श्रावण पुत्रदा एकादशी व्रत करने से होती है संतान प्राप्ति

श्रावण पुत्रदा एकादशी व्रत करने से होती है संतान प्राप्ति

अपनी श्रद्धा तथा शारीरिक क्षमता के अनुसार भक्त श्रावण पुत्रदा एकादशी व्रत को निर्जला, रसाहार तथा फलाहर ग्रहण रहते हैं। एकादशी व्रत के दौरान आप दशमी तिथि से व्रत का पालन करना प्रारम्भ कर दे। दशमी की शाम को हल्का तथा सात्विक भोजन ग्रहण करें।

सावन के पवित्र महीने में पड़ने वाली श्रावण पुत्रदा एकादशी का खास महत्व होता है। संतान से जुड़ी किसी भी प्रकार की समस्या को समाप्त करने में श्रावण पुत्रदा एकादशी विशेष लाभकारी होती है, तो आइए श्रावण पुत्रदा एकादशी के व्रत तथा महत्व की चर्चा करते हैं। 

जानें श्रावण पुत्रदा एकादशी के बारे में 

श्रावण मास के शुक्ल पक्ष के दिन आने वाली एकादशी को श्रावण पुत्रदा एकादशी कहा जाता है। हिन्दू धर्म में एक साल में 24 एकादशी के व्रत पड़ते हैं। सभी चौबीस एकादशी में पुत्रदा एकादशी का विशेष महत्व होता है। पुत्रदा एकादशी साल में दो बार पड़ती है एक बार श्रावण मास में तथा दूसरी पुत्रदा एकादशी का व्रत पौष महीने में होती है। सावन के पवित्र महीने में आने के कारण यह एकादशी बहुत खास होती है। इस व्रत में श्री हरि विष्णु की पूजा होती है। इस साल श्रावण पुत्रदा एकादशी का व्रत 30 जुलाई को पड़ रहा है।

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श्रावण पुत्रदा एकादशी पर ऐसे करें पूजा 

अपनी श्रद्धा तथा शारीरिक क्षमता के अनुसार भक्त श्रावण पुत्रदा एकादशी व्रत को निर्जला, रसाहार तथा फलाहर ग्रहण रहते हैं। एकादशी व्रत के दौरान आप दशमी तिथि से व्रत का पालन करना प्रारम्भ कर दे। दशमी की शाम को हल्का तथा सात्विक भोजन ग्रहण करें। श्रावण पुत्रदा एकदशी के दिन प्रातः जल्दी उठकर सुबह स्नानादि करके भगवान के समक्ष व्रत का संकल्प लें। उसके बाद भगवान विष्णु की पूजा करें। साथ ही एकदशी तिथि के पूरी रात जाग कर भजन-कीर्तन करें और प्रभु का ध्यान धरें। 

साथ ही द्वादशी तिथि को सूर्योदय के समय शुभ मुहूर्त में भगवान विष्णु पूजा करके किसी भूखे व्यक्ति या ब्राह्मणों को भोजन कराएं और यथाशक्ति दक्षिणा दें। उसके बाद भगवान का ध्यान कर अपनी गलतियों की क्षमा मांग कर व्रत का पारण करें। व्रत में ब्रह्मचर्य के नियमों का पालन भी जरूर करें।

श्रावण पुत्रदा एकादशी का महत्व 

एकादशी के व्रत को सभी व्रतों में श्रेष्ठ माना जाता है। श्रावण पुत्रदा एकादशी का महत्व के विषय में भगवान श्रीकृष्ण ने युधिष्टिर और अर्जुन को बताया था। इस व्रत को करने से पापों से मुक्ति प्राप्त होती है तथा घर में सुख-समृद्धि आती है। पुत्रदा एकादशी व्रत करने वाजपेयी यज्ञ करने के बराबर फल मिलता है तथा संतान दीर्घायु होती है। इसके अलावा इस व्रत को करने गौदान के समान फल की प्राप्ति होती है।

श्रावण पुत्रदा एकादशी का मुहूर्त

एकादशी तिथि शुरू हो रही है: जुलाई 30, 2020 को 01:16 AM

एकादशी तिथि खत्म हो रही है: जुलाई 30, 2020 को 11:49 PM

श्रावण पुत्रदा एकादशी व्रत का पारण समय: 05:42 AM से 08:24 PM

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श्रावण पुत्रदा एकादशी व्रत से जुड़ी पौराणिक कथा

पुत्रदा एकादशी से जुड़ी कथा के अनुसार द्वापर युग में महिष्मती पुरी में एक राजा एक थे जो बहुत शांत तथा धार्मिक प्रवृत्ति के थे। लेकिन वह निःसंतान थे। राजा को महामुनि लोमेश ने बताया कि राजा अपने पिछले जन्म में एक क्रूर और दरिद्र व्यापारी (वैश्य) थे। पुत्रदा एकादशी के दिन गर्मी की चिलचिलाती दोपहर में एक गाय पानी पी रही थी लेकिन व्यापारी ने उसे पानी पीने से रोक दिया और खुद पानी पी लिया। राजा का पिछले जन्म का यह कृत्य धर्म के अनुसार ठीक नहीं था। लेकिन पिछले जन्म में अपने अच्छे कर्मों के कारण वह इस जीवन में राजा तो बन गया, लेकिन उस एक पाप के कारण अभी भी निःसंतान है।  महामुनि ने कहा कि अगर राजा और उनके सभी शुभचिंतक विधिपूर्वक व्रत का पालन करते हुए श्रावण पुत्रदा एकादशी का व्रत करें तो राजा को इसका लाभ मिलेगा। इस प्रकार, उनके निर्देशों महामुनि की आज्ञा मानकर राजा ने अपने लोगों के साथ यह व्रत किया और जल्द ही रानी को पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई। तब से, इस एकादशी को श्रावण पुत्रदा एकादशी कहा जाता है।

- प्रज्ञा पाण्डेय