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समसामयिक

मोदी और शाह अब कैसे कहेंगे- 'कुछ दिन तो गुजारो गुजरात में'

By उपेन्द्र प्रसाद | Publish Date: Oct 10 2018 3:11PM

मोदी और शाह अब कैसे कहेंगे- 'कुछ दिन तो गुजारो गुजरात में'
Image Source: Google
आगामी 5 राज्यों में विधानसभा चुनावों की तारीखें घाषित हो चुकी हैं। इनमें से तीन राज्यों में भाजपा की सरकारें हैं और उन्हें बनाए रखने के लिए पार्टी के सामने गंभीर चुनौतियां खड़ी हैं। राजस्थान का हाथ से निकलना तो तय है और यदि मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ का वर्तमान राजनैतिक माहौल बदलने में नरेन्द्र मोदी कामयाब नहीं हो पाए, तो इन दोनों राज्यों की सत्ता भी भाजपा के हाथों से फिसल जाएगी।
 
2019 का लोकसभा चुनाव इन तीन राज्यों के चुनावी नतीजों से प्रभावित हुए बिना नहीं रह सकता, हालांकि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की लोकप्रियता के कारण लोकसभा चुनाव में पार्टी आगामी विधानसभा चुनावों की अपेक्षा बेहतर प्रदर्शन कर सकती है, क्योंकि नरेन्द्र मोदी से अभी भी लोगों का मोहभंग नहीं हुआ है, हालांकि इसका दौर शुरू हो गया है। जाहिर है, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ही भाजपा की नाव को पार लगा सकते हैं। पार्टी की उन पर निर्भरता आज 2014 की अपेक्षा ज्यादा बढ़ गई है।
 
लेकिन गुजरात में उत्तर भारतीयों और खासकर हिन्दी प्रदेशों के लोगों पर जो हमले हो रहे हैं, वे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के लिए अपशकुन का काम कर रहे हैं। वहां से भारी संख्या में लोग पलायन कर रहे हैं। पलायन करने वालों में उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश के लोगों की संख्या बहुत है और इन्हीं राज्यों में मिली सफलताओं के कारण आज भाजपा पूर्ण बहुमत से सत्ता में है।
 
मोदीजी की समस्या यह है कि वे गुजरात से ही हैं और गुजरात में उनकी पार्टी की ही सरकार है। उनकी पसंद का आदमी ही वहां मुख्यमंत्री है। इसलिए वहां रह रहे दूसरे प्रदेशों के लोगों को सुरक्षा प्रदान करना मोदीजी का ही दायित्व है। यदि वहां से मार खा खा कर लोग अपने घरों में वापस लौटते हैं, तो उनके गृहराज्यों में गुजरात विरोधी भावना जरूर फैलेगी और सुरक्षा नहीं प्रदान करने के लिए नरेन्द्र मोदी उनके गुस्से का स्वाभाविक तौर पर शिकार हो जाएंगे।
 
कांग्रेस के नेता संजय निरूपम ने गुजरात में हो रहे हमलों को लेकर नरेन्द्र मोदी पर हमला करना शुरू भी कर दिया। वैसे उनकी बातें भड़काऊ भी हैं और इस तरह बातें उन्हें नहीं करनी चाहिए, लेकिन संजय निरूपम मूल रूप से शिवसैनिक ही हैं और वे आरएसएस की पत्रिका पांचजन्य में भी काम कर चुके हैं, इसलिए कांग्रेसी होने के बावजूद वे भाजपा कार्यकर्त्ता और शिवसैनिकों की भाषा का इस्तेमाल करते हैं और उनके बयान भी भड़काऊ होते हैं।
 
संजय निरुपम ने गुजरात में हिन्दी प्रदेशों के लोगों पर हो रहे हमले का हवाला देते हुए कहा कि नरेन्द्र मोदी को भी वाराणसी जाना है। उनकी भाषा में धमकी है, लेकिन वह गुजरात के लोगो को भी याद दिला रहे हैं कि तुम लोगों के राज्य के बाशिंदे जो देश के प्रधानमंत्री भी हैं, वाराणसी लोकसभा क्षेत्र के लोगों का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं, इसलिए यह मत समझो कि उत्तर प्रदेश और बिहार के लोग ही तुम्हारे प्रदेश में आते हैं, बल्कि तुम्हारे प्रदेश के लोग भी बिहार और उत्तर प्रदेश जाते हैं और वहां के लोगों पर निर्भर हैं।
 
संजय निरूपम की बात तो अपनी जगह है, लेकिन सच्चाई यह है कि अपनी स्वीकार्यता बढ़ाने या बनाए रखने के लिए प्रधानमंत्री को कड़ी मेहनत करनी पड़ रही है। उनकी सरकार के कार्यकाल की विफलता को लेकर विपक्ष उन पर हमलावर है और राहुल गांधी तो राफेल को लेकर उनके ऊपर सीधा हमला भी कर रहे हैं। प्रधानमंत्री की अपनी छवि उनकी पूंजी रही है और वे भारतीय जनता पार्टी की एकमात्र पूंजी हैं। उन्हें अपने बल पर ही दुबारा सत्ता में आना है, लेकिन गुजरात में हिन्दी प्रदेशों के लोगों पर हो रहे हमले अंततः नरेन्द्र मोदी के ही खिलाफ जाएंगे।
 
एक समय था जब गुजरातियों को मुंबई से भगाने का अभियान शिवसेना के संस्थापक बाल ठाकरे चलाते थे। मुंबई की अर्थव्यवस्था पर गुजरातियों का कब्जा था और बाल ठाकरे जैसे लोगों को लगता था कि यदि गुजरातियों को वहां से भगा दिया जाये, तो मराठी लोग संपन्न हो जाएंगे। कहने की जरूरत नहीं कि ठाकरे विफल रहे और उस अभियान के बाद गुजराती क्या भागेंगे, हिन्दी प्रदेशों के लोग भी लाखों की संख्या में वहां पहुंच गए।
 
बहरहाल, गुजराती अपने प्रदेश के बाहर के लोगों पर हमले कर रहे हैं और उन्हें गुजरात छोड़ने के लिए कह रहे हैं। जिस तरह से हमले हो रहे हैं, उससे तो ऐसा ही लगता है कि दूसरे प्रदेशों के लोगों के खिलाफ गुस्सा एकाएक नहीं बना है। जरूर कोई न कोई शक्ति पहले से काम कर रही होगी। हमले की शुरुआत बिहार के किसी कामगार द्वारा 14 महीने की एक लड़की के साथ बलात्कर की कथित घटना के बाद हुई। आज पूरे उत्तर भारत में इस तरह की बीमारी फैली हुई है और गुजरात के अपने सभी लोग भी इस बीमारी से बचे हुए नहीं हैं। इंटरनेट पर अश्लील क्लिप, टीवी चैनलों पर रियल्टी शो के नाम पर दिखाया जा रहा भौंडापन और शहरी जीवन के तनावों ने दक्षिणी भारत को छोड़कर हर जगह ऐसा माहौल तैयार कर दिया है कि छोटी छोटी बच्चियां तक असुरक्षित हो गई हैं।
 
पर एक मानसिक रोगी द्वारा किए गए अपराध के लिए गुजरात में रह रहे अन्य प्रदेशों पर हमला बेहद शर्मनाक है। एक व्यक्ति के अपराध के लिए लाखों लोगो को दोष देना गलत है। लेकिन यह सब गुजरात में हो रहा है और इसे रोकने की जिम्मेदारी न केवल गुजरात की सरकार की है, बल्कि वहां के भद्रजनों को भी इसमें भारी पैमाने पर हस्तक्षेप करना होगा। 
 
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का दायित्व सबसे ज्यादा बन जाता है, क्योंकि वहां उनकी पार्टी की ही सरकार है। जो कुछ भी वहां हो रहा है, उसका राजनैतिक नुकसान तो भाजपा को ही होगा, इसलिए यह भी संभव है कि भाजपा विरोधी तत्व उस हुड़दंग में सबसे ज्यादा सक्रिय हों। लेकिन उन हुड़दंबियों को पकड़ना और उनके इरादे का नाकाम करने की जिम्मेदारी भी नरेन्द्र मोदी की अपनी सरकार और गुजरात की उनकी पार्टी की सरकार की है। यदि उन्होंने हुडदंगियों पर काबू नहीं पाया, तो वे किस मुह से गुजरात के बाहर वोट मांगेगे? 
 
-उपेन्द्र प्रसाद

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