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कश्मीर में पाकिस्तानी कपड़ों की ही नहीं मसालों की भी है धूम

By सुरेश डुग्गर | Publish Date: Jun 11 2018 12:38PM

कश्मीर में पाकिस्तानी कपड़ों की ही नहीं मसालों की भी है धूम
Image Source: Google

कश्मीरियों की पाकिस्तानी आइटमों के प्रति चाहत कितनी है इसका इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि सिर्फ पाकिस्तानी कपड़ों पर ही नहीं बल्कि पाकिस्तानी मसालों पर भी कश्मीरी मर मिटे हैं। यही कारण है कि पिछले कुछ सालों से कश्मीर में पाकिस्तानी कपड़ों के साथ-साथ पाकिस्तानी मसाले धूम मचाए हुए हैं। यह धूम कितनी है इसके बारे में मसाला बेचने वाले डीलरों के शब्दों में कहा जाता है कि पाकिस्तानी मसाले गर्म केक की तरह बिकते हैं।

वैसे तो कश्मीर में पाकिस्तानी मसाले सारा साल ही धूम मचाए रहते हैं पर रमजान के महीने में इनकी बिक्री कई गुना बढ़ जाती है। ऐसे में रमजान के महीने में अधिकतर कश्मीरी बड़ी मात्रा में पाकिस्तानी मसाले खरीद कर स्टाक जमा कर लेते हैं।
 
कुछ साल पहले तक कश्मीर में ऐसी कोई मांग पाकिस्तानी मसालों की नहीं थी। अचानक बढ़ी मांग के कारण कश्मीर के वे व्यापारी भी हैरान हैं जो पाकिस्तानी वस्तुओं की बिक्री के व्यापार से जुड़े हुए हैं।
 
श्रीनगर के डाउन-टाउन क्षेत्र के जैनाकदल के मसालेदार डीलर कहते हैं, ये मसाले गर्म-केक की तरह बिकते हैं। उनके मुताबिक, कश्मीर में पाकिस्तानी मसालों की भारी मांग है। कश्मीर घाटी के लोग पाकिस्तान के कई ब्रांडों से अब इतने परिचित हो चुके हैं कि उन्हें उनके अतिरिक्त कोई और ब्रांड चाहिए ही नहीं। इनमें राष्ट्रीय तथा शान जैसे ब्रांड शामिल हैं। पुराने शहर के महाराज गंज क्षेत्र में मसालों की खरीद करते हुए सब्बेना अशरफ कहते हैं कि भोजन में मसालों को जोड़ना हमेशा एक अच्छा विचार है, और हम व्यक्तिगत रूप से पाकिस्तानी मसालों को पसंद करते हैं क्योंकि उनकी नजर में इनका कोई मैच नहीं है। उन्होंने कहा कि कश्मीर के लोग मांसाहारी भोजन का शौक रखते हैं और इन पाकिस्तानी मसालों के साथ समृद्ध स्वाद पाने के लिए उन्हें चुनना बहुत महत्वपूर्ण हो जाता है।
 
ये मसाले क्रास एलओसी व्यापार के जरिए आते हैं। क्रॉस एलओसी व्यापार अक्टूबर 2008 में भारत और पाकिस्तान के बीच एक आत्मविश्वास निर्माण उपाय (सीबीएम) के रूप में शुरू हुआ था। कश्मीर के दोनों तरफ से, व्यापारियों को 16 वस्तुओं में सौदा करने की इजाजत है, हालांकि वे मांग कर रहे हैं कि वस्तुओं की संख्या में वृद्धि होनी चाहिए। इन वस्तुओं में मसाले, सब्जियां, सूखे और ताजे फल, कालीन, गलीचा, कढ़ाई के सामान, शॉल, पेपर-माशी का सामान, कपड़े और लकड़ी के फर्नीचर शामिल हैं।
 
जैनाकदल के एक व्यापारी बशीर अहमद का कहना था कि एक दशक से व्यापार सलामाबाद-उड़ी मार्ग के माध्यम से हो रहा है और वर्ष में एक बार जब रमजान का महीना होता है हमारा कारोबार अपने चरम पर पहुंच जाता है। उन्होंने कहा कि रमजान के दौरान मांग इतनी अधिक होती है कि ज्यादातर व्यापारी जमा किए गए स्टॉक को बाहर निकालते हैं।
 
आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2017 में, 2,535 करोड़ रुपये के सामानों का निर्यात और पिछले एक दशक में 2,300 करोड़ रुपये के सामानों का आयात दोनों पक्षों के बीच हुआ।
 
व्यापारी दिन में केवल 35 ट्रक भेज सकते हैं या प्राप्त कर सकते हैं और इससे बहुत सी असुविधा होती है। एक अन्य वितरक गुलजार अहमद कहते हैं, सरकार को ट्रक की संख्या में वृद्धि और सूचीबद्ध वस्तुओं की संख्या को और अधिक महत्वपूर्ण बनाना चाहिए। उस मामले में, उन्होंने आगे कहा, इससे व्यापार की मात्रा में वृद्धि होगी और इस व्यवसाय की ओर अधिक लोग आकर्षित होंगे।
 
-सुरेश डुग्गर

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