क्रिकेट, अंधविश्वास और प्यार के ट्राएंगल पर बनी द जोया फैक्टर मनोरंजक लेकिन रियलिटी से दूर

क्रिकेट, अंधविश्वास और प्यार के ट्राएंगल पर बनी द जोया फैक्टर मनोरंजक लेकिन रियलिटी से दूर

लक कैसे धीरे-धीरे अंधविश्वास में तब्दील हो जाता है, ''लक से अंधविश्वास के सफर'' की एक अच्छी कहानी ''द जोया फैक्टर'' लेकर आये हैं निर्देशक अभिषेक शर्मा। आइये जानते हैं कैसी है फिल्म द जोया फैक्टर -

नयी दिल्ली। कई बार अपने घर में या दोस्तों के बीच 'किसी चीज में फैल होने पर' आपने ये कहते हुए सुना होगा कि 'Better Luck Next Time' आखिर ये लक है क्या? क्या सच में बिना मेहनत या अनुभव के लक फैक्टर काम करता है? फिल्म का मूल पढ़े-लिखे लोगों में जो अंधविश्वास बसा है उस पर प्रहार करता है। बहुत लोगों को अकसर ये कहते सुना गया है कि इस शख्स का चेहरा हमारे लिए बहुत लकी है। वहीं कुछ लोग ऐसे भी हैं जो घर से ही अपना दिमाग खराब करके निकलते हैं और कहते हैं कि 'अरे यार किसकी शक्ल देख ली आज का दिन खराब'। क्या है ये सब चोचले? क्या सच में किसी इंसान की सूरत किसी का दिन खराब कर सकती है? और किसी का दिन बना सकती है? खराब का तो पता नहीं लेकिन हां कोई इश्क में हो और सुबह-सुबह प्यार का दीदार हो जाए तो हां शायद मन खुश हो जाता है, मन खुश होगा तो दिन तो खुशनुमा बन ही जाएगा। लक कैसे धीरे-धीरे अंधविश्वास में तब्दील हो जाता है, 'लक से अंधविश्वास के सफर' की एक अच्छी कहानी 'द जोया फैक्टर' लेकर आये हैं निर्देशक अभिषेक शर्मा। आइये जानते हैं कैसी है फिल्म द जोया फैक्टर -

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फिल्म की कहानी

भारतीय क्रिकेट के इतिहास में 25 जून 1983 का दिन सुनहरे शब्दों में दर्ज है क्योंकि इसी दिन भारत की क्रिकेट टीम ने पहली बार वर्ल्ड कप जीता था। इसी को आधार बनाकर शुरू होती है फिल्म की कहानी... 25 अगस्त 1983 को जोया का जन्म होता है उसी दिन भारत की क्रिकेट टीम वर्ल्ड कप जीत जाती है। जोया का परिवार क्रिकेट प्रेमी होता है इस लिए वह जोया को क्रिकेट का लकी चार्म मानते हैं। फिल्म में जोया एड एजेंसी इंडियन में जूनियर कॉपी राइटर का काम करती है। जोया का सारा काम उनके लक पर होता है। जोया की कंपनी एक दिन उन्हें इंडियन क्रिकेट टीम का फोटोशूट करने भेजती है जहां उनकी मुलाकाल क्रिकेट टीम के कप्तान निखिल खोडा (दुलकर सलमान) से होती है। दोनों का पहली मुलाकात में ही लव वाला एट्रेक्शन हो जाता है। अगले दिन नाश्ते की टेबल पर भारतीय क्रिकेट टीम के साथ नाश्ता करते हुए जब जोया सभी को यह बताती है कि उसके घरवाले क्रिकेट के लिए उसे लकी चार्म मानते हैं, तो टीम के कई खिलाड़ी इस बात से प्रभावित नजर आते हैं। नाश्ता करने के बाद क्रिकेट टीम अपना मैच जीत जाती है। धीरे-धीरे जोया के साथ भारतीय क्रिकेट टीम का नाश्ता करना काफी लकी साबित होने लगता है और ये लक नाम की छोटी सी चिड़िया अब खतरनाक बाज का रूप लेती है क्रिकेटर अब प्रेक्टिस छोड़कर जोया के लक पर निर्भर करने लगते हैं। जोया क्रिकेट की देवी बन जाती हैं। लोग उनसे आशीर्वाद लेने आते हैं। अब जोया फैक्टर का आखिर में क्या होता है उसके लिए आपको फिल्म देखनी पड़ेगी।

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फिल्म द जोया फैक्टर रिव्यू 

निर्देशन

'तेरे बिन लादेन' और 'शौकीन' जैसी फिल्में बना चुके निर्देशक अभिषेक शर्मा ने जोया फैक्टर का फर्स्ट हाफ काफी हल्का रखा है। फिल्म थोड़ी-थोड़ी कॉमेडी के साथ आगे बढ़ती है और कहानी का आधार बनाती है। बीच में फिल्म थोड़ा बोर भी करती हैं लेकिन इंटरवल के बाद फिल्म जबरदस्त रफ्तार पकड़ती है। निर्देशन की बात करें तो फिल्म का फैक्टर दिखाने में निर्देशक नाकाम रहे है मैच की पिच रियलिटी से कोसो दूर है। लक के आधार पर मैच को जीतना काफी बचकाना लगता है। मैच की कमेंट्री नसीरुद्दीन शाह की भूत वाले चमत्कार की याद दिलाती है। कुल मिला कर हसांने के चक्कर में फिल्म की रियलिटी को खराब कर दिया गया है। 

कलाकार

भोली और बेवकूफ जोया के रूप में सोनम ने अपनी भूमिका को ईमानदारी से अंजाम दिया है। इस तरह की भूमिकाएं वह पहले भी कर चुकी हैं, मगर इस बार उनकी कॉमिक टाइमिंग संवरी हुई नजर आती है। एक्टर दुलकर सलमान फिल्म की जान है। सलमान ने गंभीर और समझदार कप्तान का रोल शानदार तरीके से निभाया है। सोनम के साथ सलमान की केमिस्ट्री भी अच्छी लग रही है। फिल्म में एक सीन के लिए आए अनिल कपूर हंसाने में कामयाब रहे हैं। जोया के पिता के रूप में संजय कपूर और भाई दिलावर के रूप में सिकंदर खेर ने अच्छा काम किया है। रॉबिन के रोल में अंगद बेदी ने फिल्म की गहनता को बनाए रखा है। 


फिल्म- द जोया फैक्टर रिव्यू 

कलाकार- सोनम कपूर,दुलकर सलमान,अंगद बेदी,संजय कपूर

निर्देशक- अभिषेक शर्मा

मूवी टाइप- Romance,Comedy

अवधि- 2 घंटा 16 मिनट

रेटिंग- ***