राजस्थान में जीका वायरस ने दी दस्तक, जनता के साथ सरकार भी हैरान

By डॉ. राजेन्द्र प्रसाद शर्मा | Publish Date: Oct 5 2018 1:35PM
राजस्थान में जीका वायरस ने दी दस्तक, जनता के साथ सरकार भी हैरान
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हालांकि जयपुर में जीका वायरस से प्रभावित मामले सामने आते ही केन्द्र व राज्य सरकार पूरी तरह से सक्रिय हो गई है और राज्य के साथ ही केन्द्र सरकार के विशेषज्ञों का दल जयपुर पहुंच कर स्क्रीनिंग के काम में जुट गया है।

आखिर जीका वायरस ने भारत में भी दस्तक दे ही दी। हालांकि जयपुर में जीका वायरस से प्रभावित मामले सामने आते ही केन्द्र व राज्य सरकार पूरी तरह से सक्रिय हो गई है और राज्य के साथ ही केन्द्र सरकार के विशेषज्ञों का दल जयपुर पहुंच कर स्क्रीनिंग के काम में जुट गया है। तीनों संदिग्धों के सैंपल जांच के लिए पूना भेजे जा चुके हैं और संदिग्ध मरीजों के घर के आसपास सहित घर घर जाकर स्क्रीनिंग का काम शुरु कर दिया गया है। अभी यह मामले शास्त्रीनगर जयपुर के बताए जाते हैं पर जयपुर में जीका वायरस के मामले मिलना चिंता का विषय है।
 
जीका वायरस ग्लोबल खतरा बना हुआ है। इस वायरस से सबसे अधिक प्रभावित देश ब्राजील है। माना जा रहा है कि ब्राजील में इस वायरस ने करीब 15 लाख लोगों को अपने दायरे में ले रखा है। जीका वायरस के प्रभाव से बचाने के ठोस प्रयास किया जाना अपने आप में चुनौती भरा काम है। अमेरिका तक में 40 लोग इस बीमारी से जूझ रहे हैं। मच्छर जनित रोग जीका वायरस की पहचान 1947 में की गई थी। दक्षिण अमेरिका सहित करीब 23 देशों में जीका वायरस प्रभावित लोगों के मामले सामने आते जा रहे हैं। दक्षिण अमेरिकी देशों के साथ ही अफ्रीका और दक्षिण एशिया के कुछ देशों में जीका वायरस के मामले बहुतायत में सामने आए हैं। अभी तक इसके इलाज का टीका विकसित नहीं हो पाया है और ना ही इस रोग का कोई ठोस निदान सामने आ पाया है।
 


जीका वायरस से माइक्रोकेफेली और ग्यूलेन वैरे का खतरा है। माइक्रोकेफली में नवजात बच्चे आकार में छोटे और अविकसित दिमाग के होते हैं तो ग्यूलेन वेरे बीमारी का मतलब तंत्रिका जनित रोग और लकवा जैसी स्थिति आ जाती है। आम मच्छर जनित रोगों की तरह ही इसमें बुखार, जोड़ों का दर्द, शरीर पर लाल चकत्ते, थकान, सिरदर्द और आंखों में लालिमा आना इस रोग के लक्षण बताए जाते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन भी जीका वायरस के बढ़ते प्रभाव से चिंतित है और मच्छरों की रोकथाम, पूरे शरीर को ढंक कर रखने, हल्के रंग के कपड़े पहनने और आसपास किसी भी स्थान, कूलर, गमले या अन्य में पानी एकत्रित ना होने देने का सुझाव देता रहा है।
 
दरअसल मच्छर को मच्छर समझने की भूल करना ही जीका हो या डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया आदि के फैलाव का कारण है। यह भी साफ है कि मच्छर जनित रोग जानलेवा साबित होने में देरी नहीं लगाते। डेंगू से मौत के देश भर में सैंकड़ों मामले सामने आ चुके हैं। इलाज के नाम पर हालांकि चिकित्सक हल्का तरल पदार्थ लेने की सलाह देते रहते हैं। चिंता की बात यह है कि जयपुर में जीका वायरस कैसे पहुंचा। आखिर जयपुर में एक साथ एक से अधिक महिलाओं के जीका से ग्रसित होने का क्या कारण रहा। अब तक देश में मलेरिया वायरल के बाद चिकनगुनिया व डेंगू के मामले ही अधिक देखने को मिले हैं। डेंगू के कहर से हजारों जिंदगियां असमय काल के ग्रास में समा चुकी हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के देशव्यापी स्वच्छता अभियान और सरकार के मच्छरों की रोकथाम के लिए सुझाए जा रहे उपायों के बावजूद मच्छर है कि अपना कुनबा बढ़ाते ही जा रहे हैं। बरसात के बाद सर्दी की शुरुआत के साथ ही इन बीमारियों का प्रकोप तेजी से बढ़ता है। एक समय था जब मलेरिया की रोकथाम के लिए घर−घर मलेरिया की नियमित जांच, डीडीटी पाउडर का वितरण, लाल दवा का वितरण, टीकाकरण, फोगिंग आदि नियमित व्यवस्था में शुमार थी और एक हद तक मलेरिया में अंकुश लगाने में कामयाब भी रहे पर अब वापिस मलेरिया वायरल के मामले भी सामने आने लगे हैं। जीका वायरस का अभी तो प्रवेश मात्र ही है। देश में कुछ मामले ही सामने आए हैं। ऐसे में सरकारी तंत्र को अतिसक्रियता से जीका वायरस के प्रभाव को सीमित करने के साथ ही इसके विस्तार को रोकने के कदम उठाने होंगे ताकि दक्षिण अमेरिका, अफ्रिका और दक्षिण एशिया में तेजी से विस्तारित हो रहे जीका वायरस के प्रभाव से देश को बचाया जा सके।
 
हालांकि सरकार ने इसे गंभीरता से लिया है। मामले सामने आते ही केन्द्र सरकार का दल जयपुर आ गया। सेंपल पूना जांच के लिए भेजे गए। रोकथाम के प्रयास शुरु हो गए। नगर निगम को फोगिंग सहित अन्य उपाय करने, लोगों को मच्छर पैदा होने से रोकने, मच्छर जनित रोगों से बचाव के लिए सचेत करने, फोगिंग कराने जैसे उपायों के लिए सचेत करने का काम शुरु हो गया है। फिर भी मच्छर को मच्छर नहीं समझ कर जीका वायरस की रोकथाम के ठोस प्रयास करने ही होंगे।


 
-डॉ. राजेन्द्र प्रसाद शर्मा

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