लोकतंत्र के इस महायज्ञ में हमारी भी भागीदारी जरुरी

By डॉ. राजेन्द्र प्रसाद शर्मा | Publish Date: Mar 27 2019 2:44PM
लोकतंत्र के इस महायज्ञ में हमारी भी भागीदारी जरुरी
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देखा जाए तो भारत के निर्वाचन आयोग ने निरंतर सुधार की प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हुए निष्पक्ष और निर्भिक होकर मतदान के अवसर उपलब्ध कराने की पहल की है। मतदाताओं को जागृत करने के लिए अभियान चलाकर पूरी प्रक्रिया को समझाया जा रहा है।

17 वीं लोकसभा के चुनावों का विगुल बज चुका हैं। सात चरणों में होने वाले चुनावों के लिए दो चरणों की 188 सीटों के लिए नामांकन का काम भी पूरा हो गया है। इन सीटों पर नाम वापसी के बाद चुनाव में खड़े होने वाले प्रत्याशियों की स्थिति भी साफ हो जाएगी। आने वाले दिनों में बाकी चरणों के चुनावों की अधिसूचना जारी होने से नामांकन भरने तक का काम आरंभ हो जाएगा। 19 मई तक सात चरणों में चुनाव का कार्य लगभग पूरा हो जाएगा और फिर सब की नजर 23 मई को होने वाली मतगणना की और लगा रहेगा। देशवासियों को चुनाव आयोग पर गर्व है। समूची दुनिया में हमारी चुनाव प्रणाली को श्रेष्ठता की नजरों से देखा जाता है। यह दूसरी बात है कि हमारे देश में ही हारने वाले दलों द्वारा ईवीएम को लेकर प्रश्न उठाए जाते रहे हैं जिन्हें चुनाव आयोग ने सिरे से खारिज करते हुए खुली चुनौती देकर लगभग नकार दिया है। 


चुनावों के साथ ही आया राम−गया राम का दौर भी शुरु हो गया है। लोक लुभावन घोषणाओं का दौर आरंभ हो गया है। चुनाव रैलियों के दौर में आने वाले समय में ना जाने कितने नारे उछलेंगे और मतदान के दिन ज्यों ज्यों पास आएंगे त्यों त्यों चुनाव के मुद्दों में से भी ना जाने कौन सा मुद्दा रहेगा और कौन सा पर्दे के पीछे चला जाएगा। पर इन सबसे परे जो महत्वपूर्ण बात है वह यह कि चुनाव आयोग ने समूचे देश में साफ सुथरा चुनाव कराने की पूरी तैयारी कर ली है। इस बार के चुनावों की खासबात यह है कि देश के सभी 543 लोकसभा सीटों के मतदान केन्द्रों पर वीवीपैट मशीने लगाई जाएगी। यह अवश्य है कि पहले की तरह वीवीपैट और ईवीएम के मिलान का कार्य होगा हांलाकि सभी केन्द्रों के मिलान के कार्य को लेकर सर्वोच्च न्यायालय में प्रकरण विचाराधीन है और सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय व निर्देशों के बाद स्थिति और अधिक स्पष्ट हो सकेगी पर एक बात साफ है कि सभी मतदान केन्द्रों पर ईवीएम के साथ वीवीपैट मशीन लगाने से चुनावों में और अधिक पारदर्शिता आ सकेगी। इसके साथ ही चुनाव आयोग ने जो दूसरा फैसला इस साल के चुनावों के लिए किया है वह है ईवीएम मशीनों में प्रत्याशियों की फोटो को भी प्रदर्शित करने का निर्णय है। इससे अब मतदाता किसी भी भ्रम में नहीं रहेगा और समान नाम या चुनाव चिन्ह से मिलते जुलते नामों के चलते मतदान के समय मतदाता के सामने गफलत की स्थिति नहीं रहेगी। इसी कारण से चुनाव आयोग ने अभ्यर्थियों से नवीनतम पासपोर्ट आकार की फोटो संलग्न करने को कहा है। तीसरी और महत्वपूर्ण बात यह है कि इस बार चुनाव आयोग जीपीएस ट्रेकिंग व्यवस्था लागू करने जा रहा है। इससे मुख्यालय से लेकर मतदान केन्द्र और फिर मतगणना स्थल तक ईवीएम की ट्रेकिंग होने के साथ ही चुनाव अधिकारियों की भी ट्रेकिंग हो सकेगी। चुनाव आयोग ने फोटो युक्त मतदाता सूची तैयार कर ली है। करीब 99.36 फीसदी मतदाताओं के फोटो पहचान पत्र बन गए हैं। इसके साथ ही अब चुनाव आयोग ही चुनावों को साफ सुथरा बनाए रखने को ध्यान में रखते हुए मतदान केन्द्र की जानकारी से युक्त मतदाता परचियों को वितरण भी शुरु किया है। इससे अब किसी भी तरह से मतदाताओं को प्रभावित करने या मतदाताओं में मतदान बूथ को लेकर असंमजस की स्थिति नहीं रहेगी। 
देखा जाए तो भारत के निर्वाचन आयोग ने निरंतर सुधार की प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हुए निष्पक्ष और निर्भिक होकर मतदान के अवसर उपलब्ध कराने की पहल की है। मतदाताओं को जागृत करने के लिए अभियान चलाकर पूरी प्रक्रिया को समझाया जा रहा है। मतदाताओं को सुरक्षा प्रदान करने के साथ ही उनके निकटतम स्थान पर मतदान केन्द्र स्थापित किए गए हैं। ऐसे में अब मतदाताओं का दायित्व हो जाता है कि वे अपने मताधिकार का उपयोग अवश्य करें। यह सही है कि 1951 के चुनावों में जहां देश में 44.1 फीसदी मतदान हुआ था वह 2014 के चुनाव आते आते बढ़कर 66.8 प्रतिशत तक पहुच गया पर मतदान के इस प्रतिशत को किसी भी स्थिति में संतोषजनक नहीं माना जा सकता। दो तीन साल पहले सर्वोच्च न्यायालय की इस टिप्पणी का भावार्थ सामयिक और महत्वपूर्ण हो जाता है कि आपने यदि मताधिकार का उपयोग नहीं किया है तो फिर सरकार के खिलाफ टिप्पणी करने का आपको कोई हक नहीं हैं। एक और हम सरकार से नित नई मांगें मांगते हैं वहीं केवल घर से बाहर निकल कर मतदान करने के अपने दायित्व को हममें से कई लोग या यों कहें कि 2014 के आंकड़े ही देखे तो 33 फीसदी से अधिक लोग नहीं निभाते हैं। स्थितियों में तेजी से बदलाव आया है। सुरक्षा और निष्पक्षता के साथ ही मताधिकार के प्रति मतदाताओं को जागृत करने और मतदाताओं में विश्वास पैदा करने में चुनाव आयोग पूरी तरह सफल रहा है फिर भी मतदान का प्रतिशत 95 प्रतिशत तक नहीं पहुंच पा रहा है। तस्वीर को यों भी देखा जा सकता है कि जब देश में 1951 में साक्षरता का प्रतिशत 18.33 प्रतिशत था तब मतदान का प्रतिशत 44.1 प्रतिशत तक रहता है और जब साक्षरता के आंकड़े 74 फीसदी को छूते हैं तो मतदान का प्रतिशत साक्षरता की तुलना में कम होकर 66.8 प्रतिशत रह जाता है। यह तब है जब चुनावों की पूरी व्यवस्था पारदर्शी, कम श्रमसाध्य, निष्पक्ष और सुरक्षित व साफ सुथरी हो गई है। मतगणना के चंद घंटों बाद ही परिणाम तक प्राप्त होने लगे हैं। मतदान केन्द्र की जानकारी के लिए किसी दल विशेष पर निर्भर नही रहना पड़ता, घर के कुछ कदम दूर ही मतदान बूथ होने लगा है। वीवीपैट के कारण अपने मत को देखने का अवसर भी मिला है। 


 

 
संवेदनशील मतदान केन्द्रों पर माकूल सुरक्षा व्यवस्था के साथ ही वीडियोग्राफी की व्यवस्था भी की जा रही है। ऐसे में आममतदाताओं का यह दायित्व हो जाता है कि वे मतदान केन्द्र तक पहुंचे और अपने मताधिकार का प्रयोग करे। लोकतंत्र के इस महायज्ञ में मतदान कर अपनी आहुति सुनिश्चित करें। प्रत्येक मतदाता को मतदान केन्द्र में जाकर मताधिकार के प्रयोग का संकल्प करना होगा तभी हम लोकतंत्र के सच्चे प्रहरी बन सकेंगे।


 
डॉ. राजेन्द्र प्रसाद शर्मा

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