बढ़ती ठंड में हड्डी और जोड़ों में दर्द की शिकायत हो तो चिकित्सक की सलाह पर कीजिए ये उपाय

बढ़ती ठंड में हड्डी और जोड़ों में दर्द की शिकायत हो तो चिकित्सक की सलाह पर कीजिए ये उपाय

चिकित्सकों के मुताबिक, ठंड के मौसम में खासकर वृद्धों में हड्डी संबंधी बीमारियां बढ़ गई हैं। उनके जोड़ों का दर्द उनकी परेशानियों का सबब बन गया है। पर्याप्त मात्रा में विटामिन-डी नहीं मिलने से इस तरह की बीमारियों का प्रकोप बढ़ता है।

सर्दी के मौसम में कई तरह के संक्रमण के साथ हड्डियों व उनके जोड़ों में दर्द की समस्याएं भी अचानक बढ़ जाती हैं। खासतौर पर उम्र बढ़ने के साथ महिलाओं में यह दिक्कत आम हो जाती है। जैसे-जैसे कंपकंपाने वाली ठंड बढ़ती है, वैसे-वैसे लोगों में जोड़ों के दर्द की परेशानियां भी बढ़ने लगती है। चूंकि ठंड के मौसम में लोग शारीरिक काम गर्मियों के मुकाबले कम करते हैं। इसलिए उनकी हड्डी अकड़ने के साथ कमजोर हो जाती है। ऐसे में विटामिन-डी हड्डियों की सेहत के लिए लाभदायक हो सकता है।

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चिकित्सकों के मुताबिक, ठंड के मौसम में खासकर वृद्धों में हड्डी संबंधी बीमारियां बढ़ गई हैं। उनके जोड़ों का दर्द उनकी परेशानियों  का सबब बन गया है। पर्याप्त मात्रा में विटामिन-डी नहीं मिलने से इस तरह की बीमारियों का प्रकोप बढ़ता है। वहीं, ठंड में बच्चों में रिकेट नामक व वयस्कों में ओस्टोमलेशिया नामक बीमारी बढ़ती है। भीषण ठंड में घुटने, कमर, पीठ व शरीर के अन्य हिस्सों में दर्द की शिकायत बढ़ जाती है। हालांकि, कतिपय असावधानी के कारण दर्द पर नियंत्रण नहीं हो पाता है। सर्दियों में हड्डी रोगों की दिक्कतें ज्यादा हो जाती है। इसलिए ऐसे रोगियों को समय पर दवाई लेने और व्यायाम के साथ-साथ धूप सेंकने की सलाह दी जा रही है। 

ठंड में मांस-पेशियों में ऐंठन और कुछ सख्ती आ जाती है, जिसका असर जोड़ों पर पड़ता है। इस सम्बन्ध में डॉ अमित शर्मा, वरिष्ठ हड्डी, जोड़ रोग एवं जोड़ प्रत्यारोपण विशेषज्ञ ने बताया कि हालांकि वैज्ञानिक तौर पर कोई एक कारण की पुष्टि नहीं हो सकी है जिसको जोड़ और हड्डी की दर्द का कारण माना जा सके, लेकिन कुछ कारण जो अनुसंधानों में सामने आए हैं वो इस प्रकार हैं- पहला, ठंड में मांस-पेशियों में ऐंठन और कुछ सख्ती आ जाती है, जिसका असर जोड़ों पर पड़ता है। दूसरा, ठण्ड की वजह से जोड़ों में रक्त का प्रवाह भी धीमा पड़ जाता है, जो हड्डियों का दर्द बढ़ने की वजह बनता है। तीसरा, सर्दियों में हमारे शरीर को धूप कम मिल पाती है जिससे हमारे शरीर में विटामिन-डी की कमी हो जाती है। इससे भी जोड़ों में दर्द और हड्डियों में अकड़न आ सकती है। चतुर्थ, सर्दियों में एक और समस्या रहती है कि हम एक ही जगह पर ज्यादा देर तक बैठे रहते हैं और धूमना फिरना भी कम हो जाता है, ऐसे में दर्द की समस्या बढ़ जाती है।

वहीं, इस बारे में डॉ  देवेंद्र दवे, वरिष्ठ हड्डी, जोड़ रोग एवं जोड़ प्रत्यारोपण विशेषज्ञ पूछे जाने पर बताते हैं कि ठण्ड के दिनों में मांशपेशियों, हड्डी एवं जोड़ों के दर्द से बचने के लिए सबसे जरूरी है कि आप व्यायाम जरूर करें, सैर जारी रखे। यदि ठण्ड ज्यादा हो तो घर के अंदर ही व्यायाम करें और एक ही जगह लम्बे समय तक बैठे रहने से बचें और थोड़ी थोड़ी देर में हल्का व्यायाम या स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज करें। इसके अलावा, ज्यादा वसायुक्त और मीठा खाने से परहेज करें अन्यथा यह वजन बढ़ा सकता है और बढ़े हुए वजन से जोड़ों पर अधिक दबाव बनेगा। इसलिए जरूरी है कि खाने में एंटीऑक्सीडेंट युक्त चीजें खाएं एवं सुबह की धूप लेने की कोशिश करें। घर में उचित तापमान रखें, वूलेन एवं वार्मर पहनें।

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आमतौर पर भीषण ठंड में हड्डी और जोड़ों में दर्द की समस्या बढ़ी है। बच्चे, बुजुर्ग और महिलाओं में ये समस्याएं अधिक देखने को मिल रही हैं। सामान्य अस्पताल से लेकर निजी अस्पतालों की ओपीडी में लगातार मरीजों की संख्या बढ़ रही है। एक आकलन के मुताबिक, पहले जहां 50 मरीज रोजाना आते थे, वहीं इन दिनों में इनकी संख्या बढ़कर 100 या उससे भी अधिक हो चुकी हैं। इस वजह से एक्सरे कराने के लिए भी लंबी कतारें लगने लगी हैं।

हड्डी रोग विशेषज्ञ बताते हैं कि ठंड में जोड़ों का दर्द किसी को भी अपनी चपेट में ले सकता है। हालांकि, जिनकी हड्डियां थोड़ी कमजोर होती हैं, उनको ये अधिक ही प्रभावित करती हैं। इसलिए बदलते मौसम में भीषण ठंड का जोड़ों के दर्द से गहरा संबंध है, जिसे समझने की जरूरत है। दरअसल, तापमान में कमी के कारण नसें सिकुड़ने लगती हैं और विटामिन डी की कमी के कारण हड्डियों और जोड़ों का दर्द बढ़ जाता है।

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देखा जा रहा है कि इन दिनों ओपीडी में ज्यादातर मरीज दर्द की शिकायत के साथ आ रहे हैं। सामान्यतया ऐसे लोगों को दवा तो दी ही जाती है और बचाव के तरीके से भी अवगत कराया जाता है। बिना चिकित्सक की सलाह के किसी भी तरह की एक्सरसाइज या योग न करने की सलाह दी जाती है। इससे समस्या और अधिक बढ़ सकती है। दर्द की स्थिति में बिना चिकित्सक की सलाह के कोई भी पेन किलर या अन्य दवा का सेवन न करें। 

यदि किसी व्यक्ति को चलने, खड़े होने, हिलने-डुलने और आराम करते समय भी दर्द महसूस हो, तो उसे सावधान हो जाना चाहिए। सूजन होना, चलने पर जोड़ों का लॉक हो जाना और जोड़ों में कड़ापन भी इन दिनों आम बात होती जा रही है। इसलिए बचाव के लिए ज्यादातर शरीर को ढकने वाले कपड़े पहनें, शरीर को गर्म रखने की कोशिश करें, ज्यादा प्रोटीन वाला खाना खाएं और मछली, मीट, अंडे, मूंगफली के अलावा ज्यादा पानी पीएं। ऐसे में धूप सेंकने से भी काफी राहत मिलती है। वहीं, योग से सर्वाइकल की समस्या को दूर करने की सलाह दी जाती है। हां, दर्द से बचने के लिए रोजाना सैर जरूर करनी चाहिए। सुबह या शाम के समय हल्की धूप में बैठना फायदेमंद होता है।

बताया जाता है कि मरीज की स्किन जब सूरज की किरणों के संपर्क में आती है, तो हमारा शरीर विटामिन-डी बनाता है, जिससे हड्डियां मजबूत रहती हैं। लेकिन सर्दियों में धूप कम देर तक रहती है। इसलिए शरीर इसे ठीक से नहीं बना पाता है। लिहाजा बढ़ती उम्र के साथ भी ठंड में हड्डियों में दर्द शुरू हो जाता है। ठंड के मौसम में गुनगुने पानी से नहाना चाहिए। गर्म पानी शरीर की अकड़न को दूर कर उसमें लचीलापन बनाए रखता है। दरअसल, शरीर को फिजिकली एक्टिव रखने से हड्डियां कमजोर नहीं पड़ती और लचीली भी रहती हैं। वर्कआउट से हड्डियों में मजबूती आती है और वे सेहतमंद रहती हैं। यहां तक कि सर्दियों में भी रोजाना वर्कआउट करना चाहिए। सैर के साथ वर्कआउट भी जरूरी होता है।

- कमलेश पांडेय

वरिष्ठ पत्रकार व स्तम्भकार





डिस्क्लेमर: इस लेख के सुझाव सामान्य जानकारी के लिए हैं। इन सुझावों और जानकारी को किसी डॉक्टर या मेडिकल प्रोफेशनल की सलाह के तौर पर न लें। किसी भी बीमारी के लक्षणों की स्थिति में डॉक्टर की सलाह जरूर लें।