जीत के बाद आत्मविश्वास से लबरेज मोदी ने SCO सम्मेलन में जमाई भारत की धाक

By नीरज कुमार दुबे | Publish Date: Jun 15 2019 1:56PM
जीत के बाद आत्मविश्वास से लबरेज मोदी ने SCO सम्मेलन में जमाई भारत की धाक
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में आतंकवाद के मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद पर एक व्यापक सम्मेलन बुलाये जाने का जो सुझाव दिया है वह भी पाकिस्तान को पूरी दुनिया में घेरने की दिशा में ही बड़ा कदम है।

शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आतंकवाद का मुद्दा बड़ी प्रमुखता के साथ उठाया और इस मंच के सदस्य देशों को यह बात समझाने में सफल रहे कि आतंकवाद की फैक्ट्री बन चुके देशों पर लगाम लगाने की जरूरत है। खास बात यह रही कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान की उपस्थिति में आतंकवाद के मुद्दे को इतनी प्रखरता के साथ उठाया। यह भारत की एक बड़ी कूटनीतिक सफलता कही जायेगी कि एससीओ ने अपने घोषणापत्र में आतंकवाद के हर स्वरूप की निंदा की और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से आतंकवाद से मुकाबले में सहयोग बढ़ाने की अपील की।



एससीओ की राष्ट्राध्यक्ष परिषद के बिश्केक घोषणा-पत्र में कहा गया है, 'सदस्य देश इस बात पर जोर देते हैं कि आतंकवादी एवं चरमपंथी कृत्यों को सही नहीं ठहराया जा सकता।' घोषणा-पत्र में यह भी कहा गया है कि आतंकवाद, आतंकवादी एवं चरमपंथी विचारधारा का फैलाव, जनसंहार के हथियारों का प्रसार, हथियारों की होड़ जैसी चुनौतियां और सुरक्षा संबंधी खतरे सीमा पार प्रकृति के होते जा रहे हैं। इन पर वैश्विक समुदाय द्वारा विशेष ध्यान देने, बेहतर समन्वय और रचनात्मक सहयोग करने की जरूरत है।' यही नहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में आतंकवाद के मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद पर एक व्यापक सम्मेलन बुलाये जाने का जो सुझाव दिया है वह भी पाकिस्तान को पूरी दुनिया में घेरने की दिशा में ही बड़ा कदम है।



भारत-चीन संबंध
 


 
एससीओ सम्मेलन से इतर भारत और चीन के नेताओं के बीच हुई मुलाकात में जो गर्मजोशी और रिश्तों को आगे ले जाने की सहमति दिखी वह दोनों देशों के परिपक्व होते संबंधों को दर्शाती है। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ मुलाकात के बाद चीनी विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा कि राष्ट्रपति शी ने कहा है कि भारत और चीन को मतभेदों से सही तरीके से निपटते हुए सहयोग बढ़ाना चाहिए। साथ ही उन्होंने कहा कि सीमा पर स्थिरता बनाए रखने के लिए विश्वास बहाली के कदम उठाये जाने चाहिए। शी जिनपिंग ने इस मुलाकात के दौरान जो सबसे बड़ी बात कही वह यह रही कि ‘‘चीन और भारत एक-दूसरे को विकास का अवसर देते हैं, और एक-दूसरे के लिए कोई खतरा नहीं हैं।’’ 
 
भारत-रूस संबंध
 
 
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रूस के राष्ट्रपति व्लादीमिर पुतिन से भी मुलाकात की और दोनों नेताओं ने रणनीतिक संबंधों को और मजबूत करने के लिए द्विपक्षीय रिश्तों के सभी पहलुओं की समीक्षा की। दोनों नेताओं की बातचीत में रक्षा और ऊर्जा के विषयों पर विशेष ध्यान दिया गया। दोनों नेताओं ने व्यापार और निवेश संबंधों की भी समीक्षा की तथा आगे की यात्रा पर बढ़ने की बात कही। गौरतलब है कि इस महीने के आखिर में जापान के ओसाका में जी-20 सम्मेलन से इतर रूस, भारत और चीन की त्रिपक्षीय बैठक भी होगी। रूस ने हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपने सर्वोच्च राजकीय सम्मान ‘ऑर्डर ऑफ सेंट एंड्रयू द एपोस्तले’ से सम्मानित किया था।
 
भारत-पाकिस्तान संबंध
 
पाकिस्तान की इससे बड़ी अंतरराष्ट्रीय बेइज्जती क्या होगी कि एससीओ सम्मेलन के दौरान भी भारत पाकिस्तान को लगभग अलग-थलग रखने में सफल रहा। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने अपने संबोधन में पिछली रटी रटाई बातें ही कहीं लेकिन उनका यह कहना कि पाकिस्तान उन कुछ देशों में शामिल है जिसने सफलतापूर्वक आतंकवाद को परास्त किया है, बिलकुल हास्यास्पद लगता है। इसके अलावा पाकिस्तान ने अपने मित्र चीन के माध्यम से भारत के समक्ष जो वार्ता का प्रस्ताव रखवाया उसे भारत ने तुरंत ही ठुकरा कर साफ संदेश दिया कि पाकिस्तान के आतंकवाद की राह नहीं छोड़ने तक उसके साथ किसी तरह की बातचीत संभव ही नहीं है। यही नहीं प्रधानमंत्री मोदी ने बिश्केक में द्विपक्षीय बैठक के पाकिस्तानी प्रधानमंत्री के सुझाव पर भी पानी फेर दिया। 
 
 
एससीओ शिखर सम्मेलन में पाकिस्तान के साथ किसी प्रकार की द्विपक्षीय बातचीत नहीं होगी यह तभी साफ हो गया था जब भारत के प्रधानमंत्री को किर्गिस्तान जाने के लिए पाकिस्तान द्वारा अपना हवाई क्षेत्र मुहैया करा दिये जाने के बावजूद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और किसी भी अन्य भारतीय अधिकारी ने पाकिस्तान के हवाई क्षेत्र का उपयोग नहीं किया। एससीओ शिखर सम्मेलन के लिए रवाना होने से पहले भी इमरान खान ने कहा था कि मैं चाहूँगा कि भारत के साथ बातचीत बहाल हो। वह इस संबंध में दो बार पत्र लिखकर भी गुहार लगा चुके हैं। लेकिन शिखर सम्मेलन का उद्घाटन सत्र रहा हो अन्य सत्र, भारत पाकिस्तान के प्रधानमंत्रियों के बीच किसी प्रकार का संवाद नहीं हुआ लेकिन सम्मेलन की समाप्ति से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके पाकिस्तानी समकक्ष इमरान खान ने एक-दूसरे का अभिवादन किया। आयोजन स्थल पर नेताओं के लाउंज में मोदी और इमरान खान ने एक दूसरे का अभिवादन किया। लेकिन मात्र अभिवादन वाली यह मुलाकात दोनों देशों के रिश्तों पर कोई भी सकारात्मक असर नहीं डाल पाई। माना जा रहा है कि दोनों नेताओं की आमने-सामने की पहली बातचीत के दौरान इमरान खान ने मोदी को चुनाव में मिली जीत की बधाई दी। इमरान खान ने 26 मई को नरेंद्र मोदी को टेलीफोन कर के भी दोनों देश के लोगों की बेहतरी के लिए साथ मिलकर काम करने की इच्छा प्रकट की थी। लेकिन पाकिस्तान के हुक्मरानों की टेलीफोन या मुलाकात के दौरान जताई गई इच्छाओं और जमीनी हकीकत में जमीन-आसमान जैसा ही अंतर होता है। एक तरफ इमरान खान भारत से बातचीत के लिए चीन से पैरवी करवा रहे थे तो ठीक उसी समय पाकिस्तानी आतंकवादियों ने जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग में सीआरपीएफ जवानों पर हमला कर दिया जिसमें हमारे पांच जवान शहीद हो गये। देखा जाये तो एससीओ सम्मेलन से इतर पाकिस्तान को छोड़ कर बाकी सभी सदस्य राष्ट्रों के साथ भारतीय प्रधानमंत्री की द्विपक्षीय बैठकें भी हुईं जिनमें आगे के संबंधों की राह तय की गईं।
 
एससीओ में भारत की बढ़ती धमक
 
 
भारत में हालिया लोकसभा चुनावों में दोबारा बड़ा जनादेश हासिल कर प्रधानमंत्री बनने वाले नरेंद्र मोदी ने एससीओ सम्मेलन का एक तरह से नेतृत्व किया और बात चाहे आतंकवाद से मुकाबले की हो, अर्थव्यवस्था में सुधार की हो, वैकल्पिक ऊर्जा का प्रयोग बढ़ाने की बात हो या स्वास्थ्य सुविधाओं को बढ़ावा देने में एससीओ देशों के बीच व्यापक सहयोग की बात हो, उन्होंने सभी देशों की चिंता करते हुए क्षेत्र में शांति और आर्थिक समृद्धि के लिए भारत की प्रतिबद्धता को रेखांकित किया। प्रधानमंत्री ने एससीओ सदस्य देशों के बीच व्यापक सहयोग के लिए ‘हेल्थ’ शब्द पर जोर दिया। हेल्थ शब्द में ‘‘एच से हेल्थकेयर को-ऑपरेशन (स्वास्थ्य सुविधा सहयोग), ई से इकनॉमी को-ऑपरेशन (अर्थव्यवस्था सहयोग), ए से अल्टरनेट एनर्जी (वैकल्पिक ऊर्जा), एल से लैंग्वेज एंड लिटरेचर (साहित्य और संस्कृति), टी से टेररिज्म फ्री सोसाइटी (आतंकवाद मुक्त समाज) और एच से हयूमनिटेरियन कोऑपरेशन (मानवीय सहयोग) शामिल है।
 
एससीओ सम्मेलन की तसवीरों पर भी नजर डालेंगे तो भारतीय प्रधानमंत्री के बढ़ते प्रभुत्व की छवि साफ दिखाई देती है। हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जब श्रीलंका का दौरा किया था तो वहां के राष्ट्रपति मैत्रीपाला सिरिसेना मोदी को बारिश से बचाने के लिए खुद छतरी लिये हुए थे। ऐसा ही कुछ नजारा बिश्केक में दिखा जहां किर्गिस्तान के राष्ट्रपति सूरोनबे जीनबेकोव मोदी के लिए छतरी लिये हुए थे। भारत ने जहां किर्गिस्तान ने लिए कई तरह की मदद का ऐलान किया वहीं दोनों देशों के बीच विभिन्न क्षेत्रों में समझौते भी हुए।
 
 
दूसरी तरफ पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान की इस सम्मेलन के दौरान देश का मजाक उड़वाने वाले नेता की छवि बन गयी है। एससीओ शिखर सम्मेलन के उद्घाटन समारोह के दौरान पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान ने अजीबो-गरीब स्थिति पैदा कर दी जब अन्य नेताओं के खड़े रहने के दौरान वह अपनी सीट पर बैठ गए। इमरान की ओर से इस तरह कूटनीतिक प्रोटोकॉल तोड़े जाने पर सोशल मीडिया पर उनकी खूब खिंचाई हुई और उनको कूटनीतिक यात्राओं की मर्यादा का अध्ययन करने की सलाह दी गयी। वैसे इमरान खान की ओर से किसी अंतरराष्ट्रीय मंच पर पहली बार गलती हुई हो ऐसा नहीं है। बात इसी महीने की है। 14वीं ओआईसी समिट के दौरान जब इमरान खान सऊदी किंग सलमान बिन अब्दुलाजीज के साथ बातचीत कर रहे थे तो किंग का अनुवादक इमरान खान की बातों का अनुवाद कर रहा था। उस समय अनुवादक की बात खत्म हुए बिना ही इमरान खान वहां से निकल गये थे जिसको लेकर उनकी काफी जग हँसाई हुई थी।
 

 
बहरहाल, एससीओ क्षेत्र और भारत का इतिहास, सभ्यता और संस्कृति हजारों वर्षों से आपस में जुड़ा रही हैं। यकीनन आधुनिक समय में बेहतर संपर्क के लिए हमारा साझा क्षेत्र समय की जरूरत है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा भी है कि अंतरराष्ट्रीय उत्तरी दक्षिण परिवहन कॉरिडोर, चाबहार बंदरगाह, असगाबट समझौते संपर्क पर भारत के फोकस को स्पष्ट करता है। एससीओ का सदस्य बने हुए भारत को दो साल हो चुके हैं और भारत ने एससीओ की गतिविधियों में लगातार सकारात्मक योगदान दिया है। उल्लेखनीय है कि एससीओ चीन की अगुवाई वाला आठ देशों का आर्थिक एवं सुरक्षा समूह है। भारत और पाकिस्तान को इसमें 2017 में शामिल किया गया था। चीन, कजाखस्तान, किर्गिस्तान, रूस, ताजिकिस्तान और उज्बेकिस्तान एससीओ के अन्य सदस्य देश हैं।
 
-नीरज कुमार दुबे
 

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