महिलाओं को अपनी चपेट में लेते हैं यह पांच प्रकार के कैंसर, जानिए इनके बारे में

  •  मिताली जैन
  •  जनवरी 9, 2021   11:26
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महिलाओं को अपनी चपेट में लेते हैं यह पांच प्रकार के कैंसर, जानिए इनके बारे में

जब महिलाओं में कैंसर की बात हो तो इसमें सबसे पहला नाम स्तन कैंसर का आता है। हेल्थ एक्सपर्ट कहते हैं कि अगर महिला सतर्क हो तो इसे जीरो स्टेज पर ही पहचाना जा सकता है। हर महिला को महीने के एक बार अपने स्तनों की जांच स्वयं करनी चाहिए।

कैंसर का नाम सुनते ही मन में एक अजीब सी सिहरन होती है। यह एक ऐसी बीमारी है, जिसका अगर समय रहते पता लगा लिया जाए तो इससे पार पाया जा सकता है। लेकिन अगर इलाज में देरी की जाए तो मनुष्य की जान भी जा सकती है। कैंसर पुरूष या महिला किसी को भी अपनी चपेट में ले सकता है और केवल इसके लक्षणों की पहचान करके की समय पर इलाज शुरू किया जा सकता है। वैसे जब महिलाओं में कैंसर की बात हो तो अमूमन स्तन कैंसर का ही नाम लिया जाता है, लेकिन इसके अलावा ओवेरियन कैंसर से लेकर ग्रीवा कैंसर तक महिलाओं को प्रभावित कर सकता है। तो चलिए आज हम आपको महिलाओं को होने वाले विभिन्न प्रकार के कैंसर के बारे में बता रहे हैं−

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स्तन कैंसर

जब महिलाओं में कैंसर की बात हो तो इसमें सबसे पहला नाम स्तन कैंसर का आता है। हेल्थ एक्सपर्ट कहते हैं कि अगर महिला सतर्क हो तो इसे जीरो स्टेज पर ही पहचाना जा सकता है। हर महिला को महीने के एक बार अपने स्तनों की जांच स्वयं करनी चाहिए। इसके लिए आप अपनी तीन उंगलियां अपने स्तनों पर रखकर स्तनों पर गोलाकार घुमाएं। स्तन में हो रहे बदलावों के जरिए ब्रेस्ट कैंसर के बारे में पहचाना जा सकता है। इन बदलावों में महिला को स्तन पर किसी तरह की गांठ, स्तनों का असामान्य तरीके से बढ़ना, बगल में सूजन आना या गांठ बनना, निप्पल का आकार बदलना, उसका अंदर धसना, निप्पल से किसी तरह का डिस्चार्ज, निप्पल व ब्रेस्ट पर घाव महसूस हो सकता है।

ओवेरियन कैंसर

डिम्बग्रंथि के कैंसर जिसे ओवेरियन कैंसर के नाम से भी जाना जाता है, इसके बारे में बेहद जल्द पता लगा पाना काफी मुश्किल है। अमूमन इसके लक्षण इतने अस्पष्ट होते हैं कि महिलाएं उसे अनदेखा का देती हैं और जब कैंसर बढ़ने लगता है, तब इसके बारे में पता लगता है। अगर महिलाओं में ओवेरियन कैंसर के लक्षण की बात की जाए तो इसमें पेट फूलना, पेट में दबाव या दर्द, खाने में परेशानी या खाना खाने के बाद पेट का जरूरत से ज्यादा भरे होने का अहसास होना होता है। इतना ही नहीं, यह कैंसर होने पर आपको पेशाब में वृद्धि, थकान, अपच, हार्टबर्न, कब्ज, पीठ में दर्द, अनियमित मासिक धर्म, संभोग के दौरान दर्द आदि लक्षण भी नजर आ सकते हैं। 

ग्रीवा कैंसर 

ग्रीवा कैंसर अधिकतर यौन रूप से सक्रिय महिलाओं को प्रभावित कर सकता है। एचपीवी अर्थात मानव पैपिलोमा वायरस नामक एक विशिष्ट प्रकार का वायरस गर्भाशय ग्रीवा के कैंसर के लगभग सभी मामलों का मुख्य कारण बनता है। अगर आप यौन रूप से सक्रिय होने के अलावा पहले से ही एचआईवी व एड्स से पीडि़त हैं या फिर आप धूम्रपान करती हैं, तो भी आपको ग्रीवा कैंसर होने की संभावना काफी हद तक बढ़ जाती है। ग्रीवा कैंसर को इसके लक्षणों के जरिए आसानी से पहचाना जा सकता है। ग्रीवा कैंसर होने पर महिला को असामान्य ब्लीडिंग जैसे पीरियड्स के दौरान हैवी ब्लीडिंग होना, संभोग के बाद ब्लीडिंग, श्रोणि परीक्षण के बाद ब्लीडिंग, रजोनिवृत्ति के बाद ब्लीडिंग, संभोग के दौरान दर्द, मासिक धर्म का लंबे समय तक होना, योनि स्राव में वृद्धि व उसका रंग व गंध में असामान्य होना, रजोनिवृत्ति के बाद दर्द, श्रोणि या कमर में लगातार दर्द, बार−बार पेशाब जाना और मूत्र त्याग के दौरान दर्द आदि लक्षण नजर आ सकते हैं।

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एंडोमेटि्रयल कैंसर 

एंडोमेटि्रयल कैंसर महिला के गर्भाशय पर अटैक करता है। एंडोमेटि्रयल कैंसर होने पर कुछ लक्षण नजर आते हैं, जिसे महिला को बिल्कुल भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। यह कैंसर होने पर महिलाओं को योनि से असामान्य रक्तस्राव या डिस्चार्ज का अनुभव होता है। इतना ही नहीं, रजोनिवृत्ति से पहले हैवी व असामान्य पीरियड्स, योनि से अधिकतर पानी या रक्त का स्राव, पेल्विक पेन व संभोग के दौरान दर्द भी एंडोमेटि्रयल कैंसर के लक्षणों में शामिल है।

स्किन कैंसर 

स्किन कैंसर पुरूष व महिलाओं दोनों को अपना शिकार बना सकता है। यह उन महिलाओं को अधिक प्रभावित करता है, जिनकी त्वचा सूर्य के संपर्क में जरूरत से ज्यादा आती है। इसलिए अगर सूरज की किरणों से स्किन को प्रोटेक्ट करना बेहद जरूरी है। चूंकि स्किन कैंसर आपकी त्वचा को प्रभावित करता है, इसलिए स्किन पर उसके लक्षण साफतौर पर नजर आते हैं। मसलन, शुरूआती स्टेज में आपको स्किन पर नोड्यूल, दाने या पैच आदि दिखाई दे सकते हैं। कैंसर बढ़ने के साथ−साथ इन पैच का साइज भी बढ़ने लगता है। इसके अलावा, किसी बर्थमार्क या तिल के आसपास की त्वचा में परिवर्तन आना, बार−बार एक्जीमा होना, शरीर के दाग−धब्बों में खुजली या खून निकलना भी स्किन कैंसर के लक्षणों में शुमार हैं। इसलिए अगर आपको ऐसा कोई भी लक्षण नजर आए तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

मिताली जैन





डिस्क्लेमर: इस लेख के सुझाव सामान्य जानकारी के लिए हैं। इन सुझावों और जानकारी को किसी डॉक्टर या मेडिकल प्रोफेशनल की सलाह के तौर पर न लें। किसी भी बीमारी के लक्षणों की स्थिति में डॉक्टर की सलाह जरूर लें।


वजाइनल और वल्वर कैंसर स्क्रीनिंग टेस्ट से जुड़ी जानकारी पाने के लिए पढ़ें यह लेख

  •  मिताली जैन
  •  जनवरी 1, 2021   17:02
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वजाइनल और वल्वर कैंसर स्क्रीनिंग टेस्ट से जुड़ी जानकारी पाने के लिए पढ़ें यह लेख

सर्विकल स्क्रीनिंग टेस्ट के जरिए भी योनि के कैंसर का पता लगाया जा सकता है। आजकल पैप परीक्षण की जगह इसे किया जाने लगा है। सर्विकल स्क्रीनिंग टेस्ट गर्भाशय ग्रीवा या योनि से ली गई कोशिकाओं के नमूने में एचपीवी के कैंसर पैदा करने वाले प्रकारों को चेक किया जाता है।

जब भी महिलाओं में कैंसर की बात होती है तो अधिकतर लोग स्तन कैंसर की ही बात करते हैं। लेकिन महिलाओं में योनि का कैंसर भी काफी घातक होता है। योनि के कैंसर को अमूमन वजाइनल कैंसर कहा जाता है। वहीं योनि के बाहरी सतह में कैंसर होता है तो यह वल्वर कैंसर कहलाता है। अगर इसकी समय रहते पहचान कर ली जाए तो उपचार के जरिए रिकवरी की जा सकती हैं। आमतौर पर योनि से जुड़े कैंसर के बारे में पता लगाने के लिए वजाइनल और वल्वर कैंसर स्क्रीनिंग टेस्ट किया जाता है। इसके लिए कई तरह के टेस्ट किए जानते हैं। तो चलिए जानते हैं विस्तारपूर्वक इन टेस्ट्स के बारे में−

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कोल्पोस्कोपी

हेल्थ एक्सपर्ट बताते हैं कि इस टेस्ट में डॉक्टर योल्वा, योनि और गर्भाशय ग्रीवा को विस्तार से देखने के लिए एक कोलोप्स्कोप नामक एक उपकरण का इस्तेमाल करते हैं। कोलपोस्कोप को आपके वल्वा के पास रखा जाता है लेकिन यह आपके शरीर में प्रवेश नहीं करता है। एक कोलपोस्कोपी जो वल्वा की जांच करती है, कभी−कभी वल्वास्कोपी कहलाती है, और जो योनि की जांच करती है उसे वैजिनोस्कोपी कहा जा सकता है। आपको कोलपोस्कोपी से पहले 24 घंटे के लिए अपनी योनि में टैम्पोन, दवा जैसी चीजें इस्तेमाल ना  करने की सलाह दी जाती है। साथ ही टेस्ट से 24 घंटे पहले तक महिला को संभोग भी नहीं करना चाहिए।

बायोप्सी

एक कोलपोस्कोपी के दौरान, आपका डॉक्टर आमतौर पर वल्वर क्षेत्र से एक छोटा ऊतक नमूना (बायोप्सी) लेगा और संभवतः योनि क्षेत्र भी। एक बायोप्सी वल्वर कैंसर का निदान करने का सबसे अच्छा तरीका है। डॉक्टर बायोप्सी से पहले इस एरिया को सुन्न करने के लिए एनेस्थेटिक का इस्तेमाल करते है। इससे आपको उस दौरान कोई दर्द नहीं होता, हालांकि आपको थोड़ी असुविधा हो सकती है। बायोप्सी के बाद, आपके वल्वा से थोड़ा खून बह सकता है। घाव को बंद करने के लिए कभी−कभी टांके की जरूरत पड़ती है। आपका डॉक्टर बताएगा कि बाद में कितनी रक्तस्राव की उम्मीद है और घाव की देखभाल कैसे करें। आपको कुछ खराश हो सकती है, जिसे दर्द निवारक लेने से राहत मिल सकती है।

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सर्विकल स्क्रीनिंग टेस्ट

सर्विकल स्क्रीनिंग टेस्ट के जरिए भी योनि के कैंसर का पता लगाया जा सकता है। आजकल पैप परीक्षण की जगह इसे किया जाने लगा है। सर्विकल स्क्रीनिंग टेस्ट गर्भाशय ग्रीवा या योनि से ली गई कोशिकाओं के नमूने में एचपीवी के कैंसर पैदा करने वाले प्रकारों को चेक किया जाता है। इसमें आपको थोड़ा असहज महसूस हो सकता है, लेकिन आमतौर पर केवल एक या दो मिनट लगते हैं। नमूना को एचपीवी की जांच के लिए एक प्रयोगशाला में भेजा जाता है। यदि एचपीवी पाया जाता है, तो पैथोलॉजिस्ट कोशिका परिवर्तन की जांच के लिए नमूने पर एक अतिरिक्त परीक्षण करेगा।

मिताली जैन





डिस्क्लेमर: इस लेख के सुझाव सामान्य जानकारी के लिए हैं। इन सुझावों और जानकारी को किसी डॉक्टर या मेडिकल प्रोफेशनल की सलाह के तौर पर न लें। किसी भी बीमारी के लक्षणों की स्थिति में डॉक्टर की सलाह जरूर लें।


इन लक्षणों के जरिए करें ब्लड कैंसर के शुरूआती स्टेज की पहचान

  •  मिताली जैन
  •  दिसंबर 26, 2020   17:46
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इन लक्षणों के जरिए करें ब्लड कैंसर के शुरूआती स्टेज की पहचान

ब्लड कैंसर आमतौर पर तीन तरह का होता है। पहला ल्यूकेमिया, जिसमें कैंसरग्रस्त कोशिकाएँ अस्थि मज्जा या रक्त को प्रभावित करना शुरू कर देती हैं और रक्त कोशिकाओं के उत्पादन की दर को कम कर देती हैं और परिणामस्वरूप उच्च संख्या में असामान्य सफेद रक्त कोशिकाएं बन जाती हैं।

कैंसर दुनिया भर में मौतों के प्रमुख कारणों में से एक रहा है और रक्त कैंसर व्यापक रूप से प्रचलित प्रकार का कैंसर है। इसमें रक्त कोशिकाओं के अधिकांश कार्य और निर्माण रक्त कैंसर से प्रभावित होते हैं। यह देखा जाता है कि अधिकांश कैंसर उस जगह से शुरू होते हैं जहां रक्त का उत्पादन होता है यानी अस्थि मज्जा। ब्लड कैंसर होने पर सामान्य रक्त कोशिकाओं के विकास की प्रक्रिया एक असामान्य प्रकार की कोशिका के विकास से बाधित होती है। ये कैंसर की रक्त कोशिकाएं आपके रक्त को अपने प्राथमिक कार्यों को करने से रोकती हैं जैसे रक्त की हानि को रोकना, संक्रमणों से लड़ना आदि। हालांकि ब्लड कैंसर के शुरूआती स्टेज पर ही कुछ लक्षण नजर आते हैं। तो चलिए जानते हैं इन लक्षणों के बारे में−

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तीन तरह का होता ब्लड कैंसर

हेल्थ एक्सपर्ट बताते हैं कि ब्लड कैंसर आमतौर पर तीन तरह का होता है। पहला ल्यूकेमिया, जिसमें कैंसरग्रस्त कोशिकाएँ अस्थि मज्जा या रक्त को प्रभावित करना शुरू कर देती हैं और रक्त कोशिकाओं के उत्पादन की दर को कम कर देती हैं और परिणामस्वरूप उच्च संख्या में असामान्य सफेद रक्त कोशिकाएं बन जाती हैं। हालांकि, ये श्वेत कोशिकाएँ पूर्ण विकसित नहीं होती हैं। वहीं दूसरा प्रकार है लिम्फोमा, यह रक्त कोशिकाओं के ट्यूमर का एक समूह है जो लसीका कोशिकाओं से उत्पन्न होता है। तीसरा प्रकार है मायलोमा, जिस में, प्लाज्मा (रक्त का एक घटक) कैंसर कोशिकाओं से प्रभावित होता है।

पहचानें लक्षण

ब्लड कैंसर को विकसित होने से रोकने के लिए आप इसके लक्षणों को पहचान तुरंत जांच करवा सकते हैं। हेल्थ एक्सपर्ट बताते हैं कि ब्लड कैंसर होने पर कुछ खास लक्षण नजर आते हैं। जैसे−

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वजन में कमी

गांठ या सूजन

सांस की तकलीफ

रात में पसीना आना

अनएक्सप्लेन बुखार

चकत्ते या खुजली वाली त्वचा 

हड्डी, जोड़ों या पेट में दर्द

थकावट जो नींद लेने या आराम करने के बाद भी सुधार नहीं होता

असामान्य रूप से पीला रंग

लिम्फ नोड का बढ़ना

मसूड़ों से खून बहना

भूख में कमी व मतली का अहसास होना

हेल्थ एक्सपर्ट कहते हैं कि अगर इनमें से कोई भी लक्षण नजर आए तो डॉक्टर के विजिट जरूर करें।

मिताली जैन





डिस्क्लेमर: इस लेख के सुझाव सामान्य जानकारी के लिए हैं। इन सुझावों और जानकारी को किसी डॉक्टर या मेडिकल प्रोफेशनल की सलाह के तौर पर न लें। किसी भी बीमारी के लक्षणों की स्थिति में डॉक्टर की सलाह जरूर लें।


क्या स्किन पर मस्से होना कैंसर की है निशानी, जानिए इस लेख में

  •  मिताली जैन
  •  नवंबर 6, 2020   11:44
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क्या स्किन पर मस्से होना कैंसर की है निशानी, जानिए इस लेख में

वैसे तो कैंसर कई तरह के होते हैं और हर कैंसर के कुछ लक्षण होते हैं। वैसे तो हर कैंसर बेहद घातक होता है, लेकिन इनमें से स्किन कैंसर सबसे अधिक खतरनाक होता है। आमतौर पर स्किन कैंसर होने पर त्वचा पर तिल व मस्से नजर आते हैं।

हम सभी की स्किन पर मस्से होना बेहद सामान्य माना जाता है। अमूमन लोग सोचते हैं कि अत्यधिक गर्मी, स्किन में तेल के जमाव या गलत खानपान के कारण स्किन में मस्से निकल आए हैं। यह सच है कि मस्से निकलने के कई कारण होते हैं, लेकिन कभी−कभी यह स्किन कैंसर की ओर भी इशारा करते हैं। कैंसर का नाम सुनते ही मन में एक सिहरन उठती है। हम सभी यही कामना करते हैं कि कभी भी किसी को कैंसर ना हो। लेकिन फिर भी कुछ लोगों को इस भयावह बीमारी का सामना करना पड़ता है। ऐसे में अगर इसके लक्षणों को समय रहते पहचान लिया जाए तो इस जानलेवा बीमारी पर जीत हासिल की जा सकती है। तो चलिए जानते हैं इसके बारे में−

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अलग−अलग होते हैं लक्षण

हेल्थ एक्सपर्ट बताते हैं कि वैसे तो कैंसर कई तरह के होते हैं और हर कैंसर के कुछ लक्षण होते हैं। वैसे तो हर कैंसर बेहद घातक होता है, लेकिन इनमें से स्किन कैंसर सबसे अधिक खतरनाक होता है। आमतौर पर स्किन कैंसर होने पर त्वचा पर तिल व मस्से नजर आते हैं। यह मेलोनेमा कैंसर के मुख्य लक्षणों में से एक है।

ऐसे करें पहचान

हेल्थ एक्सपर्ट कहते हैं कि कई लोगों के लिए सामान्य मस्सों और स्किन कैंसर के कारण होने वाले मस्सों के बीच अंतर पहचानना काफी मुश्किल हो जाता है। मेलोनेमा कैंसर होने पर स्किन में मस्से नजर आते हैं। लोग इसे सामान्य तिल व मस्से ही मानते हैं और इसलिए इसे नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन फिर भी आप कुछ आसान तरीकों से इसकी पहचान कर सकते हैं। उदाहरण के तौर पर, तिल या मस्से का हर ओर समरूप न होना या फिर तिल या मस्से की सीमाओं का आड़ा−तिरछा होना। इसके अलावा, अगर स्किन में तिल या मस्से में अनेक रंग मौजूद हो या फिर तिल या मस्से का व्यास छह मिलीमीटर से बड़ा हो तो आपको सतर्क हो जाना चाहिए।

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यह भी हैं संकेत

हेल्थ एक्सपर्ट कहते हैं कि चेहरे पर होने वाले मस्से का आकार के अलावा उसका रंग भी स्किन कैंसर के लक्षणों को दर्शाता है। मसलन, अगर आपको शरीर पर मौजूद मस्से का रंग सामान्य से कुछ अलग नजर आए तो एक बार डॉक्टर को जरूर दिखाए। इतना ही नहीं, अगर स्किन पर मौजूद मस्से तेजी से बढ़ते जा रहे हैं या फिर उनमें से पस या खून निकल रहा है तो आपको अपने चेकअप में बिल्कुल भी देरी ना करें।

मिताली जैन





डिस्क्लेमर: इस लेख के सुझाव सामान्य जानकारी के लिए हैं। इन सुझावों और जानकारी को किसी डॉक्टर या मेडिकल प्रोफेशनल की सलाह के तौर पर न लें। किसी भी बीमारी के लक्षणों की स्थिति में डॉक्टर की सलाह जरूर लें।


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