जानिए क्या है टायफाइड और कैसे करें इसका उपचार

By मिताली जैन | Publish Date: Jun 24 2019 5:03PM
जानिए क्या है टायफाइड और कैसे करें इसका उपचार
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टायफाइड बुखार के इलाज में एंटीबायोटिक दवाएं बेहद प्रभावी होती हैं। हालांकि इसे ठीक होने में समय लगता है, लेकिन दवाओं के सेवन से एक−दो दिन में ही अंतर नजर आता है। इस बीमारी के इलाज में दवाईयों का अहम रोल होता है, इसलिए मरीज को दवाई लेने में किसी प्रकार की कोताही न बरतें।

टायफाइड एक तरह का बुखार है, जिसे मियादी बुखार के रूप में भी जाना जाता है। यह एक तरह का संक्रामक बुखार होता है इसलिए ये एक से दूसरे व्यक्ति में तेजी से फैलता है। इतना ही नहीं, यह बच्चों से लेकर बड़ों तक किसी को भी अपनी चपेट में ले सकता है। हालांकि इसे एंटीबायोटिक दवाओं के जरिए ठीक किया जा सकता है, लेकिन अगर सावधानी न बरती जाए तो इससे व्यक्ति की परेशानी बढ़ सकती है।


क्या है टायफाइड
टायफाइड बुखार एक प्रकार का बुखार है, जो दूषित पानी से नहाने या दूषित पानी का प्रयोग भोजन करने से होता है। यह सेलमोनेला टायफाई बैक्टीरिया द्वारा फैलता है। यह बैक्टीरिया खाने या पानी के जरिए मनुष्य द्वारा ही एक जगह से दूसरी जगह पर अन्य लोगों तक पहुंचता है। वैसे कई बार मौसम में बदलाव भी इस बुखार का कारण बनता है। इतना ही नहीं, अगर घर में किसी एक सदस्य को टायफायड होता है तो अन्य सदस्यों को भी इसके होने का खतरा होता है। इसलिए बेहद सावधानी बरतने की आवश्यकता होती है।
 
पहचाने लक्षण
टायफाइड होने पर मरीज को काफी तेज बुखार होता है जो 103 से 104 डिग्री तक हो सकता है। आमतौर पर ये बुखार एक से दो हफ्तों तक चलता है। टायफाइड से पीडि़त मरीज को तेज बुखार के अतिरिक्त चेस्ट मे कंजेशन, पेट दर्द, भूख न लगना, सिर में व शरीर के अन्य भागों में दर्द, सुस्ती व दस्त की परेशानी भी होती है। बुखार के साथ−साथ अगर किसी व्यक्ति को ऐसे लक्षण नजर आएं तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। टायफाइड से पीडि़त मरीज को ठीक होने में 4 से 6 हफ्ते भी लग जातें हैं।


ऐसे करें इलाज


टायफाइड बुखार के इलाज में एंटीबायोटिक दवाएं बेहद प्रभावी होती हैं। हालांकि इसे ठीक होने में समय लगता है, लेकिन दवाओं के सेवन से एक−दो दिन में ही अंतर नजर आता है। इस बीमारी के इलाज में दवाईयों का अहम रोल होता है, इसलिए मरीज को दवाई लेने में किसी प्रकार की कोताही न बरतें।
 
इसका रखें ध्यान
इस बीमारी से निपटने व बचाव का सबसे असरदार उपाय है कि साफ−सफाई का विशेष ध्यान रखें। कुछ भी खाने से पहले या बाद में, शौचालय जाने के बाद हाथ अवश्य धोएं। भोजन को ढककर रखें और साफ पानी का ही प्रयोग करें।
 
घर की साफ−सफाई पर भी ध्यान दें। कई बार दरवाजों के हैंडल, टेलीफोन व नल में होने वाली गंदगी के कारण भी टायफायड फैलता है।
चूंकि यह बीमारी एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलने का डर बना रहता है, इसलिए अगर मरीज घर पर हो तो उसे अन्य व्यक्तियों से थोड़ा दूर ही रखें।
 
मिताली जैन
 

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