कॉपीराइट का क्या है महत्त्व, प्रक्रिया को विस्तार से जानें!

Copyright law
बता दें कि अगर आप किसी कॉपीराइट का कंटेंट, गाने या फिल्म का पर्सनल यूज़ करते हैं, तो कानूनी तौर पर इसे जायज माना जाता है, लेकिन अगर किसी कमर्शियल परपज के लिए आप उसका इस्तेमाल करते हैं, तो इसे कॉपीराइट का वायलेशन माना जाता है।

यह बहुत ही महत्वपूर्ण कानून है, जो आपके मौलिक कार्य को सुरक्षा का आश्वासन ही नहीं, अधिकार भी देता है। कई बार ऐसा होता है कि आप कोई कार्य कर रहे हैं और जब वह लोगों में पॉपुलर हो जाता है, ठीक तभी, उसी नाम से कोई दूसरा आपकी कॉपी करना शुरू कर देता है। ऐसी स्थिति में एंड कस्टमर कंफ्यूज हो जाते हैं कि असली कौन है और नकली कौन है!

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इसके अलावा आपके कार्य की मौलिकता भी नष्ट हो जाती है।

ज़ाहिर तौर पर ऐसे में आप को भारी नुकसान होता है। सवाल उठता है कि इससे बचने के क्या उपाय हैं, तो उसका ही जवाब है कॉपीराइट।

आइए जानते हैं इसके बारे में वह सब कुछ, जो आपके लिए उपयोगी हो सकता है...

1957 में कॉपीराइट रजिस्ट्रेशन एक्ट बना था और 1958 में लागू हुआ था। हालाँकि, ब्रिटिश राज में 1912 में यह कानून बना, जिसके बाद कुछ संशोधन भी हुए। बता दें कि 1957 में बने आजादी के बाद कॉपीराइट कानून में 2012 में भी कुछ आवश्यक संशोधन किए गए और कानून फुल प्रूफ करने की कोशिश हुई।

कॉपीराइट का मतलब यही है कि आपके ओरिजिनल काम की कोई कॉपी नहीं कर सकेगा और उस पर आपका हक बना रहेगा उसकी स्पेशियलिटी बनी रहेगी।

प्रश्न उठता है कि कॉपीराइट की कंप्लेंट के अंतर्गत क्या क्या आता है, तो आपको बता दें कि कॉपीराइट के अंतर्गत फिल्म और साहित्य से जुड़े काम तो आते ही हैं, साथ ही साथ लेखन, साउंड रिकॉर्डिंग, बिजनेस स्टार्टअप इत्यादि भी इसमें अलग-अलग स्तर पर शामिल हैं।

तात्पर्य है कि यह आपको इस तरीके से सुरक्षा देता कि कोई नाम बदलकर इसका इस्तेमाल नहीं कर सकता। यहाँ तक कि कोई इसका ट्रांसलेशन नहीं कर सकता, बिना आपकी लिखित परमिशन के कोई इसका पुनः उत्पादन नहीं कर सकता, और इस तरीके से यह कार्य करता है।

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आप पूछेंगे कि कॉपीराइट किस चीज के लिए मुख्य तौर पर काम करता है, तो आपको बता दें कि किसी भी लेखन-संबंधी कार्य, म्यूजिक संबंधी कार्य, पेंटिंग, फोटोग्राफी, कलाकृति यानी आर्ट से रिलेटेड काम, कुछ प्रकाशित करने वाला, देखने वाला कंटेंट हो, उसका काम मूवी- फिल्म और टेलीविजन के लिए भी शामिल होता है। इसी कॉपीराइट में टीवी और रेडियो का ब्रॉडकास्ट भी शामिल है।

इसके बारे में और डिटेल में जानना चाहते हैं तो, copyright.gov.in वेबसाइट पर जाएं और आपको डिटेल इंफॉर्मेशन मिल जाएगी।

अब प्रश्न उठता है कि इसका पंजीकरण, अर्थात रजिस्ट्रेशन किस प्रकार कराया जाए।

अगर आप भी कॉपीराइट रजिस्ट्रेशन कराना चाहते हैं तो copyright.gov.in वेबसाइट पर जाएं और ऑनलाइन अप्लाई करें। इस वेबसाइट पर लॉग इन करना फ्री है। लॉग इन करने के बाद कॉपीराइट रजिस्ट्रेशन के लिए फॉर्म नंबर 904 भरिए। यहाँ आप तमाम डिटेल्स भरें, जिसमें आपका नाम, पता और नेशनलिटी के बारे में डिटेल बताना शामिल है। आपको यह डिक्लेयर करना पड़ेगा कि आप जिसके लिए कॉपीराइट का आवेदन कर रहे हैं, वह आपका ही है, या फिर आप संबंधित व्यक्ति के रिप्रेजेंटेटिव है।

फिर आपको उस कार्य का संक्षिप्त विवरण भरना होगा, जिसका कॉपीराइट आप चाहते हैं। हेडिंग से लेकर कंटेंट इत्यादि की डिटेल इसमें देना होगा।

कॉपीराइट अप्लाई करने के साथ आप को एनओसी यानी अनापत्ति प्रमाण पत्र, अपने कार्य की कम से कम तीन प्रतियां, उसके अलावा प्रकाशक से एनओसी लेना होगा। साथ ही प्रकाशक का नाम, पता और नेशनलिटी दर्ज करनी होगी। इसकी फीस की बात करें तो ₹50 से लेकर ₹600 तक इसकी फीस लगती है।

पहले यह कार्य काफी मुश्किल होता था और उसको फिजिकली ही अप्लाई किया जा सकता था, लेकिन अब इसको ऑनलाइन भी अप्लाई किया जा सकता है। आपके आवेदन के स्वीकृत होने के बाद आपको एक नंबर भेजा जाता है और तकरीबन 30 दिन बाद आपको पता चलता है कि आपके कॉपीराइट के तहत आपके कार्य को रजिस्टर्ड किया गया है अथवा नहीं! साधारण तौर पर यह हो जाता है, किंतु अगर आपके कार्य पर किसी अन्य व्यक्ति / संस्था ने ऑब्जेक्शन कर दिया, तो फिर यह प्रक्रिया लंबी हो जाती है।

प्रश्न उठता है कि कॉपीराइट की वास्तविक मियाद क्या होती है, तो बता दें कि अगर कोई फोटोग्राफ है, तो उसकी 60 साल की अवधि मानी जाती है। इसी प्रकार से लिटरेचर, ड्रामा, म्यूजिक या फिर कोई आर्ट का वर्क हो तो वह क्रिएटर के जीवन पर्यंत तक, उसके ऑफिस के अंतर्गत सुरक्षित रहता है और उसके मरने के 60 साल तक वह सुरक्षित रहता है।

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बता दें कि अगर आप किसी कॉपीराइट का कंटेंट, गाने या फिल्म का पर्सनल यूज़ करते हैं, तो कानूनी तौर पर इसे जायज माना जाता है, लेकिन अगर किसी कमर्शियल परपज के लिए आप उसका इस्तेमाल करते हैं, तो इसे कॉपीराइट का वायलेशन माना जाता है। इसी प्रकार से किसी भी कॉपीराइटेड वस्तु का कुछ अंश समीक्षा के परपज से इस्तेमाल किया जा सकता है, और इसे कॉपीराइट एक्ट की धारा 52 में उल्लंघन नहीं माना गया है।

ध्यान रखें और इंटरनेट पर भी अगर कोई कॉपीराइट कंटेंट है, तो उसकी इजाजत लेकर ही उसका प्रयोग करना उचित होगा। अगर कोई क्रेडिट चाहता है, खासकर सार्वजनिक प्रसार के लिए, तो उसे क्रेडिट ज़रूर दें।

पब्लिक डोमेन में भी अगर कोई कंटेंट है, तो उस पर भी सावधानी बरतनी चाहिए। बता दें कि कॉपीराइट एक्ट का उल्लंघन कोई करता है तो उसे दोषी पाए जाने पर 1 साल की सजा और आर्थिक जुर्माना देना पड़ सकता है।

फिर ऐसी नौबत ही क्यों आये और लोग खुद ही क्यों न सचेत हो जाएं!

- मिथिलेश कुमार सिंह

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