रोमांचक रहा आईपीएल-10, दे गया कुछ नयी प्रतिभाएं भी

इस बार कुछ ऐसे खिलाड़ी भी थे जिनका प्राइस रेट तो बहुत कम था लेकिन उन्होंने अपने प्रदर्शन से सबका ध्यान खींचा है और इस बात की प्रबल संभावना है कि अगली बार उनका प्राइस रेट भी बढ़ेगा ही।

आईपीएल-10 का मुंबई और पुणे के बीच खेला गया फाइनल मैच एक यादगार फाइनल तो माना ही जायेगा लेकिन इस सत्र ने अपने साथ कई और यादें जोड़ दी हैं। इस सीजन की सबसे बड़ी विशेषता यह रही है कि इस बार जो खिलाड़ी महंगे बिके तथा हर बार जिनका सिक्का चलता था और स्टार खिलाड़ियों के नाम से ही विरोधी टीमें दबाव में आ जाती थीं अबकी बार वह खिलाड़ी और टीमें दोनों ही अर्श से फर्श पर आ गयीं। जो बल्लेबाज पिछले सीजन में छक्कों की बारिश कर रहे थे वह इस बार चौका लगाने के लिए तरस गये। वहीं दूसरी ओर आईपीएल के बहाने प्रतिभा खोज के अंतर्गत कई टीमों के नये खिलाड़ियों ने अपने प्रदर्शन के बल पर राष्ट्रीय टीम में जगह बनाने का दावा भी पेश किया है। इस बार कुछ ऐसे खिलाड़ी भी थे जिनका प्राइस रेट तो बहुत कम था लेकिन उन्होंने अपने प्रदर्शन से सबका ध्यान खींचा है और इस बात की प्रबल संभावना है कि अगली बार उनका प्राइस रेट भी बढ़ेगा ही।

आईपीएल सीजन में यदि सबसे अधिक इस बार किसी ने निराश किया है तो वह विराट कोहली एंड कंपनी ही है। यदि सबसे अधिक चौंकाने वाला प्रदर्शन रहा था तो वह रहा पुणे का जिसने 15 में से केवल 10 मैच ही जीते लेकिन वह फाइनल में अपनी जगह बनाने में कामयाब हो गया। दिल्ली, पंजाब व गुजरात लायंस ने प्रदर्शन तो अच्छा किया लेकिन विदेशी खिलाड़ियों पर निर्भरता के चलते एक बार फिर यह टीमें प्रभावित नहीं कर सकीं। अलबत्ता इन टीमों के खिलाड़ियों ने दर्शकों का मनोरंजन खूब किया। गौतम गंभीर की कोलकाता नाइट राइडर्स ने अंतिम चार तक सफर तो तय किया लेकिन प्रदर्शन में कोई खास विशेषता नजर नहीं आ रही थी। यह बात अलग है कि कोलकाता नाइट राइडर्स के कप्तान गौतम गंभीर ने इस बार भी 498 रन बनाये लेकिन उनके प्रदर्शन से राष्ट्रीय चयनकर्ता प्रभावित नहीं हो सके। हैदराबाद के बल्लेबाज डेविड वार्नर सबसे अधिक रन बटोरने में सफल रहे। उन्होंने सबसे अधिक 641 रन बनाये। गेंदबाजी में हैदराबाद के भुवनेश कुमार 26 विकेट लेकर सबसे आगे रहे और उन्हें गेंदबाजी में पर्पल कैप से नवाजा गया। इसी प्रकार गेंदबाजी में पुणे के जयदेव उनादकट ने 22 तथा मुंबई के मिचेल ने 19 विकेट लेकर सराहनीय प्रदर्शन किया और सबको प्रभावित करने में सफलता भी प्राप्त की है।

इस बार की विजेता मुंबई इंडियंस के कप्तान रोहित शर्मा का प्रदर्शन तो कुछ खास नहीं रहा अपितु उनकी कप्तानी ने विशेष रूप से प्रभावित किया है। फाइनल में बेहद कम स्कोर का जिस प्रकार से उन्होंने बचाव किया और अपने गेंदबाजों का उत्साह कायम रखा वह काबिले तारीफ था। मुंबई इंडियंस की टीम 2013 और 2015 में भी फाइनल का मुकाबला जीत चुकी है। मुंबई के गेंदबाज जसप्रीत बुमराह ने अपनी गेंदों से सभी को प्रभावित किया है तथा माना जा रहा है कि वह भविष्य में भारतीय टीम के लिए काफी मददगार व विरोधी टीमों के लिए मारक साबित हो सकता है। बुमराह की स्लाग ओवरों की गेंदबाजी ने सभी को प्रभावित किया है।

सीजन की समाप्ति के बाद देश के महान क्रिकेटर, भारत रत्न व मुंबई इंडियंस के साथ खेल चुके सचिन तेंदुलकर ने कुछ युवा खिलाड़ियों की जमकर तारीफ की है। सचिन तेंदुलकर का कहना है कि आईपीएल युवाओं के लिए एक ऐसा मंच है जिसमें 40−50 दिन के दौरान वे काफी कुछ सीख सकते हैं। यह एक ऐसा मंच है जहां दुनियाभर के दिग्गज खिलाड़ी जुटते हैं। इस बार मुंबई के नीतीश राणा ने काफी प्रभावित किया है। उन्होंने कुछ मुश्किल मैचों में टीम को जीत दिलाई और खुद की क्षमता से लोगों को परिचित कराया। मुश्किल मुकाबलों में भी उन्होंने धैर्य नहीं खोया और शानदार खेल का प्रदर्शन किया। वहीं सचिन ने राइजिंग पुणे सुपरजायंट के राहुल त्रिपाठी की भी प्रशंसा की। राहुल त्रिपाठी में सचिन को वीरेंद्र सहवाग नजर आ रहे हैं। वहीं दिल्ली के ऋषभ पंत ने भी विशेषज्ञों को प्रभावित करने में सफलता पायी है। ऋषभ ने इस आईपीएल सीजन में 24 छक्के लगाकर कीर्तिमान बनाया है। सचिन का मानना है कि वह जल्द ही परिपक्व बल्लेबाज बनेंगे और अपने आप को राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करने में कामयाब हो सकेंगे। इस सीजन के लिए स्टाइलिश प्लेयर गौतम गंभीर रहे। वह कई अन्य मामलों के लिए भी याद किये जायेंगे। गौतम गंभीर ने इस बार सुकमा के शहीदों के बच्चों को पढ़ाने का जिम्मा भी अपने ऊपर ले लिया तथा पत्थरबाजों के खिलाफ सोशल मीडिया पर जंग भी छेड़ दी।

इस बार आईपीएल सीजन−10 में भी खूब रिकार्ड बने। इस आयोजन में कुल मिलाकर 10,662 रन सिर्फ चौकों, छक्कों से बने। कुल 60 मैच खेले गये। इस दौरान 8 टीमों ने कुल 18,775 रन बनाए जिसमें से आधे से अधिक रन चौकों और छक्कों से निकले। इस दौरान कुल 708 विकेट भी गिरे। इस दौरान 5 शतक और 95 अर्धशतक भी लगे। सबसे अधिक दो शतक किंग्स इलेवन पंजाब के  सलामी बल्लेबाज हाशिम अमला ने बनाये जबकि दिल्ली के संजू सैमसंग, पुणे के बेन स्टोक्स और सनराइजर्स हैदराबाद के कप्तान डेविड वार्नर ने एक−एक शतक लगाया। वार्नर ने इस सीजन में 126 रनों की पारी के साथ इस सीजन का बड़ा स्कोर बनाया। वार्नर ने इस साल सबसे अधिक 14 मैचों में एक शतक व चार अर्धशतकों की सहायता से 641 रन बनाये और ऑरेंज कप जीतने में सफलता हासिल की है। इस सीजन में एक मैच ऐसा भी रहा जिसका फैसला सुपर ओवर तक गया, वहीं एक मैच का फैसला अंतिम गेंद पर हुआ। इस सीजन में तीन हैट्रिक देखने को मिलीं।

इस बार कई प्रमुख टीमों के कप्तानों ने भी अपनी क्षमता से प्रभावित किया है। मुंबई के रोहित शर्मा ने फाइनल में तो गजब की कप्तानी दिखाकर सबके मुंह से निकलवा ही लिया कि यही होता है रोमांच और तनाव का क्षण, गजब, क्या फाइनल मैच था। इस सीजन में सबसे निराशाजनक टीम का प्रदर्शन दिल्ली डेयरडेविल्स का माना जायेगा। यदि दिल्ली को कुछ पाना है तो उसे अपने आप में बहुत बड़ा परिवर्तन लाना ही होगा। दिल्ली के कप्तान जहीर खान को बेहद निराशा के साथ संन्यास लेना पड़ा है। कभी जहीर खान की भारतीय क्रिकेट टीम में ही नहीं अपितु विदेशी धरती पर तूती बोलती थी। दिल्ली को अपना कोच भी बदलना पड़ेगा। कोच राहुल के लिए भी यह बुरा दौर ही माना जायेगा वह भी तब जब उनकी चर्चा राष्ट्रीय टीम का कोच बनाने के लिए चल रही हो।

क्रिकेट को और भी अधिक मनोरंजक व लोकप्रिय बनाने के लिए आज से दस साल पहले प्रतिभा खेज के नाम पर इस प्रारूप की शुरूआत की गयी थी। आज हर युवा व जन मन के बीच यह प्रारूप इतना लोकप्रिय हो चुका है कि सीजन के 50 दिनों तक हर युवा की जुबां पर केवल अपने पसंदीदा खिलाड़ियों व टीमों का ही नाम रहता है। यह युवा प्रतिभा निखारने का अद्भुत मंच है। इसमें चीयर लीडर्स का तड़का भी रहता है। यह प्रारूप रोमांच व तनाव से भरपूर रहता है। एक दो ओवरों में ही खेल की दिशा व लय बिगड़ने लग जाती है। कब कौन सी टीम जीत जाये व हर जाये कुछ तय नहीं रहता। आईपीएल−10 का फाइनल इसका गवाह है। यह एक ऐतिहासिक फाइनल माना जायेगा जिसमें अंतिम क्षणों में जीत रही टीम मात्र एक रन से हर गयी। आईपीएल सीजन−10 विराट कोहली एंड कंपनी के लिए बेहद निराशाजनक रहा। उनके लिए यह एक बुरे स्वप्न के समान था। क्रिस गल जैसे विस्फोटक बल्लेबाज की हवा निकल गयी तो स्पिनर हरभजन का जादू एक बार फिर नहीं चल सका।  अपनी पराजय के बाद कोहली ने स्वयं कहा कि इस सीजन को बुरे दौर की तरह भूलना ही बेहतर रहेगा। चाहे जो हो आईपीएल होता है मनोरंजक तथा दर्शकों को पूरा पैसा भी वसूल करा देता है।

- मृत्युंजय दीक्षित

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