वजन कम करने में सहायक होता है देसी घी, जानिए कैसे

  •  मिताली जैन
  •  अप्रैल 30, 2019   15:03
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वजन कम करने में सहायक होता है देसी घी, जानिए कैसे

जब आप देसी घी को अपनी डाइट में शामिल करते हैं तो एक्स्ट्रा फैट बॉडी में नहीं बनता है। आयुर्वेद में भी घी का सेवन फायदेमंद माना गया है। इतना ही नहीं, देसी घी में सीएलए मौजूद होता है, जिसके कारण इंसुलिन की मात्रा को कम रहती है, जिससे वजन बढ़ने और शुगर जैसी दिक्कतें होने का खतरा बहुत कम रहता है।

जब भी लोग वजन कम करने का निर्णय लेते हैं तो सबसे पहले घी को अपनी डाइट से बाहर कर देते हैं। अमूमन यह धारणा होती है कि घी में फैट अधिक होता है, जो वजन बढ़ाता है। अगर आपकी भी यही सोच है तो हम आपको बता दें कि आप बिल्कुल गलत हैं। आपको जानकर शायद हैरानी हो लेकिन देसी घी का सेवन वजन बढाने के स्थान पर वजन घटाता है। बस जरूरत है कि आप इसे सही मात्रा में खाएं। वास्तव में देसी घी गुड फैट की श्रेणी में आता है, जिसकी शरीर को आवश्यकता होती है। तो चलिए जानते हैं इसके बारे में−

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मिलते हैं पोषक तत्व

वजन घटाने के लिए जिस प्रकार प्रोटीन, फाइबर व अन्य पोषक तत्वों की शरीर को जरूरत होती है, ठीक उसी प्रकार गुड फैट भी शरीर के लिए बेहद जरूरी है। देसी घी से सिर्फ गुड फैट ही नहीं मिलता, बल्कि इसमें विटामिन ए, डी और कैल्शियम, फॉस्फोरस, मिनरल्स, पोटैशियम जैसे कई पोषक तत्व भी होते हैं, जो हमारे शरीर के लिए बहुत फायदेमंद होते है। यह पोषक तत्व शरीर की कई जरूरतों को तो पूरा करते हैं ही, साथ ही वजन कम करने में भी मददगार होते हैं।

नहीं बढ़ता अतिरिक्त फैट

जब आप देसी घी को अपनी डाइट में शामिल करते हैं तो एक्स्ट्रा फैट बॉडी में नहीं बनता है। आयुर्वेद में भी घी का सेवन फायदेमंद माना गया है। इतना ही नहीं, देसी घी में सीएलए मौजूद होता है, जिसके कारण इंसुलिन की मात्रा को कम रहती है, जिससे वजन बढ़ने और शुगर जैसी दिक्कतें होने का खतरा बहुत कम रहता है। 

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बेहतर पाचन तंत्र

आपको शायद पता न हो लेकिन घी का सेवन पाचन तंत्र के लिए काफी अच्छा माना गया है। यह डाइजेस्टिव सिस्टम को बेहतर बनाता है। यह मेटाबॉलिक रेट को बढ़ाता है, जिसके कारण वजन नियंत्रित होता है।

ऐसे है सहायक

घी का सेवन खाद्य पदार्थों के ब्रेकडाउन में मदद करता है। जब आप इसका सेवन करते हैं तो भोजन शरीर में फैट के रूप में स्टोर नहीं होता, बल्कि ऊर्जा में परिवर्तित हो जाता है। जिससे वजन कम करने में मदद मिलती है। इसके अतिरिक्त घी में मौजूद लिनोलिक एसिड भी वजन कम करने में सहायक माना गया है।

मिताली जैन





डिस्क्लेमर: इस लेख के सुझाव सामान्य जानकारी के लिए हैं। इन सुझावों और जानकारी को किसी डॉक्टर या मेडिकल प्रोफेशनल की सलाह के तौर पर न लें। किसी भी बीमारी के लक्षणों की स्थिति में डॉक्टर की सलाह जरूर लें।


क्या आप जानते हैं खाली पेट चाय पीने के नुकसान, जानिए...

  •  सिमरन सिंह
  •  जनवरी 23, 2021   16:49
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क्या आप जानते हैं खाली पेट चाय पीने के नुकसान, जानिए...

बेड टी कई तरह से हमारी सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकती है। इसमें कई तरह के ऐसिड मौजूद होते हैं, जो अल्‍सर या पेट संबंधित अन्य समस्याओं को बुलावा देते हैं। इतना ही नहीं इससे मेटाबॉलिज्म घटता है और हार्ट रेट बढ़ जाता है।

“चाय” का नाम सुनते ही कई लोगों के मुंह नें पानी आ जाता है। इसकी खुश्बू के साथ अधिक्तर लोगों की सुबह होती है। कुछ लोगों तो बेड टी के बिना सुबह उठ भी नहीं पाते हैं। हालांकि, वो इससे अंजान हैं कि बेड टी या खाली पेट चाय पीने की उनकी ये आदत कितनी घातक साबित हो सकती है। हेल्थ एक्सपर्ट्स कहते हैं कि बेड टी कई तरह से हमारी सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकती है। इसमें कई तरह के ऐसिड मौजूद होते हैं, जो अल्‍सर या पेट संबंधित अन्य समस्याओं को बुलावा देते हैं। इतना ही नहीं इससे मेटाबॉलिज्म घटता है और हार्ट रेट बढ़ जाता है।

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अगर आप भी टी लवर हैं और चाय के बिना आपकी दिन की शुरुआत नहीं होती है तो आपके लिए इससे होने वाले नुकसानों को जानना ज्यादा जरूरी है, आइए आपको खाली पेट चाय पीने के नुकसानों के बारे में बताते हैं…

खाली पेट चाय पीने के नुकसान

- शोधकर्ताओं ने बताया है कि खाली पेट चाय पीने की आदत काफी खराब होती है। ऐसा इसलिए क्योंकि चाय में काफी मात्रा में कैफीन मौजूद होता है। इसके अलावा इसमें एल-थायमिन और थियोफाइलिइन भी मौजूद होता है जो उत्तेजित करने का कार्य करते हैं।

- हेल्थ एक्सपर्ट्स कहते हैं खाली पेट चाय पीने से बाइल जूस की प्रक्रिया अनियमित होती है। जो बाद में जी मिचलना या घबराहट जैसी समस्याओं का कारक बन सकती है।

- अधिक्तर लोग स्ट्रांग टी यानी ज्यादा चाय पत्ती वाली चाय पीने पसंद करते हैं। हालांकि, वो इस बात से अंजान होते हैं कि इससे पेट की अंदरुनी सतह में जख्म हो सकता है। इतना ही नहीं, इस तरह की चाय पीने से अल्सर का भी खतरा रहता है।

- खाली पेट चाय पीने से हमारे व्यवहार पर भी काफी बुरा असर होता है। हालांकि, इससे वो अंजान होते हैं लेकिन चिड़चिड़ाहट जैसी समस्या उनमें नजर आने लगती है।

- खाली पेट चाय पीने से ज्यादा थकावट भी होती है।

- ज्यादा देर की बनी चाय को भी बार-बार गर्म करके नहीं पीना चाहिए। ये सेहत के लिए काफी नुकसानदायक साबित हो सकता है।

- हेल्थ एक्सपर्ट्स कहते हैं कि खाली पेट चाय पीने से पुरूषों में पाई जाने वाली प्रोस्टेट कैंसर जैसी गंभीर बीमारी होने की संभावना रहती है। 

- अगर आप सुबह खाली पेट दूध और चीनी वाली चाय पीते हैं तो इससे आपका वजन बढ़ता है। ऐसा इसलिए क्योंकि इसमें घुली चीनी सीधा हमारे शरीर में जाती है और दूध में पत्ती डलने से एंटीऑक्‍सीडेंट का प्रभाव खत्म हो जाता है। 

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ऐसे पी सकते हैं बेड टी

अगर आप अपनी सुबह की चाय हानिकारक नहीं बनाना चाहते हैं, तो आप इसके लिए चाय के साथ 1-2 बिस्कुट का सेवन कर सकते हैं। ध्यान रहें कि चाय पीने से पहले आपको एक गिलास गुनगुना पानी जरूर पीना है। इसके कुछ देर बाद आप चाय पी सकते हैं। इसके अलावा अपना सुबह का नाश्ता सेहतमंद और भूरपूर्ण मात्रा में जरूर करें। खाली पेट रहने से आपका वजन बढ़ सकता है। इसके अलावा पेट संबंधित अन्य समस्या हो सकती है।

- सिमरन सिंह





डिस्क्लेमर: इस लेख के सुझाव सामान्य जानकारी के लिए हैं। इन सुझावों और जानकारी को किसी डॉक्टर या मेडिकल प्रोफेशनल की सलाह के तौर पर न लें। किसी भी बीमारी के लक्षणों की स्थिति में डॉक्टर की सलाह जरूर लें।


लंबे समय तक स्तनपान करवाने से मां और बच्चे पर पड़ता है यह असर, जानिए

  •  मिताली जैन
  •  जनवरी 22, 2021   15:02
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लंबे समय तक स्तनपान करवाने से मां और बच्चे पर पड़ता है यह असर, जानिए

अगर एक साल या उसके बाद भी बच्चा मां का दूध पीता है तो उसे कई तरह के पोषक तत्वों की प्राप्ति होती है। मां के दूध से बच्चे को विटामिन ए, प्रोटीन, कैल्शियम, फैट और अन्य पोषक तत्व होते हैं, जो उसकी सेहत के लिए बेहद फायदेमंद साबित होते हैं।

मां का दूध बच्चे के लिए अमृत समान माना जाता है। यही कारण है कि कम से कम छह महीनों के लिए बच्चे को सिर्फ और सिर्फ मां का दूध पिलाने की ही सलाह दी जाती है। यहां तक कि बच्चे को पानी तक भी नहीं पिलाना चाहिए। छह माह तक बच्चे की सारी जरूरतें स्तनपान के जरिए ही पूरी हो जाती हैं। लेकिन कुछ मां एक साल बाद या दो साल या फिर उससे भी लंबे समय तक बच्चे को स्तनपान करवाती हैं। जिसे लेकर लोगों के अपने−अपने मत हैं। तो चलिए आज इस लेख में हम आपको बता रहे हैं कि लंबे समय तक स्तनपान करवाने से क्या लाभ और नुकसान होते हैं−

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मिलते हैं पोषक तत्व

स्त्री रोग विशेषज्ञ बताते हैं कि अगर एक साल या उसके बाद भी बच्चा मां का दूध पीता है तो उसे कई तरह के पोषक तत्वों की प्राप्ति होती है। मां के दूध से बच्चे को विटामिन ए, प्रोटीन, कैल्शियम, फैट और अन्य पोषक तत्व होते हैं, जो उसकी सेहत के लिए बेहद फायदेमंद साबित होते हैं।

बीमारियों से रक्षा

स्त्री रोग विशेषज्ञ के अनुसार, मां का दूध बच्चे के लिए किसी प्रोटेक्टिव शील्ड से कम नहीं होता। अगर बच्चा लंबे समय तक मां के दूध का सेवन करता है तो इससे उसका इम्युन सिस्टम काफी मजबूत होता है। वह मौसमी बीमारियों से तो बचा ही रहता है, आगे चलकर वह गंभीर बीमारियों को भी परास्त कर देता है। ऐसे बच्चों का बड़े होकर ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल लेवल नहीं बढ़ता और टाइप 2 डायबिटीज का खतरा भी कम रहता है। इतना ही नहीं, बीमार होने पर उसकी रिकवरी भी काफी तेजी से होती है।

मस्तिष्क को बनाए तेज

कुछ अध्ययन यह साबित करते हैं कि लंबे समय तक स्तनपान से बच्चों का मस्तिष्क विकास बेहतर होता है। ऐसे बच्चों में स्मार्टनेस व आईक्यू लेवल अधिक होता है। दरअसल, ब्रेस्ट फीड करवाने से उन्हें ओमेगा 3 फैटी एसिड और डीएचए मिलता है जो मानसिक विकास में सक्रिय योगदान देता है। 2011 में हुई एक स्टडी वेस्टर्न ऑस्ट्रेलियन प्रेगनेंसी कोहोर्ट में भी यह बात साबित हो चुकी है। 

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वजन नियंत्रण में सहायक

स्तनपान सिर्फ बच्चे के लिए ही नहीं, मां के लिए भी उतना ही लाभदायक है। बच्चे के जन्म के बाद मां का वजन काफी बढ़ जाता है। ऐसे में अगर लंबे समय तक स्तनपान करवाया जाए तो इससे वजन को नियंत्रित करने में मदद मिलती है। स्तनपान करवाते समय मां के शरीर की अतिरिक्त कैलोरी आसानी से खर्च हो जाती है।

जानिए नुकसान

स्त्री रोग विशेषज्ञ के अनुसार, लंबे समय तक स्तनपान करवाने से वैसे तो कोई गंभीर नुकसान नहीं होता, लेकिन फिर भी मां को कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए। मसलन, अगर आप बच्चे को ब्रेस्टफीड करवा भी रही हैं, तब भी आप उसे धीरे−धीरे ठोस आहार खिलाना शुरू कर दें। इससे बच्चे का पेट भी भरता है और उसे खाने की आदत भी लगती है। अधिकतर मामलों में देखा जाता है कि जो बच्चे शुरूआत में खाना खाना शुरू नहीं करते, वे बाद में भी काफी परेशान करते हैं, क्योंकि भोजन के प्रति उनका टेस्ट डेवलप नहीं हो पाता।

मिताली जैन





डिस्क्लेमर: इस लेख के सुझाव सामान्य जानकारी के लिए हैं। इन सुझावों और जानकारी को किसी डॉक्टर या मेडिकल प्रोफेशनल की सलाह के तौर पर न लें। किसी भी बीमारी के लक्षणों की स्थिति में डॉक्टर की सलाह जरूर लें।


दूसरी बार बन रही हैं मां तो इन चार बातों का रखें खास ख्याल

  •  मिताली जैन
  •  जनवरी 21, 2021   18:12
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दूसरी बार बन रही हैं मां तो इन चार बातों का रखें खास ख्याल

गर्भावस्था के दौरान महिला को अतिरिक्त पोषण की जरूरत होती है और कई बार यह जरूरतें आपके भोजन की थाली से पूरी नहीं हो पातीं। ऐसे में खुद को व अपने गर्भस्थ शिशु की पोषण संबंधी जरूरतें पूरा करने के लिए आवश्यक है कि आप कुछ सप्लीमेंट्स का भी सेवन करें।

मां बनना किसी भी स्त्री के लिए एक खुशी का मौका होता है। हालांकि इस अवस्था में महिला को कई तरह के हेल्थ चैलेंजेस का भी सामना करना पड़ता है। खासतौर से, अगर यह आपकी दूसरी प्रेग्नेंसी है तो यकीनन आपको बहुत सी चीजों को एक साथ मैनेज करना पड़ता है। जिसके कारण आपको शारीरिक और मानसिक थकान होती है। इतना ही नहीं, सेकंड प्रेग्नेंसी में कुछ महिलाओं को अतिरिक्त परेशानी होती है। हो सकता है कि आप भी दूसरी बार मां बनने जा रही हों और ऐसे में अगर आप खुद को और अपने गर्भस्थ शिशु को स्वस्थ रखना चाहती हैं तो आपको कुछ बातों का खास ख्याल रखना होगा। जानिए इनके बारे में−

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वजन को करें नियंत्रित

स्त्री रोग विशेषज्ञ कहते हैं कि अगर आपने दूसरी बार मां बनने का फैसला लिया है तो यह जरूरी है कि आप पहले अपने वजन को नियंत्रित करें। बढ़े हुए वजन में गर्भधारण करने से कई तरह के हेल्थ इश्यूज का आपको सामना करना पड़ सकता है। इतना ही नहीं, अतिरिक्त वजन हाई बीपी व मधुमेह जैसी बीमारियों के खतरे को भी बढ़ाता है, जो गर्भावस्था में और भी ज्यादा रिस्की हो सकता है।

खाने पर करें फोकस

स्त्री रोग विशेषज्ञ के अनुसार, हेल्दी फूड खाना वैसे तो हमेशा ही जरूरी होता है। लेकिन अगर आप दूसरी बार मां बनने जा रही हैं तो यह और भी ज्यादा आवश्यक है। दरअसल, अधिकतर महिलाएं 30−35 की उम्र के बाद ही दूसरी बार मां बनती हैं। इस दौरान उनके शरीर में पहले से ही कई आवश्यक पोषक तत्वों की कमी होती है और अगर आहार में भी सतर्कता ना बरती जाए तो इससे सिर्फ महिला को ही नहीं, बल्कि गर्भस्थ शिशु को भी कई तरह की परेशानियां हो सकती हैं।

सप्लीमेंट्स का लें सहारा

गर्भावस्था के दौरान महिला को अतिरिक्त पोषण की जरूरत होती है और कई बार यह जरूरतें आपके भोजन की थाली से पूरी नहीं हो पातीं। ऐसे में खुद को व अपने गर्भस्थ शिशु की पोषण संबंधी जरूरतें पूरा करने के लिए आवश्यक है कि आप कुछ सप्लीमेंट्स का भी सेवन करें। हालांकि किसी भी सप्लीमेंट को आप खुद से शुरू ना करें। डॉक्टर की सलाह पर भी आप इसका सेवन करें।

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हेल्थ चेकअप 

यह गर्भधारण करने से पहले और गर्भावस्था के दौरान ध्यान रखा जाने वाला सबसे अहम् बिन्दु है। स्त्री रोग विशेषज्ञ के अनुसार, कई बार महिला की अधिक उम्र होने या फिर पहली प्रेग्नेंसी में कोई समस्या होने पर कुछ हेल्थ इश्यूज हो जाते हैं, जिसके बारे में स्वयं महिला को भी पता नहीं होता। इसलिए यह जरूरी है कि आप गर्भधारण करने से पहले एक बार चेकअप जरूर करवाएं। साथ ही गर्भावस्था के दौरान भी डॉक्टर की सलाह पर सभी जरूरी चेकअप व दवाईयां सही समय पर लें।

मिताली जैन





डिस्क्लेमर: इस लेख के सुझाव सामान्य जानकारी के लिए हैं। इन सुझावों और जानकारी को किसी डॉक्टर या मेडिकल प्रोफेशनल की सलाह के तौर पर न लें। किसी भी बीमारी के लक्षणों की स्थिति में डॉक्टर की सलाह जरूर लें।


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