इस सप्ताह के व्रत और त्योहारों में होली का पर्व है सबसे बड़ा

By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Publish Date: Mar 19 2019 7:10PM
इस सप्ताह के व्रत और त्योहारों में होली का पर्व है सबसे बड़ा
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आइए जानते हैं इस सप्ताह के व्रत और त्योहारों के बारे में। इन तिथियों को ध्यान में रखिये और विधि विधान से पूजन कर भगवान को प्रसन्न कीजिये।

आइए जानते हैं इस सप्ताह के व्रत और त्योहारों के बारे में। इन तिथियों को ध्यान में रखिये और विधि विधान से पूजन कर भगवान को प्रसन्न कीजिये। 
 
सोमवार- 18 मार्च- नरसिंह द्वादशी, प्रदोष व्रत
 


बुधवार-  20 मार्च- चौमासी चौदस, छोटी होली, होलिका दहन और पूर्णिमा उपवास (शास्त्रों के अनुसार भद्रा नक्षत्र में होलिका दहन पूर्णतया वर्जित है। यदि भद्रा नक्षत्र में होलिका दहन कर दिया तो पीड़ा उठानी पड़ सकती है। इस दिन पुरुषों को भी हनुमानजी और भगवान भैरवदेव की विशिष्ट पूजा अवश्य करनी चाहिए।)
गुरुवार- 21 मार्च- होली, वसन्त पूर्णिमा, दोल पूर्णिमा, अष्टाह्निका विधान पूर्ण, फाल्गुन पूर्णिमा, लक्ष्मी जयन्ती, चैतन्य महाप्रभु जयन्ती, वसन्त सम्पात, पैन्गुनी उथिरम। (वसंत ऋतु में मनाया जाने वाला महत्वपूर्ण त्योहार है होली। फाल्गुन मास की पूर्णिमा को पड़ने वाला रंगों का यह त्योहार सामाजिक भेदभाव को मिटाकर सबको गले मिलने का अवसर उपलब्ध कराता है। इस दिन हर वर्ग के लोग टोलियां बनाकर अपने घर से निकलते हैं और दूसरों के घर जाकर रंग लगाते हैं, मिठाई खाते, खिलाते हैं और एक दूसरे को शुभकामनाएं प्रदान करते हैं।)


 
शुक्रवार - 22 मार्च- चैत्र प्रारम्भ, भाई दूज, भ्रातृ द्वितीया और गुड फ्राइडे (गुड फ्राइडे को होली फ्राइडे, ब्लैक फ्राइडे या ग्रेट फ्राइडे भी कहते हैं। यह ईसाई धर्म के लोगों द्वारा कैलवरी में ईसा मसीह को सलीब पर चढ़ाने के कारण हुई मृत्यु के उपलक्ष्य में मनाया जाता है।) 
शनिवार- 23 मार्च- शिवाजी जयन्ती (छत्रपति शिवाजी महाराज ने 1674 में पश्चिम भारत में मराठा साम्राज्य की नींव रखी। उन्होंने कई वर्ष औरंगज़ेब के मुगल साम्राज्य से संघर्ष किया। सन 1674 में रायगढ़ में उनका राज्याभिषेक हुआ और छत्रपति बने।)
 
रविवार- 24 मार्च- संकष्टी चतुर्थी, (ईस्टर प्रत्येक चन्द्र मास में दो चतुर्थी होती हैं। पूर्णिमा के बाद आने वाली कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को संकष्टी चतुर्थी कहते हैं और अमावस्या के बाद आने वाली शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को विनायक चतुर्थी कहा जाता है।)

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