योगी के बजट से लोगों को तो फायदा होगा पर मोदी को होगा या नहीं... ?

By रजनीश कुमार शुक्ल | Publish Date: Feb 11 2019 7:10PM
योगी के बजट से लोगों को तो फायदा होगा पर मोदी को होगा या नहीं... ?
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विरोधियों की बात करें तो ''कुछ तो लोग कहेंगे लोगों का काम है कहना...'' क्योंकि सभी को अच्छाइयां कम बुराइयां ज्यादा दिख रही हैं। किसी को चुनावी बजट लग रहा है तो जो खुद भ्रष्ट हैं उनको यह लगता है कि योगी के पाप कुंभ स्नान से भी नहीं धुलेंगे।

योगी आदित्यनाथ ने बजट में चुनाव को देखते हुए चौके-छक्के की भरमार लगा दी। बजट में उन्होंने मध्यम वर्ग के साथ अपनी संस्कृति और धर्म पर भी जोर दिया। संस्कृत पाठशालाओं पर ध्यान देना जरूरी था नहीं तो आगे चलकर इनका भी वजूद खतरे में पड़ जाता क्योंकि कोई भी सरकार संस्कृत पाठशालाओं और विश्वविद्यालय की ओर ध्यान नहीं दे रही थी। मदरसों पर भी ध्यान देना जरूरी था क्योंकि धार्मिक तालीम से कुछ नहीं हो सकता, समय के अनुरूप बदलाव की आवश्यकता होती है यदि रोजगार परक शिक्षा चाहिये तो आधुनिक शिक्षा अतिआवश्यक है। योगी सरकार ने बजट में धार्मिक एजेंडे को भी धार दिया साथ ही मदरसों के आधुनिकीकरण के लिए प्रतिबद्धता जताई वह बहुत ही सराहनीय कदम है।
 
 
प्रदेश के विकास के साथ इन्फ्रास्ट्रक्चर पर भी ध्यान दिया गया है। गांव, गरीब, किसान, महिलायें, व्यापारी और समाज के प्रत्येक तबके के उत्थान के लिए सही कदम उठाया गया है। समाज में जिस तरह भ्रूण हत्या हो रही है और बच्चियों की संख्या कम हो रही है उसके लिए कन्या सुमंगला योजना लाना अतिआवश्यक था। यह कदम उठाकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बहुत सही फैसला किया। इससे बेटियों के पैदा होने से लेकर उनकी पढ़ाई और शादी तक की जो व्यवस्था की गई है वह बहुत सही है क्योंकि आम आदमी बेटियों की पढ़ाई और शादी में ही परेशान हो जाता है। लाख कोशिशों के बावजूद शादी के समय दहेज देना ही पड़ता है जिससे आम आदमी को परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इसी कारण से प्रदेश में बेटियों की संख्या में अच्छी खासी गिरावट आ रही थी। इस योजना से काफी हद तक गरीबों को सहारा मिलेगा। 


प्रदेश में धार्मिक स्थलों के लिए जो मसौदा पेश किया है उससे तो हिन्दुओं का साथ तो मिलेगा साथ ही पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा।
 
देखा जाये तो उत्तर प्रदेश में धार्मिक आधार पर मथुरा, काशी, अयोध्या पर्यटन का मुख्य केन्द्र हैं क्योंकि धार्मिक लोग दर्शन-पूजन के लिए काशी में बाबा विश्वनाथ और संकट मोचन, मथुरा में द्वारकाधीश, वृंदावन में बांकेबिहारी, इस्कॉन मंदिर और अयोध्या में श्री राम जन्म भूमि, हनुमान गढ़ी मंदिर आदि धार्मिक स्थानों पर आते हैं। इसके साथ ही अन्य छोटे पर्यटन स्थलों का भी ध्यान दिया गया। प्रयागराज स्थित ऋषि भारद्वाज आश्रम एवं श्रृंगवेरपुर धाम, विन्ध्याचल एवं नैमिषारण्य का विकास, बौद्ध परिपथ में सारनाथ, श्रावस्ती, कुशीनगर, कपिलवस्तु, कौशाम्बी एवं संकिसा का विकास, शाकुम्भरी देवी एवं शुक्रताल का विकास, राजापुर चित्रकूट में तुलसी पीठ का विकास, बहराइच स्थित महाराजा सुहेलदेव स्थल एवं चित्तौरा झील का विकास तथा लखनऊ में बिजली पासी किले का विकास भी समय की मांग थी।
 
 


वहीं देखा जाये तो प्रदेश के विकास के लिए सड़कें अहम रोल अदा करतीं हैं क्योंकि सड़कें अच्छी नहीं होंगी तो कोई भी निवेशक प्रदेश में नहीं आयेगा। इसलिए प्रदेश को जोड़ने के लिए एक्सप्रेस-वे का भी निर्माण अतिआवश्यक है इसका भी बजट में ध्यान दिया गया। प्रदेश के विकास में पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे, बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे, गोरखपुर लिंक एक्सप्रेस व डिफेंस कॉरिडोर अहम रोल अदा करेंगे। गरीबी की बात करना अलग है और उसमें अमल करना अलग है क्योंकि गरीब किसानों के बारे में सिर्फ कहने से आय दोगुनी नहीं हो जाती साथ ही उनको उन्नत बीज, उर्वरक, सिंचाई के साधन, भंडारण और उचित दाम दिलाना अतिआवश्यक है इस बजट में इसका भी ध्यान दिया गया। प्रदेश के ग्रामीण अंचल में लग रहे 500 हाट-पैठ के निर्माण से किसानों को काफी फायदा मिलेगा। दुग्ध संघों तथा समितियों को सुदृढ़ बनाने, विस्तार करने तथा कृषकों के प्रशिक्षण के साथ ही तकनीकी पर भी जोर दिया गया इन सब से भी किसानों को बहुत फायदा मिलेगा।
 
वहीं सूक्ष्म व लघु एवं मध्यम उद्योगों के प्रोत्साहन के लिए मुख्यमंत्री ने जो प्रतिबद्धता जताई थी उस पर सरकार खरी उतरी, सरकार छोटे एवं मझोले उद्योग को बढ़ाने के लिए 'एक जनपद-एक उत्पाद' (ओडीओपी) लेकर आयी थी। हर जिले की छोटे लघु उद्योगों से अपनी पहचान थी जिसको पुनर्जीवित करने का कार्य किया गया था इस बजट में इन सब पर भी ध्यान दिया गया। वहीं प्रदेश के परंपरागत कारीगरों तथा बढ़ई, दर्जी, टोकरी बुनकर, सुनार, लोहार, कुम्हार, हलवाई, नाई, मोची व राजमिस्त्री के उत्थान के लिए विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना की भी शुरूआत की गयी जिसमें मजदूर समेत अन्य गरीब तबकों के लिये तीन हजार रूपये सालाना पेंशन की भी व्यवस्था की गई है।
 
मुख्यमंत्री ने बजट में बुंदेलखंड और विंध्य का विशेष ध्यान रखा। इन दोनों क्षेत्रों को विकास से जोड़ा जायेगा। बुंदेलखंड में पाइप लाइन से पेयजल योजना की शुरुआत की जायेगी। वहीं मध्य प्रदेश की सहमति मिली तो केन व बेतवा नदी को जोड़ने का काम भी जल्द ही शुरू हो जायेगा, जिससे बुंदेलखंड के किसानों को राहत मिलेगी। बुंदेलखंड में पानी की समस्या हमेशा से ही रही है। योगी सरकार बुंदेलखंड में सभी सीटें जीती थी यदि अब वहाँ के लिए कुछ नहीं करते तो उनके वोट बैंक पर अच्छा खासा असर पड़ता इस वजह से विषेश ध्यान दिया गया।


 
चिकित्सा के क्षेत्र में भी बड़ा ऐलान किया गया 'आयुष्मान भारत योजना' से छूटे गरीबों को लाभ देने के लिए 'मुख्यमंत्री जन आरोग्य अभियान' की शुरुआत की जायेगी। इसके तहत 10 लाख पात्र गरीब परिवारों को मुफ्त इलाज की सुविधा दी जायेगी, साथ ही कैंसर संस्थान का विस्तार करना और पाँच जिलों के राजकीय मेडिकल कॉलेजों को अपग्रेड भी किया जायेगा। रोबोटिक सर्जरी की भी शुरुआत की जायेगी। गाँवों में चिकित्सा व्यवस्था को ठीक करने के लिए 1000 आयुर्वेदिक अस्पताल बनाये जाने की घोषणा की गई। प्रदेश सरकार जानती है कि सबसे बड़ा मुद्दा स्वास्थ्य का है क्योंकि प्रदेश में स्वास्थ्य व्यवस्था का हाल ठीक नहीं है हर जगह नई तकनीकी की माँग हो रही। इस बजट में चिकित्सा स्वास्थ्य से ज्यादा चिकित्सा शिक्षा पर जोर है क्योंकि प्रदेश में डॉक्टरों की बहुत ज्यादा कमी है।
 
 
अब योगी सरकार पुलिस को अत्याधुनिक बनाने के लिए जुटी और नये थाने भी खोलेगी, साथ ही उनके रहने के लिए नए आवासों का भी निर्माण करायेगी। प्रधानमंत्री आवास के निर्माण के साथ ही ग्रामीण क्षेत्र में कच्चे घरों में रहने वालों के लिए पक्का मकान देने की भी घोषणा की है जो चुनाव में अहम किरदार अदा करेगी। विरोधियों की बात करें तो 'कुछ तो लोग कहेंगे लोगों का काम है कहना...' क्योंकि सभी को अच्छाइयां कम बुराइयां ज्यादा दिख रही हैं। किसी को चुनावी बजट लग रहा है तो जो खुद भ्रष्ट हैं उनको यह लगता है कि योगी के पाप कुंभ स्नान से भी नहीं धुलेंगे। खुद की जब सरकार थी तो उन्होंने ऐसे कार्य नहीं किये अब अगर कोई कर रहा है तो उसमें भी नुक्स निकालने में लगे हैं। अब देखना यह है कि योगी सरकार के इस लुभावने बजट से लोकसभा चुनाव में कितना फायदा मिलता है, यह तो वक्त ही बतायेगा।
 
-रजनीश कुमार शुक्ल
सह संपादक (अवधनामा ग्रुप)

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