बच्चों के भविष्य की आवश्यकताओं के लिए चुनिंदा योजना में कीजिए निवेश

  •  कमलेश पांडेय
  •  नवंबर 10, 2020   15:31
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बच्चों के भविष्य की आवश्यकताओं के लिए चुनिंदा योजना में कीजिए निवेश

पीपीएफ यानी कि पब्लिक प्रॉविडेंट फंड, विभिन्न कारणों से आजकल निवेश हेतु सबसे अच्छी योजना है। यह एक 15 वर्षीय योजना है जहां आप अपने बच्चे की शिक्षा-दीक्षा के लिए एक बड़े कोष का निर्माण अल्प बचत से ही कर सकते है।

अमूमन बच्चे देश के भविष्य होते हैं। जैसे-जैसे वे बड़े होते हैं, उनकी जरूरतें बढ़ती जाती हैं। इन्हें समय-समय पर पूरा करना ही सफल माता-पिता का फर्ज बनता है। लिहाजा, किसी भी माता-पिता को उनके भावी जीवन के बारे में अच्छी तरह से योजनाएं बनानी चाहिए। उन्हें अपनी आर्थिक हैसियत के मुताबिक और प्रतिभाशाली बच्चों के लिए उससे बढ़कर भी, समयबद्ध तरीके से आगे बढ़ना चाहिए। 

इसके लिए आवश्यक है कि आप उनकी सही परवरिश, शिक्षा-दीक्षा और समृद्ध आर्थिक जीवन की प्राथमिकताओं को सिलसिलेवार ढंग से तय कीजिए। उसके लिए कुछ ऐसी आर्थिक योजनाएं बनाइए, जिससे कम लेकिन नियमित निवेश से भी उसका भावी जीवन समृद्ध और खुशहाल हो सके। इससे आपका राष्ट्र भी खुद ब खुद खुशहाल हो जाएगा।

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इस बात में कोई दो राय नहीं कि किसी भी परिवार का भविष्य उनके बच्चों के मजबूत कंधों पर ही निर्भर करता है। शायद  इसलिए सरकार भी विशेष रूप से बाल निवेश बचत योजनाएं आदि चलाती हैं ताकि उसके माता-पिता बचत हेतु प्रोत्साहित हो सकें और वित्तीय तौर पर लाभान्वित भी हों। कभी-कभार सरकार यदि अपने उद्देश्य में पिछड़ भी जाए तो बुद्धिमान माता-पिता उपलब्ध योजनाओं में से जो सबसे अधिक फायदेमंद होता है, उसी में अपने बच्चों के खातिर निवेश करते हैं। 

ऐसा इसलिए कि ये बच्चे ही अपने-अपने घर-परिवार की अंतिम उम्मीद होते हैं। उनकी सफलता-विफलता ही परिवार की पहचान बनती है। इसलिए उनकी भावी जरूरतों के मद्देनजर किया जाने वाला कोई भी निवेश दूरदर्शिता भरा कदम होता है, क्योंकि परोक्ष रूप से इससे देश का भविष्य भी समृद्ध और सुरक्षित होता है। 

आमतौर पर कई माता-पिता अब अपने बच्चों के लिए बीमा कंपनियों, विभिन्न फंड हाउसेस द्वारा दी जाने वाली यूनिट लिंक्ड बीमा योजनाओं समेत विभिन्न बचत योजनाओं में खास रूचि लेते हैं। ऐसा इसलिए कि ये योजनाएं एक तरह की सुरक्षा देने के साथ-साथ बच्चों की उच्च शिक्षा, पेशेवर हुनर और अन्य आवश्यकताओं के लिए कुछ मददगार साबित होती हैं। 

यह बात अलग है कि इनसे मिलने वाला मुनाफा औसतन प्रायः कम ही होता है, लेकिन होता है। वास्तव में, यदि आप इन योजनाओं के अनुसार अपने बच्चे पर होने वाले खर्चों को कम करते हैं तो आम तौर पर इनमें मुनाफा भी कम होता जाता है। इसलिए आप नीचे दिए हुए कुछ बेहद लाभकारी बाल निवेश बचत योजना और अन्य लाभकारी बचत योजनाओं पर गौर फरमाइए:-

# बच्चे हेतु बड़े कोष के लिए 'पीपीएफ खाता' सबसे उपयुक्त

पीपीएफ यानी कि पब्लिक प्रॉविडेंट फंड, विभिन्न कारणों से आजकल निवेश हेतु सबसे अच्छी योजना है। यह एक 15 वर्षीय योजना है जहां आप अपने बच्चे की शिक्षा-दीक्षा के लिए एक बड़े कोष का निर्माण अल्प बचत से ही कर सकते है। इसका मुख्य आकर्षण 8.1 प्रतिशत की मौजूदा ब्याज दर है जो बैंकों द्वारा दी जाने वाली 7 प्रतिशत की ब्याज दर से अपेक्षाकृत कहीं ज्यादा हैं। यही नहीं, इसमें निवेशकों द्वारा अर्जित ब्याज पूर्ण रूप से कर मुक्त है। साथ ही, आयकर अधिनियम की धारा 80 सी के तहत इसमें निवेश करने वाले को आयकर में 1.5 लाख रुपए तक की छूट मिलती है। यही वजह है कि कुल मिलाकर यह एक बहुत ही आकर्षक निवेश योजना है जिसके माध्यम से कोई व्यक्ति अपने बच्चे के लिए कोष निर्माण कर सकता है। निःसन्देह यह एक सर्वोत्तम तरीका है जिस पर अमल करने की दरकार हर जागरूक व्यक्ति के लिए है।

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# लड़कियों के लिए बेहद आकर्षक है सुकन्या समृद्धि खाता

लड़कियों के बेहतर भविष्य के लिए और उनकी उच्च शिक्षा अथवा शादी की जरूरतों हेतु कोष निर्माण करने के लिए सुकन्या समृद्धि खाता को एक बेहतरीन विकल्प समझा जाता  है। क्योंकि पीपीएफ (पब्लिक प्रोविडेंट फंड) की तरह ही यह आकर्षक योजना भी 8.1 फीसदी की ब्याज दर के साथ पूर्ण रूप से कर मुक्त है। इस योजना में भी आयकर अधिनियम की धारा 80 सी के तहत कर लाभ प्रदान किया गया है। लेकिन, गौर करने योग्य बात यह है कि यह योजना केवल लड़कियों के लिए ही है। इसलिए यदि आप अपनी बेटी की शादी या उसकी उच्च शिक्षा के लिए बचत करना चाहते हैं तो इस योजना से अधिक आकर्षक विकल्प अभी बैंकिंग व्यवस्था में उपलब्ध नहीं है। अतः इसका लाभ उठाइए और अपनी बच्ची को आत्मनिर्भर बनाइए।

# गोल्ड ईटीएफ सेविंग में जोखिम कम और लाभ अधिक

यदि आप अपने बच्चे के बेहतर भविष्य के लिए सोने में निवेश करना चाहते हैं तो भौतिक सोने के माध्यम से कदापि न करें। क्योंकि इससे अच्छा विकल्प गोल्ड ईटीएफ सेविंग होगा। खास बात यह कि इसमें किसी तरह का कोई लॉकर या अन्य भंडारण शुल्क नहीं लिया जाता है। इसके अतिरिक्त, आप इलेक्ट्रॉनिक रूप में भी इसमें निवेश कर सकते हैं जहां चोरी आदि की कोई चिंता नहीं रहती है। यही नहीं, आप प्रत्येक महीने छोटी मात्रा में भी निवेश कर सकते हैं जिससे धीरे-धीरे आप एक बड़ा कोष भी जमा कर सकते हैं। आपको यह मानकर चलना होगा कि सोना लंबी अवधि में अन्य परिसंपत्ति वर्गों की तुलना में ज्यादा बेहतर लाभ देता है। आम तौर पर 10-15 साल की अवधि में सोने से बेहतर लाभ कमाया जा सकता है। हालांकि इस निवेश का एक नुकसान यह भी है कि बेचते समय आपको पूंजीगत अर्जित लाभ पर कर का भी भुगतान करना होगा, जो कि अनिवार्य है। फिर भी, यह एक संतोषजनक निवेश विकल्प समझा जाता है।

# बच्चों की शिक्षा व रोजगार के लिए अपनाएं इक्विटी म्यूचुअल फंड

अपने बच्चों की भावी जरूरतों को पूरा करने के लिए इक्विटी म्यूचुअल फंड एक और समीचीन विकल्प है, जहां पर आप अपने न्यूनतम निवेश से भी अच्छा पैसा बना सकते हैं। दरअसल, ये म्यूचुअल फंड लंबी अवधि में मिलने वाले मुनाफे के मामले में अपनी उपयोगिता पहले भी सिद्ध कर चुके हैं और आगे भी किसी को नाउम्मीद नहीं होने देंगे, ऐसी आशा है। देखा गया है कि कई इक्विटी म्युचुअल फंड बैंक में जमा राशि से प्राप्त होने वाले लाभ से कहीं अधिक मुनाफा देते हैं। इसलिए यदि आप एक लंबी अवधि के निवेशक हैं तो बेशक इनसे आपको अलग तरह का ही लाभ मिलेगा। यदि आप अपने बच्चों की शिक्षा या ऐसी अन्य योजनाओं में भी बचत करना चाहते हैं तो यह सबसे सफल और कारगर उपाय है जिसका कोई भी लाभ उठा सकता है।

# दीर्घ अवधि में लाभ के लिए अपनाएं डेब्ट म्यूचुअल फंड

आम तौर पर देखा जाता है कि कुछ ऋण म्यूचुअल फंड बैंक में जमा राशि की तुलना में ज्यादा लाभ देते हैं। इसके अलावा, ये म्यूचुअल फण्ड कर लाभ भी देते हैं जो उन्हें बैंक में जमा राशि की तुलना में आकर्षक और बेहतर विकल्प बनाता है। यह बात दीगर है कि अगर आप अपने बच्चे के लिए निवेश की योजना बना रहे हैं तो किसी भी विकल्प का सुरक्षित होना सबसे अधिक महत्वपूर्ण है। यही वजह है कि ऐसा विकल्प तभी चुनें, जब आप एक लंबी अवधि के लिए निवेश की योजना बना रहे हैं। क्योंकि इनमें बेहतर मुनाफा प्रायः एक लम्बी अवधि के बाद ही मिलता है। इसलिए इन योजनाओं में निवेश करने से पहले आपको किसी सफल पेशेवर व्यक्ति से सलाह कर लेनी चाहिए, क्योंकि ये निवेश थोड़ा जोख़िम भरा भी हो सकता है।

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# अपने बैंक की जमा राशि से मत पालें अधिक उम्मीदें

अमूमन बैंक में जमा राशि आपकी किसी भी निवेश योजना का अंतिम दांव होना चाहिए, क्योंकि यह विकल्प सबसे कम ब्याज दर देता है। जैसे, यदि आप फिलवक्त इसमें निवेश करते हैं तो अगले दस वर्षों तक आपको केवल सात फीसदी की दर से ही ब्याज मिलेगा। इसके अतिरिक्त, एक बार यदि आप इसमें निवेश कर देते हैं और ब्याज दरों में वृद्धि हो जाती है तो जब भी आप बीच की अवधि में इस रकम को निकालकर दूसरी जगह जमा करेंगे जहां ब्याज दर ज्यादा है, तो इसमें आपका काफी नुकसान हो सकता है। ऐसा इसलिए कि बैंकों से पूर्व परिपक्व राशि निकालने पर भी कुछ भुगतान करना होता है। गौरतलब है कि वहां अपनी जमा राशि पर आपको कर भुगतान करना होगा और यदि आप पहले से ही कर अदा कर रहे हैं तो यह आपका कर दायित्व कम कर सकता है। इसलिए सोच-विचार के अपने आर्थिक फैसले करें।

# एक निश्चित रिटर्न्स के लिए अपनी रकम यहां करें निवेश

साफ तौर पर देखा जाए तो बच्चों के लिए सबसे बेस्ट सेविंग प्लान पीपीएफ और सुकन्या समृद्धि योजनाएं हैं। क्योंकि ये न केवल अच्छा ब्याज देते हैं बल्कि इनसे मिलने वाला मुनाफा भी कर मुक्त होता है। चूंकि सुकन्या समृद्धि योजना लड़कियों के लिए है, इसलिए आप पीपीएफ योजना के सहारे अपने लड़के के भविष्य के लिए कुछ अतिरिक्त धन जुटा सकते हैं। ऐसा यदि आप नियमित और चरणबद्ध रूप से करेंगे तो आपके बच्चों का भविष्य बेहतर होगा जिससे आपको यश मिलेगा और हर तरह के वैभव की प्राप्ति होगी। इससे आपका अभिभावक बनना भी सफल समझा जाएगा।

कमलेश पांडेय

वरिष्ठ पत्रकार व स्तम्भकार







डिजिटल मीडिया पर सरकार की नई गाइडलाइंस को आसान भाषा में समझें

  •  मिथिलेश कुमार सिंह
  •  मार्च 4, 2021   17:35
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डिजिटल मीडिया पर सरकार की नई गाइडलाइंस को आसान भाषा में समझें

यहाँ तक कि सरकार से बातचीत के दौरान ही ट्विटर द्वारा इस पर एक ब्लॉग लिख दिया गया, जिसके बाद सरकार नाराज नजर आई, और उसकी नाराजगी तब खुलकर झलकी, जब कई सरकारी अकाउंट और बड़े लीडरों के अकाउंट कू ऐप पर नज़र आने लगे।

काफी समय तक विचार-विमर्श करने के बाद भारत सरकार ने आख़िरकार डिजिटल मीडिया को लेकर एक गाइडलाइन जारी कर दी है। बहुत समय से इस पर लोग सवाल उठा रहे थे कि जिस प्रकार से फिल्मों का कंटेंट देखने और उसकी गाइडलाइंस के लिए सेंसर बोर्ड है, उसी प्रकार इंटरनेट पर कंटेंट को भी फिल्टर और कटगराईज करने की आवश्यकता है।

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हाल ही में दो बड़ी घटनाएं हुईं और इन्हीं घटनाओं के मद्देनजर सरकार एक्शन में नजर आई है।

पहली घटना देश के बाहर से थी और अमेरिका में जिस प्रकार कैपिटल हिल पर ट्रंप समर्थक प्रदर्शनकारी चढ़ गए थे, उसे वैश्विक स्तर पर 'लोकतंत्र का काला धब्बा' माना गया, परंतु असली बात यह है कि तमाम बड़ी अमेरिकी कंपनियां जिनमें ट्विटर है, फेसबुक है, यूट्यूब है, वह सक्रिय भूमिका में इस तरह के कंटेंट को फिल्टर करती नजर आईं।

यहां तक कि खुद तत्कालीन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प तक का ट्विटर अकाउंट सस्पेंड कर दिया गया।

दूसरी घटना थी भारत में किसान आंदोलन के दौरान, लाल किले पर कुछ अराजक तत्वों के चढ़ने और अपना धार्मिक झंडा लहराने की। इसे लेकर भी बड़ी आलोचना हुई, किंतु सरकार के अनुसार जब उसने ट्विटर और कुछ अन्य प्लेटफार्म को इस घटना के मद्देनजर सपोर्ट करने वाले पोस्ट्स की निगरानी करने और उनके अकाउंट पर कार्रवाई करने के लिए कहा, तो यह कंपनियां टालमटोल करती नजर आईं।

यहाँ तक कि सरकार से बातचीत के दौरान ही ट्विटर द्वारा इस पर एक ब्लॉग लिख दिया गया, जिसके बाद सरकार नाराज नजर आई, और उसकी नाराजगी तब खुलकर झलकी, जब कई सरकारी अकाउंट और बड़े लीडरों के अकाउंट कू ऐप पर नज़र आने लगे।

बहरहाल, अब नई गाइडलाइंस आ गई हैं और नई गाइडलाइंस के साथ संभवतः इन्हीं चीजों को साधने की कोशिश की जा रही है। 

हाल-फिलहाल सरकार ने बड़ी सावधानी के साथ कदम बढ़ाया है, जिससे यह मैसेज ना जाए कि सरकार इंटरनेट पर, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर और विदेशी कंपनियों पर अंकुश रखना चाहती है। अपने वक्तव्य में केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने बार-बार यह कहा है कि सोशल मीडिया का सरकार वेलकम करती है, किंतु उनका नियमन जरूरी है, खासकर तब, जब इससे देश को खतरा हो।

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प्रश्न उठता है कि इंटरनेट कोई आज से तो चल नहीं रहा है!

लगभग 3 दशक से अधिक समय हो गया है और तमाम सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स भी 2 दशक से पूरी तरह से एक्टिव हैं, फिर आज तक इस के नियमन के प्रयास क्यों नहीं हुए?

अगर आप इसकी तह में जाएंगे, तो आपको पता चलेगा कि इसका नियमन बेहद कठिन है।

कंटेंट को देखने, कंटेंट को फिल्टर करने, उसे कटगराईज करने और उसे आगे बढ़ाने या नहीं बढ़ाने का निर्णय लेने की प्रक्रिया बेहद जटिल होने वाली है, और इसी को लेकर हालिया गाइडलाइन्स पर इंडस्ट्री के रोनित राय ने भी सवाल उठाया है। 

चूंकि फिल्म इंडस्ट्री का सेंसर बोर्ड हर वक्त ही विवादित रहा है। 

किस सीन को काटना है, किसको नहीं काटना है, इसे लेकर हमेशा ही सवाल उठे हैं और क्रिएटिव इंडस्ट्री में इस तरह के सवाल उठना लाजमी भी हैं। ऐसे में प्रश्न उठता है कि जब ओटीटी के मुकाबले, नंबर्स में चंद फिल्मों को लेकर कभी एक आम राय नहीं बन सकी, तो इंटरनेट का असीमित कंटेंट, जिसमें तमाम विदेशी कंटेंट भी शामिल हैं, उसे लेकर किस प्रकार फिल्ट्रेशन होगी?

हालांकि यह प्रक्रिया की शुरुआत भर है और सरकार को इस बात को लेकर कहीं ना कहीं बधाई अवश्य ही देनी चाहिए कि सावधानी से ही सही, इसकी शुरुआत तो उसने की, पर हमें यह भी ध्यान रखना होगा कि यह किसी पतले तार पर सर्कस दिखाने के समान है।

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नियमन के चक्कर में कहीं हम क्रिएटिविटी का गला ही न घोंट दें!

नियमन के चक्कर में कहीं हम इन ओपन स्थानों / संस्थानों पर इतना अंकुश न लगा दें कि निवेश, टेक्नोलॉजी और बड़ी इनोवेटिव कंपनियां ही हमारे देश में आने से कतराने लगें।

हमें यह भी ध्यान रखना होगा कि तमाम न्यूज पोर्टल, तमाम यूट्यूब वीडियो चैनल सरकार के खिलाफ अपनी बातें करते हैं और सरकार कहीं विरोध को दबाने के लिए हालिया नियमों का सहारा न लेने लगे।

हम सभी जानते ही हैं कि ट्रेडिशनल मीडिया पर सरकार का घोषित- अघोषित, किस स्तर तक का दबाव रहता है।

अब जब सरकार डिजिटल मीडिया के लिए नियम ला रही है और कानून बनाने की बात हो रही है, तो अपने विरोध में सक्रिय किसी यूट्यूब चैनल या सोशल मीडिया अकाउंट को सरकार बंद करने के लिए ना कहने लगे। उसके अधिकारी हालिया नियमों और आने वाले डिजिटल मीडिया सम्बंधित कानून का दुरुपयोग ना करने लगें, इसका भी हमें खास ध्यान रखना होगा।

हालांकि अभी बहुत बारीकी से बात कही गई है, किंतु भविष्य को लेकर हमें सजग रहना ही होगा।

- मिथिलेश कुमार सिंह







जानिए क्या है किसान उत्पादन व्यापार और वाणिज्य अधिनियम, 2020

  •  जे. पी. शुक्ला
  •  मार्च 1, 2021   16:54
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जानिए क्या है किसान उत्पादन व्यापार और वाणिज्य अधिनियम, 2020

कृषि न केवल देश की खाद्य सुरक्षा आवश्यकताओं को ही पूरा करती है, बल्कि कृषि-उद्योग को कच्चा माल भी प्रदान करती है, जिससे निर्यात के माध्यम से विदेशी मुद्रा भी अर्जित होती है और रोजगार भी पैदा होते हैं।

सरकार ने किसानों को उनकी उपज की बिक्री पर प्रतिबंधों से मुक्त करने और व्यापारियों के एकाधिकार को समाप्त करने के लिए कृषि सुधारों की शुरुआत की है। इसने किसानों को निर्यातकों और खुदरा विक्रेताओं जैसे बड़े खरीदारों के साथ सौदे करने की अनुमति देकर निजी पूंजी के लिए भी खिड़की खोल दी है। इसके द्वारा इस क्षेत्र को उत्प्रेरित करने, आवश्यक निजी निवेश लाने और ग्रामीण आय को बढ़ावा देने की उम्मीद की जा रही है।

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किसान उत्पादन व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सुविधा) अधिनियम, 2020 का उद्देश्य

- इस अधिनियम का उद्देश्य एक पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण करना है, जहां किसान और व्यापारी को किसान की उपज की बिक्री और खरीद से संबंधित विकल्प की स्वतंत्रता होती है, जो प्रतिस्पर्धी व्यापारिक चैनलों के माध्यम से पारिश्रमिक कीमतों की सुविधा देता है।

- किसान की उपज को राज्य के अंदर और राज्य के बाहर और विभिन्न राज्यों के कृषि उपज मंडी विधानों के तहत अधिसूचित बाजारों के परिसरों या डीम्ड बाजारों के बाहर कुशल, पारदर्शी और बाधा रहित व्यापार और वाणिज्य को बढ़ावा देना है।

- इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग के लिए और आकस्मिक मामलों के लिए एक सुविधाजनक ढांचा प्रदान करना है।

कानून की मूलभूत विशेषताएं इस प्रकार हैं:

किसान की उपज की बिक्री के लिए स्वतंत्रता 

बिचौलियों को खत्म करते हुए, यह कानून किसानों को थोक विक्रेताओं, खुदरा विक्रेताओं, अंतिम-उपयोगकर्ताओं, मूल्य-वर्धक, निर्माताओं, निर्यातकों, आदि (जिनके पास स्थायी खाता संख्या (पैन) या सरकार द्वारा अधिसूचित दस्तावेज है) अपनी उपज (कच्चे कपास और पशुओं के चारे के अलावा पशुधन, पोल्ट्री, और मानव उपभोग के लिए डेरी प्रोडक्ट्स) स्वतंत्र रूप से कृषि उपज बाजार समिति (APMC) के विकल्प के रूप में बेचने का अधिकार देता है और न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर प्रतिस्पर्धी कीमतों को लाता है।

न तो पंजीकरण और न ही शुल्क 

किसानों को व्यापार क्षेत्र में अपनी उपज बेचने के लिए कहीं भी पंजीकरण करने की आवश्यकता नहीं है। और कोई कमीशन, बाजार शुल्क या उपकर या लेवी, किसी भी राज्य के कानून के तहत किसी भी किसान या व्यापारी से, यहां तक कि इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग और लेन-देन प्लेटफॉर्म के माध्यम से होने पर भी कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा। इसके अलावा, किसानों को फसल के बाद के नुकसान को कम करने के साथ, जिससे उनकी परिवहन लागत कम हो, अपनी उपज को दूर के बाजारों में नहीं ले जाना होगा।

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ई-प्लेटफ़ॉर्म पर फेयर ट्रेड प्रैक्टिसेज 

इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और इंटरनेट, जिसमें 'उचित व्यापार प्रथाओं' के दिशानिर्देशों का अनुपालन होता है (जैसे कि व्यापार का तरीका, शुल्क, तकनीकी पैरामीटर, रसद व्यवस्था, गुणवत्ता मूल्यांकन, समय पर भुगतान, आदि) आत्मविश्वास पैदा करता है और समय की बचत के साथ एक सहज पारदर्शी व्यापार सुनिश्चित करता है। सार्वजनिक हित में, सरकार लेन-देन और नियमों के तौर-तरीकों वाले व्यापारियों के लिए इलेक्ट्रॉनिक पंजीकरण की प्रणाली भी निर्धारित कर सकती है।

भुगतान 

किसानों के साथ लेन-देन करने वाले व्यापारियों को, यदि प्रक्रियात्मक रूप से आवश्यक हो, उसी दिन या अधिकतम तीन कार्य दिवसों के भीतर भुगतान करने की आवश्यकता होती है।  केंद्र सरकार किसान हित में 'मूल्य सूचना और बाजार प्रसार प्रणाली' विकसित करने के अलावा भुगतान की प्रक्रिया भी निर्धारित कर सकती है।

समयबद्ध विवाद निपटान 

किसान और व्यापारी, उप-मंडल मजिस्ट्रेट (एसडीएम) के तत्वावधान में एक सौहार्दपूर्ण वातावरण में कॉंसिलिएशन बोर्ड (जिसमें दोनों पक्षों के समान प्रतिनिधि हों) के माध्यम से 30 दिनों के भीतर अपने विवादों का निपटारा कर सकते हैं। यदि बोर्ड द्वारा 30 दिनों के बाद विवाद अनसुलझा रहता है तो एसडीएम आवेदन प्राप्त होने के 30 दिनों के भीतर उसका निपटारा करेगा। पीड़ित पक्ष को 30 दिनों में निपटान के लिए कलेक्टर / अपर कलेक्टर से अपील करने का अधिकार रहता है।

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जुर्माना 

कोई भी व्यक्ति, जो किसान के साथ ई-प्लेटफॉर्म पर व्यापार कर रहा है, जो कानून के प्रावधानों का उल्लंघन करता है, उसे दंड के रूप में, जो पचास हजार रुपये से कम नहीं होगा, भुगतान करना होगा, जो दस लाख रुपये तक भी बढ़ सकता है। इस प्रकार किसान का हित सुरक्षित है।

कृषि न केवल देश की खाद्य सुरक्षा आवश्यकताओं को ही पूरा करती है, बल्कि कृषि-उद्योग को कच्चा माल भी प्रदान करती है, जिससे निर्यात के माध्यम से विदेशी मुद्रा भी अर्जित होती है और रोजगार भी पैदा होते हैं।

इस तरह किसानों को बाजारों से जोड़ने वाला यह कानून किसी भी तरह से एपीएमसी या एमएसपी खरीद को अस्थिर नहीं करता है; मौजूदा प्रणाली बिना किसी बदलाव के पहले की तरह ही काम करती रहेगी।

- जे. पी. शुक्ला







दुर्घटना हुई है तो मोटर वाहन अधिनियम के यह प्रावधान करेंगे आपकी मदद

  •  जे. पी. शुक्ला
  •  फरवरी 26, 2021   17:26
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दुर्घटना हुई है तो मोटर वाहन अधिनियम के यह प्रावधान करेंगे आपकी मदद

यह अधिनियम मोटर वाहनों के चालकों के लाइसेंस, मोटर वाहनों के पंजीकरण, यातायात पर नियंत्रण, मोटर वाहनों के बीमा और मोटर वाहनों से जुडी दुर्घटनाओं के पीड़ितों को मुआवजे के लिए क्लेम ट्रिब्यूनल की स्थापना के लिए प्रावधान करता है।

मृत्यु के मामले में हर्जाने का दावा करने के अधिकार को आम कानून के तहत वर्ष 1846 की शुरुआत में मान्यता मिली थी। आगे कानून विकसित हुआ और भारत में घातक दुर्घटना अधिनियम, 1855 लागू हुआ। इसके बाद मोटर वाहन अधिनियम, 1939 को विशेष रूप से मोटर वाहन से होने वाली दुर्घटनाओं से निपटने के लिए लागू किया गया था। इसके बाद, मोटर वाहन अधिनियम, 1988 को मोटर वाहनों से होने वाली दुर्घटनाओं से संबंधित कानून को मजबूत करने और संशोधित करने के लिए लागू किया गया था।

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मोटर वाहन अधिनियम का उद्देश्य

यह अधिनियम मोटर वाहनों के चालकों के लाइसेंस, मोटर वाहनों के पंजीकरण, यातायात पर नियंत्रण, मोटर वाहनों के बीमा और मोटर वाहनों से जुडी दुर्घटनाओं के पीड़ितों को मुआवजे के लिए क्लेम ट्रिब्यूनल की स्थापना के लिए प्रावधान करता है। सड़क दुर्घटना में किसी व्यक्ति की मृत्यु या शारीरिक चोट से संबंधित मामले की जांच करने वाले पुलिस अधिकारी को 3 महीने के भीतर क्लेम ट्रिब्यूनल को आवश्यक प्रारूप में (धारा 159) रिपोर्ट प्रस्तुत करना अनिवार्य होता है।

मोटर वाहन अधिनियम, 1988 को निम्नलिखित उद्देश्यों को ध्यान में रखते हुए अधिनियमित किया गया है:

- देश में वाणिज्यिक वाहनों और व्यक्तिगत वाहनों दोनों की तेजी से बढ़ती संख्या का ध्यान रखना

- सड़क सुरक्षा मानकों और प्रदूषण नियंत्रण उपायों के लिए खतरनाक और विस्फोटक पदार्थों के परिवहन के लिए मानक

- यातायात अपराधियों पर नज़र रखने के प्रभावी तरीकों की आवश्यकता

- ड्राइविंग लाइसेंस प्रदान करने और इसकी वैधता की अवधि से संबंधित कड़ी प्रक्रियाएं

- सामान्य बीमा निगम द्वारा सोलाटियम योजना 

- "नो फॉल्ट लायबिलिटी" के मामलों में त्वरित मुआवजे के लिए और “हिट एंड रन” मोटर दुर्घटनाओं के लिए प्रावधान 

- मोटर दुर्घटनाओं के पीड़ितों को  बीमाकर्ता द्वारा मुआवजे के वास्तविक भुगतान का प्रावधान चाहे किसी भी तरह की व्हीकल हो

- बिना लंबी प्रक्रिया के सड़क दुर्घटनाओं के पीड़ितों को पर्याप्त मुआवजा प्रदान करना

- यातायात अपराधियों के लिए दंड को बढ़ाना

- हिट एंड रन मामलों के पीड़ितों के मुआवजे की राशि में वृद्धि

- सड़क दुर्घटना पीड़ितों द्वारा मुआवजे के लिए आवेदन भरने के लिए समय सीमा को हटाना

- कुछ  मामले में अपराधों की सजा को सख्त बनाना

- सड़क दुर्घटना पीड़ितों को उम्र / आय के आधार पर मुआवजे के भुगतान के लिए फॉर्मूला बनाना, जो अधिक उदार और तर्कसंगत हो

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मुआवजे के अनुदान के लिए आवेदन कैसे करें?

क्षतिपूर्ति के लिए आवेदन, मोटर वाहन अधिनियम की धारा 166 के तहत 10 रुपये के कोर्ट-शुल्क टिकटों के रूप में किया जाता है।

मुआवजे के अनुदान की मांग करने वाले क्लेमेंट के आवेदन के लिए निम्नलिखित विवरण दिए जाने चाहिए:

1. घायल / मृत व्यक्ति का नाम और पिता का नाम (विवाहित महिला और विधवा के मामले में पति का नाम)

2. घायल / मृत व्यक्ति का पूरा पता

3. घायल / मृत व्यक्ति की आयु और उसका व्यवसाय

4. बीमाधारक / मृतकों के एम्प्लायर का नाम पता, यदि कोई हो

5. घायल / मृत व्यक्ति की मासिक आय

6. वह व्यक्ति जिसके मुआवजे का दावा किया गया हो, वह आयकर का भुगतान करता है या नहीं

7. दुर्घटना की जगह, तारीख और समय

8. उस पुलिस स्टेशन का नाम और पता जिसके अधिकार क्षेत्र में दुर्घटना हुई या पंजीकृत किया गया था

सीमा अवधि

क्षतिपूर्ति के लिए कोई भी आवेदन तब तक अटेंड नहीं किया जाएगा जब तक कि वह दुर्घटना की घटना के छह महीने के भीतर नहीं किया जाता है।

मुआवजे के लिए आवेदन कहाँ दायर करें?

- उस क्लेम ट्रिब्यूनल के अधिकार क्षेत्र में जिसमें दुर्घटना हुई

- क्लेम ट्रिब्यूनल के स्थानीय सीमा के भीतर जिसके अधिकार क्षेत्र में दावेदार निवास करता है या व्यवसाय करता है

- जिनके अधिकार क्षेत्र की स्थानीय सीमा के भीतर प्रतिवादी रहता है

मोटर वाहन अधिनियम के तहत दंडात्मक प्रावधान

मोटर वाहन अधिनियम, 1988 के अंतर्गत दंडात्मक प्रावधान होते हैं, जिसमें उल्लंघन करने वालों पर सजा या जुर्माना या दोनों लगाया जाता है। यहां तक कि आपराधिक कानून भी होते हैं, जब वाहन चालक की लापरवाही से कोई दुर्घटना का शिकार हो जाता है, जिससे पीड़ित की मौत हो जाती है।

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मोटर वाहन अधिनियम जनता के लिए विभिन्न नियम और विनियम प्रदान करता है और ऑटोमोबाइल उद्योग में प्रगति के कारण हमारे समाज में इसका व्यापक महत्व भी है। यदि अधिनियम के किसी भी नियम का उल्लंघन किया जाता है तो अपराधी को गंभीर दंड भी दिया जाता है। 

मृत्यु / स्थायी विकलांगता के मामले में देय एकमुश्त मुआवजे का भुगतान

मोटर दुर्घटना का शिकार या उसके कानूनी उत्तराधिकारी, निम्नलिखित राशियों के एकमुश्त मुआवजे का दावा कर सकते हैं (धारा 164):

(i)  मृत्यु के मामले में रु 5 लाख

(ii) गंभीर चोट के मामले में रु 2.5 लाख

इस अधिनियम में हिट एंड रन मोटर दुर्घटना के मामले में  मृत्यु के मामले में रु. 2 लाख और गंभीर चोट के मामले में रु 50,000 के मुआवजे की निश्चित राशि के भुगतान का प्रावधान है।

मुआवजे की राशि मृतक के कानूनी उत्तराधिकारियों के बीच उनकी निकटता के आधार पर वितरित की जाती है। यह प्रत्येक मामले के तथ्यों और परिस्थितियों के आधार पर अदालत द्वारा किया जाता है।

- जे. पी. शुक्ला







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