युवा वैज्ञानिकों को आर्थिक मदद देकर प्रोत्साहित कर रही है सरकार, ऐसे करें आवेदन

  •  Buddy4Study India Foundation
  •  अगस्त 22, 2018   15:39
  • Like
युवा वैज्ञानिकों को आर्थिक मदद देकर प्रोत्साहित कर रही है सरकार, ऐसे करें आवेदन
Image Source: Google

पूरे देश के होनहार युवा वैज्ञानिकों को हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी भारत सरकार के विज्ञान एवं तकनीक विभाग (डीएसटी) द्वारा फैलोशिप देकर प्रोत्साहित किया जा रहा है। यह फैलोशिप “किशोर वैज्ञानिक प्रोत्साहन योजना” के नाम से जारी की जाती है।

पूरे देश के होनहार युवा वैज्ञानिकों को हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी भारत सरकार के विज्ञान एवं तकनीक विभाग (डीएसटी) द्वारा फैलोशिप देकर प्रोत्साहित किया जा रहा है। यह फैलोशिप “किशोर वैज्ञानिक प्रोत्साहन योजना” के नाम से जारी की जाती है। इस योजना के तहत कक्षा 11वीं से लेकर ग्रेजुएशन डिग्री जैसे बीएससी, बीएस, बी.स्टैट, बी.मैथ और इंटीग्रेटेड एमएससी या एमएस में मैथेमेटिक्स, फिज़िक्स, कैमिस्ट्री और बायोलॉजी का चुनाव शोध के उद्देश्य से करते हैं तो वे विद्यार्थी पीएचडी स्तर तक के लिए फैलोशिप प्राप्त कर सकते हैं।  

मानदंड

• स्ट्रीम एसए, जिसके तहत 11वीं कक्षा के विद्यार्थी जिन्होंने 10वीं की परीक्षा में साइंस व मैथ में कम से कम 75 फीसदी अंक प्राप्त किए हों।

• स्ट्रीम एसएक्स, जिसमें 12वीं कक्षा के विद्यार्थी जो 10वीं कक्षा में 75 फीसदी अंक प्राप्त कर चुके हैं और और बेसिक साइंस के साथ स्नातक डिग्री करने के इच्छुक हों।

• स्ट्रीम एसबी, इसके तहत बेसिक साइंस विषयों के साथ उल्लेखित ग्रेजुएशन डिग्री प्रोग्राम या इंटीग्रेटिड एमएससी, एमएस कर रहे हैं उन्होंने 12वीं बोर्ड परीक्षा में कम से कम 60 प्रतिशत अंक प्राप्त किए हों। 

लाभ/ईनाम

तीनों स्ट्रीम के तहत फर्स्ट और थर्ड ईयर तक 5000 रुपये मासिक व 20000 रुपये वार्षिक आकस्मिक अनुदान के रूप में मिलेंगे और इंटीग्रेटिड एमएसी, एमएस, एम.मैथ, एम.स्टैट के चौथे व पांचवें वर्ष तक 7000 रुपये मासिक व 28000 रुपये वार्षिक आकस्मिक अनुदान के रूप में प्राप्त होंगे।

केवीपीवाय के बारे मेंः- वर्ष 1999 में भारत सरकार के डिपार्टमेंट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी द्वारा शुरू की गई इस योजना का उद्देश्य देश की भावी पीढ़ी को प्रोत्सहित करना है ताकि वे विज्ञान में शोध कार्य को अपने कॅरियर के रूप में अपनाएं व देश के हित में कार्य करें। इस योजना में आर्थिक लाभों के अतिरिक्त विद्यार्थियों को देश में स्थित प्रतिष्ठित शोध संस्थानों में आयोजित होने वाले समर कैंप में प्रतिभागी बनने का अवसर भी मिलता है।

अन्य जानकारी

जनरल, ओबीसी कैटेगरी से संबंधित विद्यार्थियों को 1000 रुपये व एससी, एसटी या विशेष रूप से दिव्यांग विद्यार्थियों को 500 रुपये एप्लीकेशन फीस अदा करनी होगी। 

अंतिम तिथि

30 अगस्त 2018 तक आवेदन किया जा सकता है। 

आवेदन कैसे करें

इस स्कॉलरशिप के लिए इच्छुक विद्यार्थियों को ऑनलाइन आवेदन करना होगा। अधिक जानकारी के लिए (आवेदन हेतु लिंक) या हमारी ऑफिशियल वेबसाइट पर जाकर प्रक्रिया फॉलो करें।  

http://www.buddy4study.com/scholarship/kishore-vaigyanik-protsahan-yojana-kvpy-2018

ऑनलाइन आवेदन हेतु महत्वपूर्ण लिंक

http://www.b4s.in/Prabhasakshi/KVP8     

साभार: -www.buddy4study.com







आसान और लाभकारी बिजनेस है मत्स्य पालन, कॅरियर के हैं भरपूर अवसर

  •  मिथिलेश कुमार सिंह
  •  नवंबर 27, 2020   13:03
  • Like
आसान और लाभकारी बिजनेस है मत्स्य पालन, कॅरियर के हैं भरपूर अवसर
Image Source: Google

2 से 3 मिनट के बाद मछली के बच्चों को तालाब में डाल देना चाहिए। ध्यान रखने वाली बात यह है कि मछलियों की मात्रा तालाब में ना तो बहुत ज्यादा होना चाहिए और बहुत कम भी नहीं होनी चाहिए। आप तालाब में सही अनुपात में मछलियों का बीज डालें।

भारत भर में मत्स्य पालन एक जाना पहचाना व्यवसाय रहा है। कृषि से इसको जोड़कर ज़रूर देखा जाता रहा है, किंतु हकीकत में यह काफी उन्नत और लाभकारी व्यवसाय है।

वर्तमान में कोरोनावायरस के कारण बड़ी संख्या में गांवों की ओर लोगों का पलायन हुआ है। कई लोगों को रोजगार की समस्या भी उत्पन्न हुई है, क्योंकि जमे जमाए व्यवसाय या फिर शहर में करने वाली नौकरी छूटने के बाद लोग गांव की ओर लौटे हैं। गांव में चूँकि अधिकतर लोगों के पास कम-अधिक जमीन होती ही है और ऐसी स्थिति में मत्स्य पालन उन सबके लिए एक लाभकारी व्यवसाय हो सकता है।

इसे भी पढ़ें: बहुत क्रिएटिव कॅरियर है कार एसेसरीज डिजाइनिंग, जानिए इसके बारे में

आइए जानते हैं इसकी बेसिक बातें...

तालाब को ठीक से करें तैयार 

अक्सर लोग किसी तालाब की खुदाई के बाद तुरंत ही मछली के बीज डाल देते हैं, लेकिन यह ठीक मेथड नहीं है। सबसे पहले तालाब की सफाई करने के बाद उसमें 200 किलो प्रति हेक्टेयर के हिसाब से चूने का छिड़काव जरूरी है। इसके अलावा महुए की खली और ब्लीचिंग पाउडर डालने से भी मछली पालन के लिए तालाब बेहतर कंडीशन में तैयार हो जाता है। यह सारा कार्य आप ठंड के मौसम में ही कर लें, ताकि ठंड का मौसम बीतते-बीतते मछली का बच्चा डालने योग्य आप का तालाब तैयार हो जाए। 

साथ ही तालाब में ढैंचा नामक घास भी बोया जाता है, ताकि बाद में वह खाद बन जाए और मछली पालन के लिए उपयुक्त रहे। यह तकरीबन 40 किलो प्रति हेक्टेयर के हिसाब से तालाब में बोया जाता है। साथ ही गोबर की खाद डालने से भी वनस्पति जल्दी उग जाती है। अगर समय पर तालाब में अच्छी घास नहीं होती है तो गोबर के साथ सुपर फास्फेट और यूरिया का घोल तालाब में डालना लाभकारी हो सकता है।

हालांकि मछली का बीज डालने से काफी पहले ही यह कार्य करना चाहिए। मछली का बीज डालने के बाद खाद डालना खतरनाक हो सकता है।

उपरोक्त कार्य करने के कम से कम 1 महीने बाद ही तालाब में पानी भरकर, ठंड का मौसम बीतने के बाद मछली का बीज डालें। साथ ही तालाब के पानी की गुणवत्ता और उस में ऑक्सीजन की ठीक मात्रा हो, इसके प्रति अतिरिक्त सजगता आवश्यक है।

मछलियों की ब्रीड पर खास ध्यान दें

अगर आपका तालाब ठीक ढंग से तैयार हो गया है, किंतु मछलियों के बीज आप सही ढंग से नहीं डालते हैं, तो आपके लिए यह लाभकारी नहीं रहेगा।

मुख्य रूप से देशी और विदेशी ब्रीड की मछलियां लोग डालते हैं। इसमें देसी में रोहू, कतला, मृगल इत्यादि प्रचलित प्रजातियां हैं, तो विदेशियों में सिल्वर कॉर्प, ग्रास कार्प इत्यादि प्रमुख हैं। कई लोग जब बाहर से मछली लेकर आते हैं तो उसे एक दो परसेंट नमक के घोल में कुछ देरी के लिए रखते हैं, ताकि अगर मछली के बीज में कोई बीमारी है तो उसका असर कम हो जाए।

हालांकि यह बहुत देर तक नहीं होना चाहिए और 2 से 3 मिनट के बाद मछली के बच्चों को तालाब में डाल देना चाहिए। ध्यान रखने वाली बात यह है कि मछलियों की मात्रा तालाब में ना तो बहुत ज्यादा होना चाहिए और बहुत कम भी नहीं होनी चाहिए। आप तालाब में सही अनुपात में मछलियों का बीज डालें।

अगर एक या दो मछली आपके तालाब में मर जाती हैं, तो उसे तत्काल निकाल कर बाहर करें समय-समय पर बीज की वृद्धि और उसकी जांच करना आपको नुकसान से बचा सकता है।

इसे भी पढ़ें: वेब डिजाइनिंग के क्षेत्र में आजमाएं भविष्य और बनें आत्मनिर्भर

मछलियों के लिए यूं तो किसी विशिष्ट चारे की जरूरत नहीं होती है, खासकर तब जब आप का तालाब पुराना हो गया हो, किंतु चावल का आटा और मूंगफली की खली इत्यादि मछलियों को तेजी से बढ़ाती हैं। इसके अलावा प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट और वसा युक्त चारे की मात्रा मछलियों के लिए पर्याप्त रूप से उपलब्ध हो, इसके प्रति भी सजग रहें। ध्यान दें मछली का बीज सही क्वालिटी का हो, तो सही मात्रा में भी अवश्य हो, अन्यथा बाद में मछलियां ठीक ढंग से बढ़ेंगी नहीं।

मार्केट को समझना जरूरी है 

अब जब आपके पास मछली के बीज तैयार हो जाते हैं तो आसपास की मार्केट का एक अध्ययन जरूर करें और देखें कि आपके आसपास किस तरह की मछलियों की खपत ज्यादा होती है। लोग आखिर क्या खरीदते हैं?

ऐसे में जब आप मछली मार्केट जाएंगे, तो एक ग्राहक बनकर मछलियों की ब्रीड से लेकर उसकी कीमत तक का पता कर सकते हैं। उसी अनुरूप आप अपनी बिजनेस स्ट्रेटेजी बनाएं। अगर बड़ी मछलियों की खपत अधिक है, तब आपके तलाब में कम मछलियों का बीज रहना चाहिए, जबकि अगर छोटी मछलियों की खपत है तो तालाब में बीज अगर अधिक भी डालेंगे तो आपको फायदा ही होगा।

कुल मिलाकर सही टाइम पर मछलियों को बेचना और सही व्यापारियों से संपर्क में रहना आपको लाभ दिला सकता है। कई बार मछली के व्यापारी आपके तालाब पर आकर खुद ही सारी मछलियां ले जाते हैं।

हालांकि रेट में अगर ज्यादा डिफरेंस है तो आप मछलियों को खुद भी मार्केट तक पहुंचा सकते हैं।

इसे भी पढ़ें: जानिए किस तरह बनाएं अभिलेखीय विज्ञान में कॅरियर

इसके अलावा कुछ और बातों का ध्यान रखना जरूरी है। जैसे मछलियों की ग्रेडिंग करना आवश्यक है। मतलब अगर आपके तालाब में कुछ मछलियां बड़ी हो गई हैं और कुछ मछलियां छोटी हैं, तो बड़ी मछलियों को या तो निकाल कर दूसरे तालाब में डालें या उन्हें मार्केट में भेज दें, क्योंकि बड़ी मछलियों का आहार अधिक होगा और वह छोटी मछलियों का चारा भी खा जाएंगी। इसलिए मछलियों की ग्रेडिंग करना आवश्यक है ताकि मछलियों की ग्रोथ में एक निरंतरता रहे। साथ ही मछलियों में इंटरनल और एक्सटर्नल बीमारी के प्रति सजग रहें, अन्यथा आपको पता भी नहीं चलेगा कि कब आपकी पूँजी भारी नुक्सान में बदल गयी।

इसके अलावा नई नई जानकारियां आप भिन्न माध्यमों से लेते रहें और अलग-अलग मछली पालकों के संपर्क में रहें। ऐसे में नई चीजें आपको पता चलेंगी।

- मिथिलेश कुमार सिंह







बहुत क्रिएटिव कॅरियर है कार एसेसरीज डिजाइनिंग, जानिए इसके बारे में

  •  वरूण क्वात्रा
  •  नवंबर 24, 2020   19:27
  • Like
बहुत क्रिएटिव कॅरियर है कार एसेसरीज डिजाइनिंग, जानिए इसके बारे में
Image Source: Google

एक कार एसेसरीज डिजाइनर बनने के लिए डिजाइन के प्रासंगिक विशेषज्ञता में कम से कम स्नातक की डिग्री होना अनिवार्य है। आप बैचलर ऑफ डिजाइन, बीएससी इन डिजाइन, बैचलर ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी, बी डीएस इन ऑटोमोटिव डिजाइन करके इस क्षेत्र में कदम रख सकते हैं।

कार एसेसरीज डिजाइनिंग एक ऐसा कॅरियर क्षेत्र है, जिसके बारे में बेहद कम लोगों को ही जानकारी होती है। लेकिन यह एक ऐसा क्रिएटिव कॅरियर क्षेत्र है, जिसमें ग्रोथ की संभावना बहुत अधिक है। यह एक ऑटोमोबाइल डिजाइनर के काम का एक हिस्सा है, लेकिन यह केवल कारों और इसके सामान के लिए पूरा करता है। कार एक्सेसरी डिज़ाइनर ऐसे व्यक्ति हैं जो कार एक्सेसरीज़ और पाट्र्स के लिए नए डिज़ाइन बनाते हैं। वे न केवल देखभाल की संरचना में सुधार करते हैं, बल्कि इसकी कार्यक्षमता भी बढ़ाते हैं। ऐसा करते समय, एक कार एक्सेसरी डिज़ाइनर को वाहन की सुरक्षा को ध्यान में रखना चाहिए और दिए गए मापदंडों के तहत काम करना चाहिए। तो चलिए आज हम आपको इस कॅरियर क्षेत्र के बारे में विस्तारपूर्वक बता रहे हैं−

इसे भी पढ़ें: वेब डिजाइनिंग के क्षेत्र में आजमाएं भविष्य और बनें आत्मनिर्भर

क्या होता है काम

एक कार एसेसरीज डिज़ाइनर तीन क्षेत्रों में से एक में काम करते हैं− इंटीरियर डिज़ाइनिंग, एक्सटीरियर डिज़ाइनिंग या कलर और टि्रम डिज़ाइन। वे ड्राइंग, मॉडल और प्रोटोटाइप का उपयोग करके कार एक्सेसरी पाट्र्स, असेंबली और सिस्टम के ड्राफ्टिंग डिजाइन बनाते हैं। उनका मुख्य काम होता है कि वे कार को विजुअली अधिक अपीलींग बनाएं।

स्किल्स

कॅरियर एक्सपर्ट बताते हैं कि एक कार एसेसरीज डिजाइनर को हाइड्रोलिक, इलेक्ट्रिक और मैकेनिकल सिस्टम के बारे में विस्तृत जानकारी होनी चाहिए जो वाहन में उपयोग होने जा रहे हैं। इसके अलावा उन्हें ग्राहक की पूरी आवश्यकता को समझना चाहिए और डिजाइन और इसके उत्पादन के उपयोग के बारे में बड़े पैमाने पर शोध करना चाहिए। उनके भीतर कुछ अलग व हटकर सोचने की क्षमता होनी चाहिए। साथ ही कंप्यूटर व कार का तकनीकी ज्ञान उनके काम को अधिक आसान बनाता है।

योग्यता

एक कार एसेसरीज डिजाइनर बनने के लिए डिजाइन के प्रासंगिक विशेषज्ञता में कम से कम स्नातक की डिग्री होना अनिवार्य है। आप बैचलर ऑफ डिजाइन, बीएससी इन डिजाइन, बैचलर ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी, बी डीएस इन ऑटोमोटिव डिजाइन करके इस क्षेत्र में कदम रख सकते हैं। जिस विश्वविद्यालय या कॉलेज से उम्मीदवार अपनी डिग्री हासिल करता है, उसे विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) द्वारा मान्यता प्राप्त होना चाहिए। 

इसे भी पढ़ें: ऑपरेशन्स मैनेजमेंट में कॅरियर बनाने के लिए क्या करें?

आमदनी

कॅरियर एक्सपर्ट बताते हैं कि इस क्षेत्र में आमदनी आपके अनुभव व क्रिएटिविटी के आधार पर बढ़ती जाती है। हालांकि एक कार एसेसरीज डिजाइनर की एवरेज सालाना सैलरी सात से आठ लाख के बीच होती है।

प्रमुख संस्थान

नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी, नवी मुंबई

नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डिजाइन, अहमदाबाद

एरिना एनिमेशन, बैंगलोर

नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डिजाइन, बैंगलोर

फुटवियर डिजाइन एंड डेवलपमेंट इंस्टीट्यूट, नोएडा

नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी, नई दिल्ली

नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी, चेन्नई

वीआईडीएम इंस्टीट्यूट ऑफ डिजाइन एंड मैनेजमेंट, नई दिल्ली

वाईएमसीए इंस्टीट्यूट फॉर ऑफिस मैनेजमेंट, नई दिल्ली

- वरूण क्वात्रा







वेब डिजाइनिंग के क्षेत्र में आजमाएं भविष्य और बनें आत्मनिर्भर

  •  मिथिलेश कुमार सिंह
  •  नवंबर 20, 2020   14:48
  • Like
वेब डिजाइनिंग के क्षेत्र में आजमाएं भविष्य और बनें आत्मनिर्भर
Image Source: Google

किसी वेबसाइट का ले आउट कैसा रहना चाहिए, इसका यूजर इंटरफेस किस डिजाइन से बेहतर होगा, इसे डिसाइड करने के लिए आप इसकी स्केचिंग करते हो। साथ में किसी सॉफ्टवेयर में इसका प्रोटोटाइप भी बनाते हो। कई लोग इसे तकनीकी लैंग्वेज में पीएसडी बनाना भी बोलते हैं।

सूचना क्रांति का जिस क्षेत्र ने सर्वाधिक लाभ उठाया है, उनमें से एक है वेब डिजाइनिंग की फील्ड! डब्ल्यू डब्ल्यू डब्ल्यू, यानी वर्ल्ड वाइड वेब नामक क्रांति ने दुनिया को बदल कर रख दिया है। एक वेबसाइट दुनिया में क्या बदलाव ला सकती है इसे बखूबी दिखलाया है गूगल ने, इसे बखूबी दिखलाया है अमेजन ने, इसे बखूबी दिखलाया है फेसबुक जैसी वेबसाइट ने और ऐसे अनगिनत नाम हैं इस दुनिया में।

आप चाहे विकिपीडिया का नाम लें, चाहे फ्लिपकार्ट कहें, चाहे न्यूज की दूसरी वेबसाइट का उद्धरण दें, इसने नए युग में नई क्रांति को जन्म दिया है। छोटा बिजनेस हो, बड़ा बिजनेस हो, किसी आम या ख़ास इंडस्ट्री से संबंधित कंटेंट की वेबसाइट हो, सामान की डिलीवरी हो या फिर कोई और काम, लोगों की जिंदगी में एक वेबसाइट ने आमूलचूल परिवर्तन लाया है।

इसे भी पढ़ें: ऑपरेशन्स मैनेजमेंट में कॅरियर बनाने के लिए क्या करें?

वस्तुतः यह कहने में हमें संकोच नहीं होना चाहिए कि शिक्षा तक की ट्रेडिशनल पद्धति को वेबसाइटों ने ना केवल बदला है, बल्कि इसकी बुनियाद को बदलने में भी अहम भूमिका निभाई है।

अब जरा सोचिए! अगर इसका प्रभाव इतना व्यापक है तो इस फील्ड में कार्य करने वाले लोग भला महत्वपूर्ण क्यों नहीं होंगे? सच बात तो यह है कि वेब डिज़ाइनर पिछले कई दशकों से महत्वपूर्ण बने हुए हैं और आज भी इनका महत्व कम नहीं हुआ है। वेब डिजाइनिंग में आप सामान्य एचटीएमएल वेबसाइट से लेकर, स्टैटिक ऑपरेशन एवं डायनेमिक बिहेवियर वाली वेबसाइट बनाते हैं और उसकी सहायता से अपने कस्टमर को लाभ भी पहुंचाते हैं।

वेब डिजाइनिंग के कई भाग हैं। आइए जानते हैं...

डिजाइनिंग पार्ट 

किसी वेबसाइट का ले आउट कैसा रहना चाहिए, इसका यूजर इंटरफेस किस डिजाइन से बेहतर होगा, इसे डिसाइड करने के लिए आप इसकी स्केचिंग करते हो। साथ में किसी सॉफ्टवेयर में इसका प्रोटोटाइप भी बनाते हो। कई लोग इसे तकनीकी लैंग्वेज में पीएसडी बनाना भी बोलते हैं। यहां डिजाइन फाइनल होती है और उसके बाद ही अगले स्टेप की तरफ कोई बढ़ता है।

अगर आप इस क्षेत्र में कॅरियर बनाना चाहते हैं तो एडोबी का फोटोशॉप, इलस्ट्रेटर, कोरल ड्रा जैसे सॉफ्टवेयर में आपको सिद्धहस्त होना चाहिए। इसे आप एक लेवल पर ग्राफिक डिजाइनर भी बोल सकते हैं और आप जितनी बेहतरीन डिजाइन बनाएंगे, वेबसाइट उतनी ही शानदार तरीके से तैयार होगी। इस फील्ड में उपरोक्त सॉफ्टवेयर की महारत रखने वाले लोग न केवल वेबसाइट का लेआउट बनाते हैं, बल्कि लोगो से लेकर तमाम इमेज वर्क भी इनके हाथ में होता है।

एचटीएमएल, सीएसएस की जानकारी

इसे फ्रंट एंड कोडिंग भी बोल सकते हैं। मतलब सामने वेबसाइट जो दिखती है, उसकी कोडिंग। ब्राउज़र में जब आप कोई भी यूआरएल डालते हैं, तो जो फ्रंट एंड नजर आता है वह एचटीएमएल पर चलता है। एचटीएमएल मतलब हाइपरटेक्स्ट मार्कअप लैंग्वेज। इसके कई वर्जन आ चुके हैं और हाल-फिलहाल एचटीएमएल- 5 पर कार्य हो रहा है।

इसे भी पढ़ें: जानिए किस तरह बनाएं अभिलेखीय विज्ञान में कॅरियर

इसी प्रकार एचटीएमएल को खूबसूरत बनाने का काम करती है स्टाइलशीट जिसको सीएसएस (कैस्केडिंग स्टाइल शीट) बोलते हैं। यह दोनों कोडिंग लैंग्वेज ही होती हैं और इन्हें आप एक तरह से स्क्रिप्टिंग भी बोल सकते हैं।

वेबसाइट डिजाइन करने में जावास्क्रिप्ट भी यूज होती है, जो खासकर इवेंट के लिए प्रयोग की जाती है। जैसे माउस क्लिक करने पर क्या एक्शन होना चाहिए, माउस रोलओवर करने पर क्या एक्शन होना चाहिए, स्क्रोलिंग पर क्या एक्शन होना चाहिए, यह कार्य जावास्क्रिप्ट करती है।

इसकी जानकारी आपको एचटीएमएल, सीएसएस, जावास्क्रिप्ट में मिलती है। सामान्य तौर पर इसे आसान कोडिंग लैंग्वेज कहा जाता है और आप इसमें भी महारत हासिल कर सकते हैं।

कोडिंग जोन 

यह ऐसा क्षेत्र है जो असली प्रोग्रामिंग की दुनिया में बदलाव लाता है। एक सामान्य वेबसाइट और गूगल में क्या अंतर है यह डिफाइन करता है कि इसमें कोडिंग किस स्तर की हुई है?

एक सामान्य एचटीएमएल वेबसाइट और फेसबुक में क्या अंतर है, एक सामान्य वेबसाइट और अमेजन में क्या अंतर है, यह कोडिंग डिसाइड करती है। कहने का तात्पर्य यह है कि मनुष्य ऊपर से जैसा भी दिखता हो, किंतु उसके मस्तिष्क में कितनी नसें हैं, ब्लड सर्कुलेशन किस प्रकार होता है यह आप प्रोग्रामिंग समझ सकते हैं।

इसे भी पढ़ें: जानिए किस तरह बनाएं अभिलेखीय विज्ञान में कॅरियर

कोडिंग लैंग्वेज किसी भी वेबसाइट को नियंत्रित करती है। वह वेबसाइट चाहते गूगल जैसा कोई सर्च इंजन हो, फेसबुक जैसा कोई सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म हो या फिर फ्लिप्कार्ट जैसी कोई शॉपिंग वेबसाइट हो, कोडिंग ही यह तमाम चीजें तय करती है।

इसमें पीएचपी से लेकर जावा और एएसपी से लेकर पाइथन और सी प्लस प्लस जैसी हेवी लैंग्वेज होती हैं, जिसके ऊपर कोई भी फंक्शन कार्य करता है। इसमें अगर आप महारत हासिल करते हैं, तो वेबसाइट में बड़ी-बड़ी फंक्शनैलिटी ऐड कर सकते हैं, नयी खोज कर सकते हैं।

कॅरियर की बात करें तो, गूगल-फेसबुक जैसी बड़ी कंपनियों में इंजीनियर के पद पर आप मोटी सैलरी भी उठा सकते हैं या फिर अपना कोई स्टार्टअप शुरू कर सकते हैं।

वेब कंसलटेंसी 

अगर आप ऊपर में से तीन चीजों में से कुछ नहीं करते हैं तो भी आपको निराश होने की जरूरत नहीं है। आप तमाम सीएमएस में से किसी एक सीएमएस में महारत हासिल करके लोगों को कंसल्टेंसी दे सकते हैं। बहुत सारी ऐसी कंपनियां हैं जो ड्रैग एंड ड्रॉप पर चलती हैं, किंतु लोगों को उसकी जानकारी नहीं होती है।

जैसे वर्डप्रेस, ब्लॉगर, टंबलर इत्यादि।

तो किस प्रकार से कोई वेबसाइट बनती है, कार्य करती है, आपको इसकी जानकारी देनी होती है, जो सामान्यतः उसके ट्यूटोरियल में दिया भी होता है। इसे आप यूट्यूब से भी स्टेप बाय स्टेप सीख सकते हैं और अच्छा ख़ासा पैसा भी कमा सकते हैं।

ऊपर की चीजें ऐसी हैं जो आप फुल टाइम कर सकते हैं और अच्छी खासी अर्निंग कर सकते हैं। इसके साथ ही आपको डोमेन, होस्टिंग की भी जानकारी रखनी होती है, क्योंकि अगर आप यह कार्य करते हैं तो फिर एक संपूर्ण पैकेज के तौर पर अपने कॅरियर में चार चांद लगा सकते हैं।

- मिथिलेश कुमार सिंह