खाने के बाद भी कर सकते हैं वज्रासन, जानिए इसके लाभ

  •  मिताली जैन
  •  जून 11, 2019   19:01
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खाने के बाद भी कर सकते हैं वज्रासन, जानिए इसके लाभ
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वज्रासन करने के लिए घुटनों के बल जमीन पर बैठ जाएं। इस दौरान दोनों पैरों के अंगुठों को साथ में मिलाएं और एडि़यों को अलग रखें। अब अपने नितंबों को एडि़यों पर टिकाएं। साथ ही अपनर हथेलियां को घुटनों पर रख दें। इस दौरान अपनी पीठ और सिर को सीधा रखें।

योगा का वास्तविक लाभ तभी मिलता है, जब उसे करते समय नियमों व सावधानी पर गौर किया जाए। आमतौर पर योगासनों को खाली पेट या सुबह के समय करने की सलाह दी जाती है। लेकिन वज्रासन अकेला ऐसा आसन है, जिसे आप खाना खाने के तुरंत बाद कर सकते हैं। इतना ही नहीं, अगर आप खाने के बाद वज्रासन का अभ्यास करते हैं तो इससे भोजन के पाचन में भी आसानी होती है। तो चलिए जानते हैं वज्रासन करने का तरीका और उससे होने वाले लाभों के बारे में−

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करने का तरीका

वज्रासन करने के लिए घुटनों के बल जमीन पर बैठ जाएं। इस दौरान दोनों पैरों के अंगुठों को साथ में मिलाएं और एडि़यों को अलग रखें। अब अपने नितंबों को एडि़यों पर टिकाएं। साथ ही अपनर हथेलियां को घुटनों पर रख दें। इस दौरान अपनी पीठ और सिर को सीधा रखें। ध्यान रखें कि इस दौरान आपके दोनों घुटने आपस में मिले हों। अब अपनी आंखें बंद कर लें और सामान्य रूप से सांस लेते रहें। इस अवस्था में जब तक संभव हो, आप बैठने का प्रयास करें। 


जाने फायदे 

वज्रासन पाचन तंत्र के लिए किसी रामबाण से कम नहीं है। जो लोग नियमित रूप से इसका अभ्यास करते हैं, उन्हें पाचन संबंधी समस्याएं जैसे कब्ज, एसिडिटी और अल्सर आदि की समस्या नहीं होती। इसके अतिरिक्त इस आसन के अभ्यास के दौरान व्यक्ति का पूरा शरीर खासतौर से पीठ तनी होती है, जिससे व्यक्ति की पीठ सुदृढ़ होती है और पीठ के निचले हिस्से की समस्या और साइटिका की समस्या से राहत दिलाता है। 

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अमूमन लोग पद्मासन में बैठकर ध्यान करते हैं, लेकिन आप व्रजासन में बैठकर भी ध्यान कर सकते हैं। इससे भी आपको लाभ होगा।

वैसे तो यह आसन हर किसी के लिए लाभदायक है, लेकिन महिलाओं को इससे विशेष फायदा होता है। सबसे पहले तो यह मासिक धर्म के दौरान होने वाले दर्द और ऐंठन को कम करता है। वहीं अगर कोई स्त्री गर्भवती है तो उसे भी प्रसव के दौरान पीड़ा कम होती है।

बरते सावधानी

वैसे तो वज्रासन का अभ्यास कोई भी व्यक्ति कभी भी कर सकता है। लेकिन फिर भी इसका अभ्यास करते समय कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए। सबसे पहले तो इसका अभ्यास करते हुए अपने बॉडी पॉश्चर पर ध्यान दें। इसके अतिरिक्त अगर आपके घुटनों में कोई समस्या है या हाल ही में घुटने की सर्जरी हुई है, तो यह आसन न करें। वहीं रीढ़ की हड्डी में समस्या, हर्निया, आंतों में अल्सर होने पर भी विशेषज्ञ की देखरेख के बिना इस आसन का अभ्यास नहीं करना चाहिए।

मिताली जैन







सर्दियों में हो गई है सूखी खांसी तो इससे निपटने के लिए अपनाएं यह उपाय

  •  मिताली जैन
  •  दिसंबर 1, 2020   16:02
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सर्दियों में हो गई है सूखी खांसी तो इससे निपटने के लिए अपनाएं यह उपाय
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एक साल से अधिक उम्र के बच्चे से लेकर व्यस्क सूखी खांसी का उपचार करने के लिए शहद का इस्तेमाल कर सकते हैं। शहद में जीवाणुरोधी गुण होते हैं और यह जलन को कम करने के साथ गले को कोट करने में भी मदद कर सकता है, जिससे आपको इरिटेशन नहीं होती।

ठंड के मौसम में सूखी खांसी होना एक आम स्वास्थ्य समस्या है। यह बच्चों से लेकर बड़ों तक किसी को भी अपनी जद में ले सकती है। सूखी खांसी आपको बहुत अधिक असहज महसूस कराती है, क्योंकि यह आपके फेफड़ों या नाक मार्ग से बलगम, कफ या जलन को दूर करने में असमर्थ हैं। सर्दी या फ्लू होने के बाद सूखी खाँसी आपको हफ्तों तक जकड़ सकती है। ऐसे में इससे निपटने के लिए आप दवाई के अलावा कुछ अन्य उपाय भी अपना सकते हैं। तो चलिए आज हम आपको इन उपायों के बारे में बता रहे हैं−

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शहद

हेल्थ एक्सपर्ट बताते हैं कि एक साल से अधिक उम्र के बच्चे से लेकर व्यस्क सूखी खांसी का उपचार करने के लिए शहद का इस्तेमाल कर सकते हैं। शहद में जीवाणुरोधी गुण होते हैं और यह जलन को कम करने के साथ गले को कोट करने में भी मदद कर सकता है, जिससे आपको इरिटेशन नहीं होती। इसके सेवन के लिए आप रोजाना कई बार चम्मच से शहद ले सकते हैं, या फिर इसे चाय या गर्म पानी में मिलाकर पी सकते हैं।

हल्दी

हल्दी में पाया जाने वाले कर्क्युमिन में एंटी−वायरल, एंटी−इंफलेमेटरी, व एंटी−बैक्टीरियल प्रॉपर्टीज होती हैं। यह सिर्फ सूखी खांसी में ही लाभदायक नहीं है, बल्कि आपको अन्य भी कई हेल्थ प्रॉब्लम्स में लाभ होता है। अगर आपको सूखी खांसी की समस्या है तो आप हल्दी के साथ काली मिर्च डालकर सेवन करें। इससे आपको जल्द और बेहतर परिणाम नजर आएंगे। आप इसे अपने पेय पदार्थों में एक छोटा चम्मच हल्दी व थोड़ा सा काली मिर्च पाउडर डालकर सेवन करें। आप चाहें तो इसकी मदद से चाय भी बनाकर पी सकते हैं। हल्दी का उपयोग सदियों से आयुर्वेदिक दवाओं में श्वसन स्थितियों, ब्रोंकाइटिस और अस्थमा के इलाज के लिए किया जाता है।

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अदरक

सदियों से दादी−नानी सूखी खांसी होने पर अदरक के सेवन की सलाह देती हैं। अदरक में जीवाणुरोधी और एंटी−इंफलेमेंटरी प्रॉपर्टीज होती हैं। यह ना सिर्फ सूखी खांसी से आराम दिलाता है, बल्कि इम्युन सिस्टम को बूस्ट करता है और दर्द से भी राहत दिलाता है। आप इसे चाय में डालकर पी सकते हैं या फिर इसका रस निकालकर उसमें शहद डालकर पीएं।

पुदीना

सूखी खांसी होने पर पुदीने का इस्तेमाल करना भी एक अच्छा विचार है। दरअसल, पेपरमिंट में मेन्थॉल होता है, जो गले में तंत्रिका अंत को सुन्न करने में मदद करता है जो खांसी के कारण इरिटेट हो जाते हैं। यह दर्द से राहत प्रदान कर सकता है और खांसी को कम करता है। पुदीने में जीवाणुरोधी और एंटीवायरल गुण भी पाए जाते हैं। रात में खांसी को कम करने में मदद करने के लिए बिस्तर से ठीक पहले पेपरमिंट चाय पीने की कोशिश करें।

मिताली जैन







जानिए क्या है मिर्गी रोग और कैसे करें इससे बचाव

  •  मिताली जैन
  •  नवंबर 30, 2020   09:30
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जानिए क्या है मिर्गी रोग और कैसे करें इससे बचाव
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मिर्गी एक क्रॉनिक डिसीज है। यह एक ऐसा विकार है, जिसमें मस्तिष्क की तंत्रिका कोशिकाओं की अवस्था बिगड़ जाती है जिससे दौरे पड़ते हैं। कभी−कभी दौरे पड़ने के बाद व्यक्ति बेहोश भी हो जाता है।

मिर्गी रोग को लेकर लोगों के मन में कई तरह की भ्रांतियां है। जो व्यक्ति इस बीमारी से पीडि़त होता है, उसे अक्सर झटके लगते हैं और हो सकता है कि वह बेहोश भी हो जाए। लेकिन आसपास के लोग इसे कुछ और ही समझ लेते हैं। कई बार लोगों के मन में व्याप्त भ्रांतियों के कारण पीडि़त व्यक्ति को सही इलाज नहीं मिल पाता और इस स्थिति में व्यक्ति की स्थिति दिन−ब−दिन बिगड़ती जाती है। तो चलिए आज इस लेख में हम आपको मिर्गी रोग से जुड़ी जरूरी जानकारी दे रहे हैं−

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क्या है मिर्गी रोग

हेल्थ एक्सपर्ट बताते हैं कि मिर्गी एक क्रॉनिक डिसीज है। यह एक ऐसा विकार है, जिसमें मस्तिष्क की तंत्रिका कोशिकाओं की अवस्था बिगड़ जाती है जिससे दौरे पड़ते हैं। कभी−कभी दौरे पड़ने के बाद व्यक्ति बेहोश भी हो जाता है। आमतौर पर मिर्गी के दौरे पड़ने के पीछे कारणों में आनुवांशिक विकार या मस्तिष्क पर आघात या स्ट्रोक आदि प्रमुख होते हैं। जब किसी व्यक्ति को मिर्गी का दौरा पड़ता है तो उसके शरीर में जकड़न होती है, उसके हाथ−पैर तिरछे हो सकते हैं। हो सकता है कि उसे मुंह से झाग भी निकले और वह बेहोश हो जाए। मिर्गी का आमतौर पर दवाओं से इलाज किया जाता है। लेकिन कभी−कभी दवाओं से इलाज नहीं हो पाता तो इस स्थिति में व्यक्ति को एपीलैप्सी सर्जरी की सलाह दी जाती है। यह एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या है और इसे कभी भी हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए।

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यूं करें बचाव

कहते हैं कि इलाज से बेहतर है बचाव। ऐसे में आप भी मिर्गी के विकास के जोखिम को रोकने या कम करने के लिए कुछ उपाय अपना सकते हैं। मसलन, कोशिश करें कि आपके मस्तिष्क पर किसी तरह की चोट ना लगे। इसके लिए आप हमेशा डाइव करते समय सीट बेल्ट बांधे या फिर हेलमेट पहनें ताकि आपका मस्तिष्क सुरक्षित रहे। स्वस्थ आहार खाने, व्यायाम करने और धूम्रपान छोड़ने से स्ट्रोक और हृदय रोग के जोखिम को कम करें। स्ट्रोक भी मिर्गी का एक मुख्य कारण है। इसके अलावा टीकाकरण को हमेशा समय पर करवाएं। यह आपके संक्रमण की संभावना को कम करता है जो कभी−कभी मिर्गी का कारण बन सकता है। सिस्टीसरकोसिस नामक संक्रमण से बचने के लिए अच्छे हाथ धोने और खाद्य सुरक्षा की आदतों का अभ्यास करें, जो दुनिया भर में अधिग्रहित मिर्गी का सबसे आम कारण है। गर्भावस्था के दौरान प्रसव पूर्व देखभाल करें और स्वस्थ रहें।

मिताली जैन







सर्दियों में अस्थमा मरीजों को रहता है अटैक का खतरा, इन घरेलू उपचार से करें बचाव!

  •  सिमरन सिंह
  •  नवंबर 28, 2020   15:36
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सर्दियों में अस्थमा मरीजों को रहता है अटैक का खतरा, इन घरेलू उपचार से करें बचाव!
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सर्दियों में बदलते मौसम और सूखी हवा के कारण अस्थमा की समस्या बढ़ जाती है। इस दौरान शुष्क और ठंडी हवा के कारण मांसपेशियों में भी ऐंठन पैदा होने लगती है। चिकित्सकों के अनुसार सर्दियों में अस्‍थमा रोगी के सांस की नली में सूजन आ जाती है, इसलिए उन्हें सांस लेने में दिक्कत होती है।

सर्दियों की शुरुआत होते ही कई लोगों के लिए बड़ी मुसीबत खड़ी हो जाती हैं। जहां कुछ लोग सर्दी-जुकाम के शिकार हो जाते हैं तो वहीं कुछ लोगों का पुराना सा पुराना चोट का दर्द उठ जाता है। जबकि अस्थमा के रोगियों के लिए तो यह सर्दी एक आफत बन जाती है। सर्दियों में अस्थमा रोगियों के लिए अटैक का खतरा बहुत ज्यादा बढ़ जाता है। उन्हें सांस लेने में दिक्कत और खासी जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है।

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सर्दियों में बदलते मौसम और सूखी हवा के कारण अस्थमा की समस्या बढ़ जाती है। इस दौरान शुष्क और ठंडी हवा के कारण मांसपेशियों में भी ऐंठन पैदा होने लगती है। चिकित्सकों के अनुसार सर्दियों में अस्‍थमा रोगी के सांस की नली में सूजन आ जाती है, इसलिए उन्हें सांस लेने में दिक्कत होती है। शोधकर्ताओं ने बताया है कि सर्दी का मौसम अस्थमा के मरीजों के लिए अच्छा नहीं होता है। इस दौरान उन्हें अस्थमा को नियंत्रण में रखने के लिए कुछ उपाय और अपना खास ख्याल रखना चाहिए। आज हम आपको अस्थमा (दमा) के प्रकार और इसके सर्दियों में बढ़ने वाली समस्या को कम करने के उपायों के बारे में बताने जा रहे हैं, आइए जानते हैं...

दो प्रकार का होता है अस्थमा

आपको बता दें कि अस्थमा या दमा 2 प्रकार के होते हैं। पहला- बाहरी अस्थमा और दूसरा- आंतरिक अस्थमा होता है। बाहरी अस्थमा होने का कारण बाहरी एलर्जी है, जैसे- पालतू जानवरों के बाल, धूल के कण और घर में जमी फफूंद आदि। वहीं, आंतरिक अस्थमा होने का कारण हमारे द्वारा ली गई घातक केमिकल तत्वों वाली सांस होती है। जैसे- स्मोकिंग का धुआं, प्रदूषण की हवा और किसी चीज के जलने का धुआं।

  

सर्दियों में अस्थमा को नियंत्रण में रखने के लिए अपनाएं यह उपाय-

बार-बार हाथ धोएं

अपने हाथों को बार-बार साबुन और पानी से जरूर धोएं। इस तरह से कीटाणुओं के फैलने की संभावना को कम किया जा सकता है। आप चाहें तो हैंड सेनिटाइजर का भी इस्तेमाल कर सकते हैं। अपने घर के बच्चों और अन्य सदस्यों को भी हाथ धोने के लिए कहें, इससे घर में फैलने से बचाव हो सकेगा।

मुंह बंद रखें

अगर आप अस्थमा रोगी हैं तो आपके लिए अच्छा रहेगा कि आप अपने मुंह पर मास्क या कपड़ा लगाएं। मुंह को बंद रखना फेफड़ों के लिए काफी अच्छा रहता है। हमारी नाक में इतनी क्षमता होती है कि वो सांस लेने वाली हवा को फेफड़ों में गर्माहट दे सकती है। 

आग वाली जगह पर बैठने से बचें

भले ही आग के पास बैठकर सर्दियों में गर्माहट मिलती हो लेकिन अस्थमा रोगियों के लिए ये काफी घातक साबित हो सकती हैं। शोध में पाया गया है कि अस्थमा के रोगियों के लिए जलता हुआ तंबाकू और लकड़ी एक जैसा ही होता है। आग से आने वाले धुएं से फेफड़ों में परेशानी हो सकती है। यह अस्थमा मरीजों के लिए खतरनाक हो सकता है।

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घर में ही करें एक्सरसाइज

सर्दियों में बहुत कम तापमान और खूब ठंडी हवा चलना आम बात है। ऐसे में अस्थमा रोगियों के लिए घर में ही रहना सही है। अगर आप अस्थमा मरीज है और एक्सरसाइज या योग करने के लिए जिम या पार्क में जाते हैं तो आपको बता दें कि ये आपके लिए खतरनाक साबित हो सकता है। इसलिए सर्दियों में घर में ही एक्सरसाइज करें। 

अस्थमा का घरेलू उपचार 

- हरी पत्तेदार सब्जियों का सेवन करें, आपके लिए पालक और गाजर का रस फायदेमंद रहेगा।

- अदरक, लहसुन, काली मिर्च और हल्दी को अपने आहार में जरूर शामिल करें, यह सर्दियों में अस्थमा से लड़ने में मदद करते हैं।

- आपको पुराने चावल, कुल्थी की दाल, गेहूं, जौ, मूंग और पटोल का सेवन करना चाहिए।

- गुनगुने पानी का ज्यादा से ज्यादा सेवन करें, ये सर्दियों में आपके लिए काफी फायदेमंद रहेगा।

- अस्थमा रोगियों को शहद का सेवन करना चाहिए।

इन बातों का रखें ख्याल

- बाहर का खाना न खाएं।

- धूम्रपान वाले स्थान पर न खड़े होएं।

- घर से निकलते समय मास्क या स्कार्फ जरूर लगाएं।

- सर्दियों में ज्यादा भीड़भाड़ और प्रदूषण वाले जगहों पर जाने से बचे।

- सर्दियों में संतरे, चुकंदर, नींबू, पालक और मसूर की दाल का ज्यादा सेवन करें।

- सिमरन सिंह