अक्षय तृतीया के दिन से ही सतयुग की शुरूआत हुई थी

By प्रज्ञा पाण्डेय | Publish Date: Apr 18 2018 10:56AM
अक्षय तृतीया के दिन से ही सतयुग की शुरूआत हुई थी

अक्षय तृतीया को आखा तीज के नाम से जाना जाता है। यह एक ऐसा त्यौहार है जो पूरे देश में मनाया जाता है। अक्षय तृतीया के दिन सौभाग्य वृद्धि के लिए अनेक प्रकार के कार्य किए जाते हैं। तो आइए अक्षय तृतीया की महत्ता के बारे में चर्चा करते हैं।

अक्षय तृतीया को आखा तीज के नाम से जाना जाता है। यह एक ऐसा त्यौहार है जो पूरे देश में मनाया जाता है। अक्षय तृतीया के दिन सौभाग्य वृद्धि के लिए अनेक प्रकार के कार्य किए जाते हैं। तो आइए अक्षय तृतीया की महत्ता के बारे में चर्चा करते हैं। 

अक्षय तृतीया है शुभ 
 
अक्षय तृतीया के दिन बहुत अच्छा मुहूर्त होता है। इस मुहूर्त को सर्व सिद्ध माना जाता है। इस दिन बिना हिन्दू पंचांग देखे किसी भी तरह के मांगलिक कार्य सम्पन्न कराए जा सकते हैं। इसलिए अक्षय तृतीया के दिन सगाई, विवाह, गृहप्रवेश, व्यवसाय का प्रारम्भ व्यापक स्तर पर किया जाता है।
 


आखा तीज के दिन दान की महत्ता 
 
अक्षय तृतीया के दिन दान करने से अक्षय फल मिलता है। ऐसा माना जाता है जो व्यक्ति इस दिन अपने सौभाग्य को दूसरे के साथ बांटता है उसे भगवान विशेष फल देते हैं। अक्षय तृतीया के दिन भीषण गर्मी रहती है इसलिए इस दिन जलदान का भी खास महत्व है। इसके अलावा इस दिन 14 प्रकार के वस्तुएं दान की जाती हैं। इनमें गुड़, तिल, सोना, चांदी, खरबूजा, शहद, नमक, मटकी, कन्या, तिल, भूमि और गौ दान करने से सौभाग्य बढ़ता है। 
 
अक्षय तृतीया को परशुराम जयंती 
 


वैशाख माह की शुक्ल पक्ष की तृतीया को आने वाली अक्षय तृतीया के दिन परशुराम जयंती भी मनायी जाती है। इस दिन परशुराम का जन्म हुआ था जिन्हें वीरता का अद्भुत उदाहरण माना जाता है। परशुराम जयंती को परशुराम की मूर्ति की पूजा कर उपवास रखा जाता है। परशुराम को भगवान विष्णु का छठवां अवतार माना जाता है। 
 
अक्षय तृतीया को सोना खरीदने से होता है भाग्योदय
 
जीवन में सोने को सौभाग्य और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि अक्षय तृतीया के दिन सोना खरीदने से साल भर तक घर में समृद्धि आएगी। इसलिए अक्षय तृतीया के दिन लोग सोना खरीदने को प्राथमिकता देते हैं। लेकिन अगर आप सोना नहीं खरीद सकते हैं तो बर्तन की खरीददारी कर सकते हैं। घर में बर्तन भी शुभ का परिचायक होता है। 


 
अक्खा तीज का पौराणिक महत्व 
 
अक्षय तृतीया के दिन ही सतयुग का प्रारम्भ हुआ था। ऐसा माना जाता है कि अक्षय तृतीया के दिन ही भगवान गणेश और महर्षि व्यास ने महाभारत लिखना प्रारम्भ किया था। अक्षय तृतीया के दिन ही भगवान श्रीकृष्ण ने पांडवों का अक्षय पात्र दान किया था। साथ ही श्रीकृष्ण ने अपने बाल्यकाल के मित्र सुदामा की गरीबी भी इस दिन खत्म की थी। 
 
अक्षय तृतीया का महत्व 
 
ऐसी मान्यता है कि अक्षय तृतीया अगर सोमवार के दिन और रोहिणी नक्षत्र में पड़े तो इस दिन दान का महत्व बढ़ जाता है। अक्षय तृतीया के दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करने से सौभाग्य में वृद्धि होती है। इस दिन घर की साफ-सफाई की जानी चाहिए जिससे जीवन में सौभाग्य का प्रवेश होता है। साथ ही इस दिन बड़े–बूढ़ों को अपशब्द न कहें इससे जीवन में बुरा प्रभाव पड़ता है। अक्षय तृतीया के दिन ही वृंदावन के बांके बिहारी मंदिर में श्री विग्रह के चरण दर्शन होते हैं। इसके अलावा पवित्र धार्मिक स्थल बद्रीनाथ के कपाट भी इस दिन खुलते हैं। 
 
प्रज्ञा पाण्डेय

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