में हो रही वृद्धि से भारत में अनुकूल होते माहौल के प्रति निवेशकों की दिलचस्पी का पता चलता है। चालू वित्त वर्ष में जुलाई से सितंबर महीने के दौरान भारत में 28.1 अरब डॉलर का एफडीआई आया है। साल भर पहले की समान अवधि में यह निवेश 14.06 अरब डॉलर रहा था। गोयल ने एक ट्वीट किया, ‘‘कोरोना वायरस महामारी के बाद भी सालाना आधार पर एफडीआई दोगुना हुआ है।

इससे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत में अनुकूल होते माहौल के प्रति वैश्विक निवेशकों के भरोसे का पता चलता है। एफडीआई जुलाई-सितंबर तिमाही में साल भर पहले के 14.06 अरब डॉलर से बढ़कर 28.1 अरब डॉलर हो गया है।’’ आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में एफडीआई 15 प्रतिशत बढ़कर 30 अरब डॉलर पर पहुंच गया।







चालू वित्त वर्ष में अर्थव्यवस्था के बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद: मुख्य आर्थिक सलाहकार

  •  प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क
  •  नवंबर 28, 2020   12:17
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चालू वित्त वर्ष में अर्थव्यवस्था के बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद: मुख्य आर्थिक सलाहकार
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मुख्य आर्थिक सलाहकार (सीईए) केवी सुब्रमणियम ने शुक्रवार को कहा कि अर्थव्यवस्था का जिस तेजी से पुनरूद्धार हो रहा है उससे लगता है कि चालू वित्त वर्ष में इसका प्रदर्शन अब तक के अनुमानों सेबेहतर रहेगा।

नयी दिल्ली। मुख्य आर्थिक सलाहकार (सीईए) केवी सुब्रमणियम ने शुक्रवार को कहा कि अर्थव्यवस्था का जिस तेजी से पुनरूद्धार हो रहा है उससे लगता है कि चालू वित्त वर्ष में इसका प्रदर्शन अब तक के अनुमानों सेबेहतर रहेगा। दूसरी तिमाही में अर्थव्यवस्था में संकुचन अनुमान के विपरीत कम रहने के बीच उन्होंने यह बात कही। सुब्रमणियम ने कहा कि भारतीय रिजर्व बैंक समेत विभिन्न संस्थानों ने चालू वित्त वर्ष में जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) को लेकर जो अनुमान जताया है, अंतिम आंकड़ा उससे बेहतर होना चाहिए।

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केंद्रीय बेंक ने 2020-21 में अर्थव्यवस्था में 9.5 प्रतिशत की गिरावट का अनुमान जताया है। वैश्विक महामारी के संकट के बीच भारत की अर्थव्यवस्था का प्रदर्शन चालू वित्त वर्ष की जुलाई-सितंबर तिमाही में उम्मीद से बेहतर रहा है। ताजा सरकारी आंकड़ों के अनुसार विनिर्माण क्षेत्र में तेजी से जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) में दूसरी तिमाही में केवल 7.5 प्रतिशत की गिरावट आयी जबकि इससे बड़े संकुचन का अनुमान लगाया जा रहा था। एक साल पहले इसी तिमाही में इसमें 4.4 प्रतिशत की वृद्धि हुई थी। आने वाले समय में बेहतर उपभोक्ता मांग से इसमें और सुधार की उम्मीद जतायी जा रही है।

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कोरोना वायरस महामारी फैलने से रोकने के लिए लागू सख्त सार्वजनिक पाबंदियों के बीच चालू वित्त वर्ष 2020-21 की पहली तिमाही अप्रैल-जून में अर्थव्यवस्था में 23.9 प्रतिशत की बड़ी गिरावट आयी थी। कई विश्लेषकों के अनुमान से तुलना करते हुए सुब्रमणियम ने कहा कि दूसरी तिमाही के आंकड़े काफी उत्साहजनक हैं। आंकडों (पीएमआई, बिजली खपत, माला ढुलाई आदि) से यह संकेत मिल रहा था। उन्होंने कहा कि अर्थव्यवस्था में पुनरूद्धार का टिकाऊ होना महामारी के फैलने पर निर्भर करता है। उन्होंने कहा कि संक्रमण के मामले में पहली तेजी सितंबर में अपने चरम पर पहुंची और उसके बाद यह कुछ कम हुई है। लेकिन जाड़े के महीनों मेंसतर्कता बरतने की जरूरत है। निकट भविष्य के लिये परिदृश्य के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा, ‘‘हमें सतर्क रहते हुए उम्मीद करनी चाहिए और कोरोना महामारी के कारण अर्थव्यवस्था पर पड़े प्रभाव को देखते हुए सतर्कता जरूरी है।’’

पूरे वित्त वर्ष के अनुमान के बारे में पूछे जाने पर मुख्य आर्थिक सलाहकार ने कहा, ‘‘...पहली और दूसरी तिमाही में जो चीजें देखने को मिली और... जो अच्छा सुधार देखने को मिल रहा है, मेरे हिसाब से अर्थव्यवस्था के बेहतर प्रदर्शन की संभावना है।’’ सुब्रमणियम ने कहा कि हालांकि मौजूदा अनिश्चितता को देखते हुए यह बताना मुश्किल है कि अर्थव्यवस्था सकारात्मक दायरे में तीसरी तिमाही में आएगी या फिर चौथी तिमाही में। उन्होंने कहा, ‘‘मेरा अनुमान है कि हम निश्चित रूप से पुनरूद्धार के रास्ते पर बढ़ेंगे लेकिन इसके लिये जरूरी है कि महामारी नियंत्रण में रहे।’’ खाद्य मुद्रास्फीति के बारे में सीईए ने कहा कि तीसरी तिमाही में खाद्य वस्तुओं की महंगाई दर नरम हुई है और इस पर सरकार की तरफ से कड़ी नजर रखी जा रही है।







जेएसडब्ल्यू स्टील को भूखंड बिक्री की जांच करेगी कर्नाटक मंत्रिमंडल की उप-समिति

  •  प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क
  •  नवंबर 28, 2020   12:14
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जेएसडब्ल्यू स्टील को भूखंड बिक्री की जांच करेगी कर्नाटक मंत्रिमंडल की उप-समिति
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कर्नाटक मंत्रिमंडल ने बल्लारी जिले में जेएसडब्ल्यू स्टील को 2,000.58 एकड़ जमीन की बिक्री के प्रस्ताव की जांच करने और एक उपयुक्त सिफारिश करने के लिये मंत्रिमंडलीय उप समिति का गठन करने का फैसला किया।

बेंगलुरू। कर्नाटक मंत्रिमंडल ने बल्लारी जिले में जेएसडब्ल्यू स्टील को 2,000.58 एकड़ जमीन की बिक्री के प्रस्ताव की जांच करने और एक उपयुक्त सिफारिश करने के लिये मंत्रिमंडलीय उप समिति का गठन करने का फैसला किया। विधि एवं संसदीय कार्य मंत्री जेसी मधुस्वामी ने कहा, ‘‘2005 में बल्लारी के सैंडूर तालुक में तोरणागल्लू के पास कुरुकुप्पा गांव में जेएसडब्ल्यू को 2,000.58 एकड़ सरकारी जमीन देने का फैसला किया गया था।

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इसकी जांच के लिये एक मंत्रिमंडलीय उप-समिति का गठन किया जायेगा।’’ मंत्रिमंडल की बैठक के बाद यहां पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री बी एस येदियुरप्पा को उप समिति के गठन के लिये अधिकृत किया गया है।

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पिछली कांग्रेस-जद (एस) गठबंधन सरकार ने भी प्रस्ताव की जांच करने के लिये तत्कालीन गृह मंत्री एमबी पाटिल की अध्यक्षता में चार सदस्यीय कैबिनेट उप-समिति का गठन किया था।