भारतीय मार्केट में पेश होने जा रही हैं पेट्रोल इंजन वाली Renault Duster turbo, शुरुआती कीमत है इतनी

  •  प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क
  •  अगस्त 17, 2020   17:00
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भारतीय मार्केट में पेश होने जा रही हैं पेट्रोल इंजन वाली Renault Duster turbo, शुरुआती कीमत है इतनी

वाहन कंपनी रेनॉ इंडिया ने 1.3 टर्बो पेट्रोल इंजन वाली डस्टर पेश किया है। कंपनी ने कहा कि डस्टर का मौजूदा 1.5 लीटर इंजन क्षमता वाला मॉडल भी बाजार में उपलब्ध रहेगा। इसकी कीमत 8.59 लाख रुपये से 9.99 लाख रुपये के बीच है। कंपनी ने डस्टर के लिए डीजल का कोई मॉडल पेश नहीं किया है।

नयी दिल्ली।वाहन कंपनी रेनॉ इंडिया ने सोमवार को अपनी एसयूवी डस्टर का नया मॉडल पेश किया। इसमें 1.3 लीटर का टर्बो पेट्रोल इंजन है। इसकी शोरूम में कीमत 10.49 लाख रुपये और 13.59 लाख रुपये के बीच है। कंपनी ने एक बयान में कहा कि 1.3 लीटर टर्बो इंजन के मैनुअल मॉडल की कीमत 10.49 लाख रुपये, 11.39 लाख रुपये और 11.99 लाख रुपये है। वहीं स्वचालित मॉडल की कीमत 12.99 लाख और 13.59 लाख रुपये है।

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कंपनी ने कहा कि डस्टर का मौजूदा 1.5 लीटर इंजन क्षमता वाला मॉडल भी बाजार में उपलब्ध रहेगा। इसकी कीमत 8.59 लाख रुपये से 9.99 लाख रुपये के बीच है। कंपनी ने डस्टर के लिए डीजल का कोई मॉडल पेश नहीं किया है। रेनॉ इंडिया के मुख्य कार्यकारी अधिकारी और प्रबंध निदेशक वेंकटराम ममिलापल्ले ने कहा कि डस्टर का यह नया मॉडल भारतीय बाजार में उसकी एक नयी कहानी शुरू करेगा।





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अनावश्यक यात्राओं में कमी लाने के लिए कम दूरी की ट्रेनों के किराए में मामूली वृद्धि: रेलवे

  •  प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क
  •  फरवरी 24, 2021   20:37
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अनावश्यक यात्राओं में कमी लाने के लिए कम दूरी की ट्रेनों के किराए में मामूली वृद्धि: रेलवे

कोविड-19 लॉकडाउन में छूट के बाद से रेलवे सिर्फ स्पेशल ट्रेनें चला रही है। शुरुआत में सिर्फ लंबी दूरी की ट्रेनों का संचालन किया जा रहा था लेकिन अब कम दूरी की यात्री ट्रेनों का भी परिचालन हो रहा है।

नयी दिल्ली। कम दूरी की यात्री ट्रेनों के किराए में बढ़ोत्तरी पर लोगों द्वारा चिंता जताए जाने के बाद भारतीय रेल ने बुधवार को कहा कि अनावश्यक यात्राओं में कमी लाने के लक्ष्य से किराए में मामूली वृद्धि की गई है। कोविड-19 लॉकडाउन में छूट के बाद से रेलवे सिर्फ स्पेशल ट्रेनें चला रही है। शुरुआत में सिर्फ लंबी दूरी की ट्रेनों का संचालन किया जा रहा था लेकिन अब कम दूरी की यात्री ट्रेनों का भी परिचालन हो रहा है।

रेल मंत्रालय के बयान के अनुसार, कोविड-19 महामारी के मद्देनजर विशेष प्रावधान के तहत इन ट्रेनों का किराया इतनी ही दूरी की मेल और एक्सप्रेस ट्रेनों में अनारक्षित टिकट जितना तय किया गया है। यात्री और लोकल ट्रेन सेवा फिर से शुरू करने के बाद रेलवे को किराए में वृद्धि को लेकर यात्रियों की आलोचना झेलनी पड़ी थी। उदाहरण के लिए अमृतसर से पठानकोट का किराया अब 55 रुपये है जो पहले 25 रुपये था। इसी तरह जालंधर से फिरोजपुर तक डीएमयू का किराया 30 रुपये से बढ़कर 60 रुपये हो गया है। बयान के अनुसार, ‘‘रेलवे सूचित करना चाहता है कि यात्री और कम दूरी की अन्य ट्रेनों के किराए में यह मामूली बढ़ोत्तरी लोगों को अनावश्यक यात्राएं करने से रोकने के लिए किया गया है।’’ 

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उसमें कहा गया है, ‘‘कोविड-19 अभी भी है और कुछ राज्यों में स्थिति बिगड़ रही है। कई राज्यों से आने वाले यात्रियों की स्क्रीनिंग की जा रही है और उन्हें यात्रा करने के लिए हतोत्साहित किया जा रहा है। किराए में मामूली वृद्धि को ट्रेनों में भीड़ होने से और कोविड-19 को फैलने से रोकने के रेलवे के प्रयास के रूप में देखा जाना चाहिए।’’ गौरतलब है कि कोविड-19 के कारण भारतीय रेल ने 22 मार्च, 2020 को ट्रेनों का परिचालन पूरी तरह बंद कर दिया था।





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व्यवसाय करना सरकार का काम नहीं, सरकारी उपक्रम रणनीतिक क्षेत्र तक सीमित किए जाएंगे: मोदी

  •  प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क
  •  फरवरी 24, 2021   19:04
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व्यवसाय करना सरकार का काम नहीं, सरकारी उपक्रम रणनीतिक क्षेत्र तक सीमित किए जाएंगे: मोदी

प्रधानमंत्री ने कहा कि रुग्ण सार्वजनिक उपक्रमों को वित्तीय समर्थन देते रहने से अर्थव्यवस्था पर बोझ पड़ता है। मोदी ने सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों पर आयोजित वेबिनार में कहा कि बजट 2021-22 में भारत को ऊंची वृद्धि की राह पर ले जाने के लिए स्पष्ट रूपरेखा बनाई गई है।

नयी दिलली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को कहा कि ‘‘व्यवसाय करना सरकार का काम नहीं है’’ और उनकी सरकार रणनीतिक क्षेत्र में कुछ सीमित संख्या में सरकारी उपक्रमों को छोड़कर बाकी क्षत्रों के सार्वजनिक उपक्रमों के निजीकरण को प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि ‘‘सरकारी कंपनियों को केवल इसलिए नहीं चलाया जाना चाहिए कि वे विरासत में मिली हैं।’’ प्रधानमंत्री ने कहा कि रुग्ण सार्वजनिक उपक्रमों को वित्तीय समर्थन देते रहने से अर्थव्यवस्था पर बोझ पड़ता है। मोदी ने सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों पर आयोजित वेबिनार में कहा कि बजट 2021-22 में भारत को ऊंची वृद्धि की राह पर ले जाने के लिए स्पष्ट रूपरेखा बनाई गई है।

उन्होंने कहा कि कई सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम घाटे में हैं, कइयों को करदाताओं के पैसे से मदद दी जा रही है। रुग्ण सार्वजनिक उपक्रमों को वित्तीय समर्थन से अर्थव्यवस्था पर बोझ पड़ता है, सरकारी कंपनियों को केवल इसलिए नहीं चलाया जाना चाहिए कि वे विरासत में मिली हैं। उन्होंने कहा व्यवसाय करना सरकार का काम नहीं,सरकार का ध्यान जन कल्याण पर होना चाहिए। सरकार के पास कई ऐसी संपत्तियां हैं, जिसका पूर्ण रूप से उपयोग नहीं हुआ है या बेकार पड़ी हुई हैं, ऐसी 100 परिसंपत्तियों को बाजार में चढ़ाकर 2.5 लाख करोड़ रुपये जुटाये जाएंगे। मोदी ने कहा सरकार मौद्रिकरण, आधुनिकीकरण पर ध्यान दे रही है। निजी क्षेत्र से दक्षता आती है, रोजगार मिलता है। निजीकरण, संपत्ति के मौद्रिकरण से जो पैसा आएगा उसे जनता पर खर्च किया जाएगा। 

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प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार चार रणनीतिक क्षेत्रों को छोड़कर अन्य सभी क्षेत्रों के सार्वजनिक उपक्रमों के निजीकरण को प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि रणनीतिक महत्व वाले चार क्षेत्रों में सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों को कम से कम स्तर पर रखा जायेगा। मोदी ने कहा कि उनकी सरकार 111 लाख करोड़ रुपये की नयी राष्ट्रीय बुनियादी ढांचा परियोजनाओं पाइपलाइन (सूची) पर काम कर रही है।





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टाटा कम्युनिकेशंस, पेंटोने को कुछ शर्तों के साथ अधिग्रहण के कुछ नियमों से छूट

  •  प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क
  •  फरवरी 24, 2021   18:34
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टाटा कम्युनिकेशंस, पेंटोने को कुछ शर्तों के साथ अधिग्रहण के कुछ नियमों से छूट

पूंजी बाजार नियामक सेबी ने पेनटोन फिनवेस्ट लिमिटेड को टाटा कम्युनिकेशंस के प्रस्तावित प्रत्यक्ष अधिग्रहण के लिए कुछ नियमों के अनुपालन से छूट दी है।

नयी दिल्ली। पूंजी बाजार नियामक सेबी ने पेनटोन फिनवेस्ट लिमिटेड को टाटा कम्युनिकेशंस के प्रस्तावित प्रत्यक्ष अधिग्रहण के लिए कुछ नियमों के अनुपालन से छूट दी है। पेंटोने को बड़ी हिस्सेदारी खरीदने के नियमों के संबंध में यह रियायत कुछ शर्तों के साथ होगी और केवल शेयर खरीदने की खुली पेशकश और मूल्यांकन की दशा तक ही सीमित रखी गई है। सेबी की तरफ से यह पहल पेंटोने की ओर से भेजे गये आवेन के जवाब में की गई। कंपनी ने एसएएसटी नियमन के तहत कुछ प्रावधानों से छूटद दिये जाने का आग्रह किया था।

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टाटा कम्युनिकंशंस में 25.01 प्रतिशत तक सार्वजनिक शेयरहोल्डिंग है जबकि गैर- सार्वजनिक शेयरधारिता 74.99 प्रतिशत तक है जो कि पूरी तरह से उसके प्रवर्तकों और प्रवर्तक समूह के पास है। कंपनी में भारत सरकार भी 26.12 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ एक प्रवर्तक है कंपनी का प्रस्तावित अधिग्रहण निवेश एवं सार्वजनिक संपत्ति प्रबंधन विभाग की सिफारिश पर आधारित है। इसके तहत भारत सरकार टाटा कम्युनिकेशंस में अपनी 26.12 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचना चाहती है।





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