अटकी आवासीय परियोजनाओं में फंसे घर खरीदारों को बड़ी राहत, जल्द मिलेगा घर !

  •  प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क
  •  नवंबर 7, 2019   08:35
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अटकी आवासीय परियोजनाओं में फंसे घर खरीदारों को बड़ी राहत, जल्द मिलेगा घर !
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वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बताया कि सरकार इस कोष के लिये वैकल्पिक निवेश कोष में 10,000 करोड़ रुपये डालेगी जबकि शेष 15,000 करोड़ रुपये का योगदान भारतीय स्टेट बैंक और भारतीय जीवन बीमा निगम की ओर से किया जायेगा।

नयी दिल्ली। सरकार ने अटकी आवासीय परियोजनाओं में फंसे मकान खरीदारों और रीयल एस्टेट कंपनियों को बुधवार को बड़ी राहत देने की घोषणा की है। केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने 1,600 अटकी पड़ी आवासीय परियोजनाओं को पूरा करने के लिये 25,000 करोड़ रुपये के कोष को मंजूरी दी है। इससे देशभर में 4.59 लाख आवासीय इकाइयों को पूरा करने में मदद मिलेगी और सुस्त पड़ती अर्थव्यवस्था को फिर से पटरी पर लाया जा सकेगा। 

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई केन्द्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में इससे संबंधित प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। बैठक के बाद वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संवाददाताओं को बताया कि सरकार इस कोष के लिये वैकल्पिक निवेश कोष (एआईएफ) में 10,000 करोड़ रुपये डालेगी जबकि शेष 15,000 करोड़ रुपये का योगदान भारतीय स्टेट बैंक और भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) की ओर से किया जायेगा। इससे कोष का समूचा आकार 25,000 करोड़ रुपये तक पहुंच जायेगा। 

वित्त मंत्री ने कहा कि कई सावरेन कोषों ने भी इसमें रुचि दिखाई है और वह भी बाद में इस योजना में शामिल हो सकते हैं। इस बीच सूत्रों ने बताया है कि रुकी पड़ी 1,600 परियोजनाओं में करीब 3.5 लाख करोड़ रुपये निवेश किये जा चुके हैं और इन्हें पूरा करने के लिये 55,000 से लेकर 80,000 करोड़ रुपये की आवश्यकता होगी। सीतारमण ने स्पष्ट किया कि इस कोष के तहत केवल रेरा में पंजीकृत परियोजनाओं पर ही विचार किया जायेगा। यह कोष पूंजी बाजार नियामक सेबी में पंजीकृत दूसरी श्रेणी का एआईएफ कोष होगा। इस कोष का प्रबंधन एसबीआईकैप वेंचर्स लिमिटेड करेगी। 

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वित्त मंत्री ने सबसे पहले 14 सितंबर को इस कोष की घोषणा की थी। यह कोष मध्यम और निम्न आय वर्ग की अधूरी पड़ी 1,600 परियोजनाओं को पूरा करने के लिये एक विशेष खिड़की का काम करेगा। उन्होंने कहा कि मंत्रिमंडल ने आज जिस योजना को मंजूरी दी है वह 14 सितंबर की योजना का ही नया रूप है। वित्त मंत्री ने कहा, ‘‘सरकार की मंशा अधूरी पड़ी आवासीय परियोजनाओं को पूरा करने की है ताकि लोगों की समस्याओं को दूर किया जा सके।’’

सीतारमण ने कहा कि पिछले कुछ महीनों के दौरान घर खरीदारों, संगठनों, बैंकों और रिजर्व बैंक के साथ बैठकें हुई, जिसके बाद योजना में सुधार का फैसला किया गया। योजना में उन परियोजनाओं को भी शामिल करने का फैसला किया गया जिन्हें कर्ज देने वाले बैंकों और वित्तीय संस्थाओं ने गैर- निष्पादित परिसंपत्ति (एनपीए) घोषित कर दिया गया है। और उन परियोजनाओं को भी शामिल किया गया है जिन्हें दिवाला प्रक्रिया के तहत घसीट लिया गया है। 

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उन्होंने कहा कि इस योजना के तहत केवल रेरा पंजीकृत और सकारात्मक नेटवर्थ वाली परियोजनाओं को ही कोष उपलब्ध कराया जायेगा। उन्होंने कहा ‘‘परियोजना यदि शुरू ही नहीं हुई है तो ऐसी परियोजना को इस कोष से कोई राहत नहीं मिलेगी। मान लीजिये यदि किसी परियोजना में तीन टावर बनने हैं, उसमें एक टावर में 50 प्रतिशत काम हुआ है, दूसरे में 30 प्रतिशत और तीसरे में कोई ही काम नहीं हुआ है, तो हम सबसे पहले 50 प्रतिशत पूरी हुई परियोजना को कोष उपलब्ध करायेंगे।’’

सरकार की इस पहल से न केवल अर्थव्यवस्था में रोजगार पैदा होंगे बल्कि सीमेंट, लोहा और इस्पात उद्योग की भी मांग बढ़ेगी। इस फैसले का उद्देश्य अर्थव्यवस्था के इस प्रमुख क्षेत्र पर बने दबाव से उसे राहत पहुंचाना भी है। सीतारमण ने कोष के बारे में जानकारी देते हुये कहा कि परियोजना के बिल्डर को सीधे धन नहीं दिया जायेगा बल्कि एक अलग खाते (एस्क्रो) में धन रखा जायेगा जिसपर क्षेत्र के लिये गठित विशेषज्ञ समिति नजर रखेगी।समिति सुनिश्चित करेगी कि यह धन केवल परियोजनाओं को पूरा करने में ही लगे। जैसे जैसे निर्माण कार्य आगे बढ़ेगा वैसे ही राशि जारी की जायेगी। 

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सीतारमण ने कहा कि एआईएफ का इस्तेमाल ऐसी परियोजनाओं में भी किया जा सकता है जिन्हें गैर- निष्पादित परिसंपत्ति (एनपीए) घोषित कर दिया गया है और जिन परियोजनाओं को दिवाला एवं रिण शोधन अक्षमता संहिता (आईबीसी) के तहत प्रक्रिया का सामना करना पड़ रहा है। वित्त मंत्री ने एक सवाल के जवाब में कहा कि यदि किसी परियोजना के लिये बिल्डर ने पूरा पैसा मकान खरीदारों से ले लिया है और उस पर कोई काम शुरू नहीं हुआ है तो ऐसे मामलों का निपटान राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) में ही होगा। 







कृषि प्रौद्योगिकी स्टार्टअप फार्मकार्ट कारोबार विस्तार के लिये जुटायेगी 90 करोड़ रुपये

  •  प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क
  •  नवंबर 28, 2020   18:57
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कृषि प्रौद्योगिकी स्टार्टअप फार्मकार्ट कारोबार विस्तार के लिये जुटायेगी 90 करोड़ रुपये
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मध्य प्रदेश स्थित कृषि प्रौद्योगिकी स्टार्टअप कंपनी फार्मकार्ट की योजना देशभर में कारोबार का विस्तार करने के लिये वेंचर निवेशकों से 90 करोड़ रुपये की राशि जुटाने की है। कंपनी के एक शीर्ष अधिकारी ने इसकी जानकारी दी।

मुंबई। मध्य प्रदेश स्थित कृषि प्रौद्योगिकी स्टार्टअप कंपनी फार्मकार्ट की योजना देशभर में कारोबार का विस्तार करने के लिये वेंचर निवेशकों से 90 करोड़ रुपये की राशि जुटाने की है। कंपनी के एक शीर्ष अधिकारी ने इसकी जानकारी दी। कंपनी के संस्थापक अतुल पाटीदार ने पीटीआई-से कहा, ‘‘अभी हम मध्य प्रदेश में 1,240 स्थानों पर परिचालन कर रहे हैं।

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हमने शुरुआत में इस उपक्रम में 15 करोड़ रुपये निवेश किया। अब हम वेंचर निवेशकों से 90 करोड़ रुपये जुटाने पर विचार कर रहे हैं।’’ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में ‘मन की बात’ के एक एपिसोड में किसानों को डिजिटल तरीके से जोड़ने के प्रयासों के लिये पाटीदार की सराहना की थी।







घरेलू उड़ानों में यात्रियों की संख्या कोविड-19 पूर्व के 65 प्रतिशत पर पहुंचीं : खरोला

  •  प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क
  •  नवंबर 28, 2020   18:53
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घरेलू उड़ानों में यात्रियों की संख्या कोविड-19 पूर्व के 65 प्रतिशत पर पहुंचीं : खरोला
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नागर विमानन सचिव प्रदीप सिंह खरोला ने कहा है कि घरेलू स्तर पर विमान सेवाएं कोविड-19 पूर्व के 65 प्रतिशत पर पहुंच गई हैं और अब पर्यटन उद्योग को फिर से अपने पैरों पर खड़ा करने के लिए रणनीति बनाने की जरूरत है।

मुंबई। नागर विमानन सचिव प्रदीप सिंह खरोला ने कहा है कि घरेलू स्तर पर विमान सेवाएं कोविड-19 पूर्व के 65 प्रतिशत पर पहुंच गई हैं और अब पर्यटन उद्योग को फिर से अपने पैरों पर खड़ा करने के लिए रणनीति बनाने की जरूरत है। खरोला ने शनिवार को फेडरेशन ऑफ एसोसिएशन ऑफ इंडियन टूरिजम एंड हॉस्पिटैलिटी (फेथ) द्वारा आयोजित वेबिनार ‘विमानन और पर्यटन-आगे की राह’ को संबोधित करते हुए कहा कि कोविड-19 महामारी के दौरान हवाई यात्रा परिवहन का सुरक्षित साधन होने की वजह से सबसे पसंदीदा विकल्प बन गई है।

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उन्होंने बताया कि शुक्रवार को घरेलू उड़ानों से 2.50 लाख लोगों ने यात्रा की। महामारी से पहले प्रतिदिन घरेलू उड़ानों के यात्रियों की संख्या औसतन 3.70 से 3.75 लाख रहती थी। इस तरह घरेलू उड़ानों के यात्रियों की संख्या कोविड-19 पूर्व के 65 प्रतिशत पर पहुंच गई है। उन्होंने कहा कि और कारोबारी गतिविधियां शुरू होने तथा कॉलेज आदि खुलने के बाद आगामी दो से तीन माह में यह 80-90 प्रतिशत या सामान्य स्तर पर पहुंच जाएगी। उन्होंने कहा कि अभी कारोबारी यात्रा को सामान्य होने में समय लगेगा।

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हालांकि, दोस्तों और संबंधियों से मिलने जाना यानी पीएफआर खंड की वजह से आगे विमानन क्षेत्र की मांग बढ़ेगी। अनुसूचित अंतरराष्ट्रीय वाणिज्यिक उड़ानें शुरू होने के बारे में खरोला ने कहा, ‘‘अंतरराष्ट्रीय उड़ानें सिर्फ हमारे ऊपर नहीं, बल्कि दूसरे पक्ष पर भी निर्भर करती हैं।’’ उन्होंने कहा कि घरेलू विमानन क्षेत्र पटरी पर लौट रहा है, अब पर्यटन उद्योग को फिर खड़ा करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि विमानन क्षेत्र की स्थिति सामान्य हो रही है। इससे पर्यटन उद्योग की स्थिति को भी सामान्य करने में मदद मिलेगी।







पंजाब ने जीएसटी राजस्व की भरपाई को कर्ज लेने के केंद्र के विकल्प को स्वीकार किया

  •  प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क
  •  नवंबर 28, 2020   18:45
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कांग्रेस शासित पंजाब ने माल एवं सेवा कर (जीएसटी) की कमी को पूरा करने के लिए कर्ज लेने के केंद्र के प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया है, जिसके तहत उसे विशेष माध्यम से 8,359 करोड़ रुपये मिलेंगे।

नयी दिल्ली। कांग्रेस शासित पंजाब ने माल एवं सेवा कर (जीएसटी) की कमी को पूरा करने के लिए कर्ज लेने के केंद्र के प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया है, जिसके तहत उसे विशेष माध्यम से 8,359 करोड़ रुपये मिलेंगे। वित्त मंत्रालय ने एक बयान में कहा, ‘‘पंजाब सरकार ने जीएसटी के लागू होने से हुई राजस्व की कमी को पूरा करने के लिए विकल्प-1 को स्वीकार करने की सूचना दी है। इस विकल्प को चुनने वाले राज्यों की संख्या 26 हो गई है। तीनों केंद्र शासित प्रदेशों (दिल्ली, जम्मू-कश्मीर, पुडुचेरी) ने भी विकल्प-1 को चुना है।’’

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केंद्र ने पहले ही राज्यों की ओर से चार किस्तों में 24,000 करोड़ रुपये उधार लिए हैं और इसे 23 राज्यों और तीन केंद्र शासित प्रदेशों को 23 अक्टूबर, दो नवंबर, नौ नवंबर और 23 नवंबर को दिया जा चुका है। उधारी के अगले चक्र से पंजाब, केरल और पश्चिम बंगाल को धनराशि मिलेगी। इस सप्ताह की शुरुआत में केरल और पश्चिम बंगाल ने भी जीएसटी की कमी को पूरा करने के लिए इस उधारी विकल्प को स्वीकार करने की सूचना केंद्र को दी थी।

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विकल्प-एक का चयन करने वाले राज्यों को जीएसटी के क्रियान्यन से हुए नुकसान की भरपाई के लिए कर्ज लेने की विशेष सुविधा दी जाएगी। साथ ही इस विकल्प को स्वीकार करने पर राज्यों को आत्मनिर्भर भारत मिशन के तहत राज्य सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) के 0.50 प्रतिशत की अंतिम किस्त का कर्ज बिना किसी शर्त के लेने की अनुमति होगी। इस मिशन के तहत राज्य जीएसडीपी का कुल दो प्रतिशत उधार ले सकते हैं।