संपत्ति पर अवैध कब्ज़ा हो जाए तो जानिए क्या है कानूनी उपाय

संपत्ति पर अवैध कब्ज़ा हो जाए तो जानिए क्या है कानूनी उपाय

यदि कोई व्यक्ति, जो किसी संपत्ति का कानूनी मालिक नहीं है, मालिक की सहमति के बिना उस पर कब्जा कर लेता है तो यह संपत्ति का अवैध कब्जा माना जाएगा। जब तक अधिभोगी के पास परिसर का उपयोग करने के लिए स्वामी की अनुमति है तब तक इसकी कानूनी वैधता होगी।

भारत में भूमि से संबंधित कई मामले में अवैध संपत्ति के कब्जे से संबंधित मामले काफी बड़ी संख्या में हैं। संपत्ति के विशाल मूल्य के कारण वे अक्सर बेईमान व्यक्तियों द्वारा गैरकानूनी कब्जे के अधीन हो जाते हैं। संपत्ति पर अपने गलत स्वामित्व को साबित करने के लिए ऐसे लोग कानूनी दस्तावेजों की जाली बनाने का भी सहारा लेते हैं। फ्लैट और भूखंड अधिक संवेदनशील होते हैं, क्योंकि इनमें अवैध कब्जे के लिए काफी  गुंजाइश होती है।

संपत्ति विवाद तब उत्पन्न होते हैं जब एक ही संपत्ति के संबंध में दो या दो से अधिक पक्षों के बीच स्वामित्व को लेकर टकराव होता है। ऐसे संघर्ष को हल करने के लिए पहले कदम के रूप में पार्टियां बिना किसी वकील के मुद्दे को स्वयं हल करने का प्रयास करती हैं, लेकिन अगर इस मुद्दे को अनसुलझा छोड़ दिया जाता है तो पीड़ित पक्ष हमेशा दूसरे पक्ष के खिलाफ मामला दर्ज कर सकता है और न्याय पाने के लिए अदालती कार्यवाही के साथ आगे बढ़ सकता है।

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किसी संपत्ति का अवैध कब्जा क्या होता है?

यदि कोई व्यक्ति, जो किसी संपत्ति का कानूनी मालिक नहीं है, मालिक की सहमति के बिना उस पर कब्जा कर लेता है तो यह संपत्ति का अवैध कब्जा माना जाएगा। जब तक अधिभोगी के पास परिसर का उपयोग करने के लिए स्वामी की अनुमति है तब तक इसकी कानूनी वैधता होगी। यही कारण है कि लीज और लाइसेंस समझौतों के तहत किरायेदारों को किराए पर संपत्ति की पेशकश की जाती है, जिसके तहत मकान मालिक किरायेदार को एक विशिष्ट समय अवधि के लिए अपनी संपत्ति का उपयोग करने के लिए सीमित अधिकार प्रदान करता है। इस समय सीमा के बाद परिसर में रहना किरायेदार द्वारा संपत्ति का अवैध कब्जा माना जाएगा।

हालांकि सबसे बुरी बात यह है कि अगर किरायेदार 12 साल से अधिक की अवधि के लिए संपत्ति पर कब्जा करना जारी रखता है तो कानून भी उसे अवैध कब्जा जारी रखने में सक्षम बना देता है। इसे कानूनी भाषा में प्रतिकूल कब्जे के रूप में जाना जाता है। अगर कोई मालिक 12 साल तक अपनी संपत्ति पर अपना दावा नहीं करता है, तो एक स्क्वैटर यानि अनाधिकार कब्ज़ा करने वाला व्यक्ति संपत्ति पर कानूनी अधिकार हासिल कर सकता है। प्रतिकूल कब्जे पर प्रावधान लिमिटेशन एक्ट, 1963 के तहत किए गए हैं।

आम तौर पर,अवैध कब्जा 2 तरीकों से किया जाता है- 

1. जब गुंडे या बदमाश लोग झूठे दस्तावेज बनाते हैं और बल प्रयोग द्वारा अवैध रूप से संपत्ति पर कब्जा करते हैं। यह दुर्भावनापूर्ण प्रथा काफी सामान्य है क्योंकि कुछ लोग इसे अपना पेशा मानते हैं। इसके अलावा कभी-कभी कुछ स्थानीय अधिकारी भी इन गुंडों को ऐसी दुर्भावनापूर्ण कार्यों में मदद करते हैं।

2. ऐसा अवैध कब्जा तब भी हो सकता है जब कोई किरायेदार आपकी संपत्ति खाली नहीं करता है। किरायेदारों द्वारा इस्तेमाल किया जाने वाला सबसे अच्छा बचाव प्रतिकूल कब्जे का है। यह सलाह दी जाती है कि अपने आवास को किराए पर देने से पहले एक उचित रेंट एग्रीमेंट तैयार करें और साथ ही ऐसी स्थितियों में शामिल होने से बचने के लिए कड़े उपाय भी करें। ये स्थितियां ज्यादातर तब उत्पन्न होती हैं जब अवैध रूप से कब्जा की गई संपत्तियों को कार्यवाहक, किरायेदारों द्वारा अनिर्दिष्ट स्थिति के साथ छोड़ दिया जाता है या ऐसी संपत्तियां जो वर्षों से छोड़ी गई हैं जो सीधे उन्हें ऐसे कुख्यात लोगों के लिए एक आसान लक्ष्य बनाती हैं।

प्रतिकूल कब्जा तब होता है जब किसी संपत्ति के मालिक को उसकी संपत्ति से एक वैधानिक समय अवधि के भीतर एक अधिभोगी से छुटकारा पाने के लिए उसकी ओर से गैर-हस्तक्षेप के परिणामस्वरूप स्वामित्व के अपने अधिकारों से वंचित किया जाता है। भारतीय कानून के तहत वैधानिक अवधि 12 वर्ष होती है। अधिभोगी को बेदखल करने के लिए इस सीमा अवधि के पूरा होने के बाद सही मालिक को अपनी संपत्ति का कब्जा वापस पाने के लिए कोई कानूनी कार्यवाही करने से प्रतिबंधित कर दिया जाता है और इस प्रकार कब्जेदार को प्रतिकूल कब्जे से प्रॉपर्टी की टाइटल प्राप्त करने की अनुमति देता है।

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संपत्ति के अवैध कब्जे के खिलाफ कानूनी कार्रवाई

जो लोग एक अवैध गतिविधि के शिकार हो गए हैं वे भारतीय कानून के विभिन्न प्रावधानों के तहत राहत की मांग कर सकते हैं। आप एक वकील भी हायर कर सकते है जो ऐसे सभी मामलों से निपटने के लिए अदालत में पूर्ण समर्थन, क्षमता और दक्षता के साथ-साथ कानूनी प्रतिनिधित्व में स्पष्टता प्रदान कर सकता है।  तो आइये जानते हैं कुछ महत्वपूर्ण टिप्स- 

- सबसे पहले आपको शहर के पुलिस अधीक्षक (एसपी), जहां आपकी संपत्ति स्थित है, के पास एक लिखित शिकायत दर्ज करनी चाहिए। यदि एसपी शिकायत को स्वीकार करने में विफल रहता है तो संबंधित अदालत में व्यक्तिगत शिकायत दर्ज की जा सकती है।

- आप इसके बारे में पुलिस में शिकायत भी दर्ज करा सकते हैं। फ्यूचर रिफरेन्स के लिए एफआईआर की एक प्रति अपने पास सुरक्षित रखें। सम्बंधित अधिकारी दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 145 के तहत कार्रवाई करने के लिए बाध्य होंगे।

- आप विशिष्ट राहत अधिनियम की धारा 5 और 6 के तहत राहत की मांग कर सकते हैं, जिसके तहत अपनी संपत्ति से बेदखल किया गया व्यक्ति पिछले कब्जे और बाद में अवैध कब्जा साबित करके अपना अधिकार वापस ले सकता है।

उत्तर प्रदेश राज्य ने एक भू-माफिया विरोधी कार्य बल की स्थापना की है। कोई भी व्यक्ति वेबसाइट http://jansunwai.up.nic.in/ABMP.html पर अपनी शिकायत दर्ज करा सकता है। 

- जे. पी. शुक्ला