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व्रत त्योहार

विनायकी गणेश चतुर्थी व्रत करने से सभी मनोरथ हो जाएंगे पूरे

By प्रज्ञा पाण्डेय | Publish Date: Apr 19 2018 2:09PM

विनायकी गणेश चतुर्थी व्रत करने से सभी मनोरथ हो जाएंगे पूरे
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हर महीने की शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को विनायक चतुर्थी व्रत कहा जाता है। इस व्रत को करने से ऋद्धि-सिद्धि और समस्त सुख-सुविधाएं मिलती हैं। तो आइए विनायक गणेश चतुर्थी व्रत की महत्ता के बारे में चर्चा करते हैं।
 
गणेश जी का नाम विनायक होने के कारण इसे विनायकी चतुर्थी व्रत भी कहा जाता है। कई भक्त विनायकी चतुर्थी व्रत को वरद विनायक चतुर्थी के रूप में भी मनाते हैं। इस मौके पर श्री गणेश की पूजा दिन में दो बार की जाती है एक बार दोपहर में और एक बार मध्याह्न में। अगर विनायकी गणेश चतुर्थी का व्रत मंगलवार को पड़ता है तो उसे अंगारक गणेश चतुर्थी कहा जाता है। शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को विनायक चतुर्थी और कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को संकष्टी चतुर्थी कहा जाता है।  
 
गणेश चतुर्थी की पूजा विधि
 
गणेश चतुर्थी के दिन सुबह नित्य कार्य से निवृत्त होकर स्नान कर लाल वस्त्र धारण करें। इसके बाद गणेश की प्रतिमा की पूजा करें और मूर्ति पर सिंदूर लगाएं। इसके बाद श्री गणेश को लड्डू का भोग लगाएं और ब्राह्मणों को दान देकर ही भोजन ग्रहण करें।  
 
व्रत की पौराणिक कथा
 
एक बार शिवजी और माता पार्वती नदी किनारे समय व्यतीत कर रहे थे। तभी मां पार्वती ने उनसे चौपड़ खेलने को कहा। शिवजी ने चौपड़ खेलना शुरू किया लेकिन इस खेल में मुश्किल थी कि हार-जीत का फैसला कौन करेगा। इसके लिए शिवजी ने एक समाधान निकाला और घास-फूस से एक बालक बना कर उसमें प्राण प्रतिष्ठा कर दी। उससे उन्होंने पुतले से कहा कि हम चौपड़ खेलते हैं तुम हार-जीत का फैसला करना। 
 
उसके बाद शिव-पार्वती ने चौपड़ शुरू किया उसमें तीन बार माता पार्वती जीतीं। लेकिन जब पुतले से पूछा गया तो उसने कहा कि महादेव जीते। इस पर माता पार्वती बहुत क्रुद्ध हुईं और उन्होंने बालक को कीचड़ में पड़े रहने का श्राप दे दिया। इस पर वह बालक उनसे माफी मांगने लगा और बोला उसने जानबूझकर ऐसा नहीं किया। बालक के इस तरह माफी मांगने पर माता पार्वती ने कहा कि आज से एक साल बाद नागकन्याएं यहां आएंगी। उन नागकन्याओं के कहे अनुसार गणेश चतुर्थी का व्रत करने से तुम्हारे कष्ट दूर होंगे। इसके बाद उस बालक ने गणेश जी की उपासना की और भगवान गणेश प्रसन्न हो गए। प्रसन्न होकर उससे वर मांगने को कहा। बालक ने कहा हे भगवान मुझे इतनी ताकत दें कि मैं अपने माता-पिता को देखने कैलाश पर्वत जा सकूं। गणेश जी के आशीर्वाद से बालक कैलाश पर्वत पर पहुंच गया। साथ ही चौपड़ खेलने के बाद पार्वती जी शिव से रूठ गयी थीं उन्हें मनाने के लिए भगवान शिव ने भी 21 दिन तक गणेश व्रत किया और पार्वतीजी मान गयीं। इसके बाद माता पार्वती ने भी 21 दिन तक व्रत किया और अपने पुत्र कार्तिकेय से मिलना की इच्छा रखी। व्रत करने से उनकी यह इच्छा पूरी हो गयी। 
 
विनायकी गणेश चतुर्थी का फल
 
विनायकी गणेश चतुर्थी से सभी कार्य सिद्ध होते हैं। सभी मनुष्यों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं और समस्त सुख-सुविधाएं प्राप्त होती हैं। 
 
-प्रज्ञा पाण्डेय

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