जिस नेता में जनता अपनी छवि देखने लगे, सच में जननेता वही होता है

By प्रभात झा | Publish Date: May 30 2019 11:51AM
जिस नेता में जनता अपनी छवि देखने लगे, सच में जननेता वही होता है
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हर मनुष्य अपनी जिंदगी में आशा की किरण देखना चाहता है। आज भारत के करोड़ों लोगों को लग रहा है कि भारत अच्छे दिनों की ओर बढ़ने लगा है। सामान्य नागरिक आज लोकतंत्र के इस जश्न को अपने अपने स्थानों पर मनाएंगे।

आज भारत का प्रत्येक गरीब, वह जो रोज कमाता है और परिवार चलाता है, को सबसे ज्यादा ख़ुशी हो रही होगी। उसे लग रहा होगा कि आज प्रधानमंत्री शपथ नहीं ले रहे हैं, बल्कि भारत की धरती से गरीबी के कलंक को हटाने और मिटाने में लगा व्यक्तित्व शपथ ले रहा है। खुश वे भी होंगे, जो भारत के भविष्य की तक़दीर है। उन नौनिहालों के चेहरे खिल रहे होंगे, जिन्होंने अपने पहले वोट की सार्थकता देखी। वे लोग सबसे अधिक आनंदित हो रहे होंगे, जो अपने 'देश' यानी 'भारत' को अपने से बड़ा मानते होंगे।

 
आज भारत खुश है। भारत मुस्कुरा रहा है। भारत धरती से लेकर आसमान से फूलों की भावनाओं से भरा पुष्प वर्षा कर रहा है। जिस नेता में जनता अपनी छवि देखे, सच में जननेता वह होता है। भारत आज अपनी छवि को नरेंद्र मोदी के चरित्र में देखता है तो उसे लगता है कि हमारे बीच का ही व्यक्ति शपथ ले रहा है। 


 
यह भी सच है कि आज वह गरीब शपथ समारोह में सशरीर नहीं पहुंच पाएगा, पर वह अपने घर की टीवी पर, या अपने मोबाइल की स्क्रीन पर अपनी छवि 'नरेंद्र मोदी' की शपथ अवश्य देखेगा। आज भारत अपने संवैधानिक रक्षक की शपथ पर रात को दीपावली मनाएगा। अनेक जगह दीपावली-सा माहौल होगा ही। देश के किसान आज नरेंद्र मोदी को अपना 'शस्य श्यामला' खेती की गारंटी मानकर झूम रहे होंगे। गांव के चौपाल भी मुस्कुरा रहे होंगे। किसानों को लग रहा है कि उनकी जिंदगी में मुस्कुराहट देने वाला शपथ ले रहा है।


हर मनुष्य अपनी जिंदगी में आशा की किरण देखना चाहता है। आज भारत के करोड़ों लोगों को लग रहा है कि भारत अच्छे दिनों की ओर बढ़ने लगा है। सामान्य नागरिक आज लोकतंत्र के इस जश्न को अपने अपने स्थानों पर मनाएंगे। आज वे लोग बहुत खुश हैं, जो भारत को भ्रष्टाचार से मुक्त करना चाहते हैं। सामान्य नागरिक चाहते हैं कि सरकारी कार्य में उसे आसानी हो। बेरोजगार चाहते हैं कि वे रोजगार देने वाले बनें। असंगठित कामगार मजदूरों के भविष्य की गारंटी ने उनके चेहरे की रौनक बढ़ा दी है। इनकी संख्या 48 करोड़ से ऊपर है।
 
सामान्य जन चाहता है कि वह जब तक ज़िंदा रहे, उसे सामान्य जीवन में कोई तकलीफ नहीं हो। मोदी सरकार ने इस दिशा में सबसे बड़ा कदम 'आयुष्मान' योजना' लागू कर गरीबों को यह विशवास दिलाया है कि तुम्हारी मौत अब दवाई या इलाज के अभाव में नहीं हो सकती। मौत से बचाने की गरीबों की इस योजना से उपजी ''दुआओं'' ने इस चुनाव में भी अपना असर दिखाया। भौतिकतावादी इस युग में जब एक सहोदर अपने सहोदर के लिए खड़ा नहीं होता, तब देश के प्रधानमंत्री की योजना खड़ी हो जाए, तो लोग मोदी जी के लिए दुआएं क्यों नहीं करेंगे। दुआ और दवाओं का यह संगम लेकर गरीब झूम रहे होंगे।
करोड़ों शौचालय के कारण इज्जत से जुडी महिलाओं की आशीष भी शपथ समारोह को देखकर स्वत: कहेगी कि यही है वह व्यक्ति जिसने महिलाओं की इज्जत को बढ़ाया है। मुद्रा योजना के तहत करोड़ों महिलायें और पुरुष अपने पैरों पर खड़े हो गए और आज पुनः अपने पैरों पर खड़े होकर मोदी को शपथ लेते देख कर यह कह रहे हैं, कि मोदी ''तुम जियों हजारों साल''। जिनके घर रौशनी पहुंची उन्होंने भी कहा कि मोदी जी आप हमारे घर रौशनी लाये, हम आपके घर रोशनी लाएंगे। शपथ समारोह को देखते समय ये सभी इसी भाव से जुड़े होंगे कि ये है हमारे देश के प्रधानमंत्री। देश भर में ही नहीं विश्व भर में योगा करने वाले एक स्वर में कह रहे हैं, ''युगपुरुष आचार्य नरेंद्र मोदी बधाई के पात्र हैं''।
 
आज सब के प्रधानमंत्री शपथ लेंगे। भाषा की अभद्रता इतनी हो गई है कि सदन में विपक्षी यह कहते सुने जाते हैं कि आपके प्रधानमंत्री ने ऐसा कहा है। प्रधानमंत्री उम्मीदवार चुने जाने तक पार्टी के होते हैं, पर जब वह चुन लिए जाते हैं तो वे उन सभी के प्रधानमंत्री होते हैं जो अपने को भारतीय कहते हैं। आज वे लोग खुश हो रहे हैं, जो ईमानदारी से ''ईमान'' की पूजा करते हैं, पिछले कुछ वर्षों में ईमानदारी को पीछे धकेल दिया गया था। आज वे इसलिए खुश है कि भ्रष्टाचार की सिंचाई व्यवस्था निरंतर बंद हो रही है।
संविधान को गीता की ऋचाएं मानकर काम करने वाली मोदी सरकार से वे लोग ज्यादा खुश हैं जिन्हें देश से मतलब है न की देश की राजनीति से। वे संविधान की पवित्रता कायम रखने में विश्वास करते हैं न कि असंवैधानिक कार्यों में। प्रधानमंत्री पद पर ही नहीं बल्कि संसदीय और विधायिका के निर्वाचित प्रतिनिधियों को संविधान के आंचल में अपना और देश प्रदेश का विकास करने का अवसर मिलता है। देश की संघीय प्राणाली की मर्यादा रखने वालों में भी आज बहुत ख़ुशी है। सबसे ज्यादा खुश है देश की आधी आबादी। उन्हें विश्वास हुआ है कि देश के विकास में उनकी भूमिका घर के साथ-साथ देश में भी है। यही कारण है कि आजादी के बाद भारतीय संसद में पहली बार 78 महिलायें सांसद के रूप में चुनकर आयी हैं। ''मातृ देवो भव:'' का जागरण ही नरेंद्र मोदी की झोली को अपनी आशीषों से भर देता है। 
 
आज वे बहुत खुश हो रहे हैं, जो साहस, परिश्रम, और पराक्रम को नमन करते हैं। नरेंद्र मोदी नाम है परिश्रम और पराक्रम का। आज वे बहुत खुश हो रहे हैं जो ''सत्यमेव जयते'' और ''अहिंसा परमो धर्मं'' में विश्वास रखते हैं। राजनीति में स्वच्छता अभियान का उतना ही महत्व है, जितना देश में स्वच्छता अभियान का। अतः जो राजनीति में, प्रशासन में, देश कार्य में स्वच्छता चाहते हैं, आज उनके मन में जरूर लड्डू फूट रहे होंगे कि अब न्याय के रास्ते पर भारत का संविधान चलेगा। विश्वास की गंगोत्री से छल-छल करती हुई गांव-गांव में जन विश्वास, मिले हुए जनादेश के माध्यम से पहुंचेगा। आज वे भी बहुत प्रसन्न होंगे, जिन्हें ''सबका साथ, सबका विकास'' के साथ सबका विश्वास, में विश्वास होगा। मेरे सब, मैं सबका।
 
आज सर्वाधिक खुश हो रहे होंगे, उस पीढ़ी के लोग जिन्होंने कार्यकर्ता के नाते अपने खून से जनसंघ के दिए जलाये। साथ ही आज की पीढ़ी के कार्यकर्ता और उससे भी अधिक खुश हो रहे होंगे कि उनकी मेहनत रंग लायी। कार्यकर्ताओं की अखंड मेहनत का परिणाम वे अपनी सन्न आंखों से देख रहे होंगे। जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शपथ ले रहे होंगे। वो कार्यकर्ता जो सिर्फ सर नवाकर काम करता है, उसकी आंखों में प्रेम के आंसू सहज आ रहे होंगे और मन में एक ही बात कह रहा होगा कि एक कार्यकर्ता ही शपथ ले रहा है। बस ईश्वर इस कार्यकर्ता के मन में सदैव कार्यकर्ता के भाव बनाये रखे।
 

  
आज पुन: मजबूत होगी 'मैं' नहीं 'हम' की अवधारणा। हममें जन है और जन-जन में मोदी हैं। अब भेदभाव के बजाय समभाव की प्रबलता पूर्व से भी अधिक बढ़ेगी। तिरंगे को विश्व में फ़हराने की दूसरी सीढ़ी पर आज नरेंद्र मोदी चढ़कर शपथ लें। मैं और उनके साथ सभी 130 करोड़ भारतीय कहेंगे ''भारतमाता की जय'' और ''वन्देमातरम''।
 
-प्रभात झा
सांसद (राज्य सभा)
एवं भाजपा राष्ट्रीय उपाध्यक्ष
 

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