बाइपोलर डिसऑर्डर होने पर नजर आते हैं यह लक्षण, जानिए

बाइपोलर डिसऑर्डर होने पर नजर आते हैं यह लक्षण, जानिए

बाइपोलर डिसऑर्डर के तीन मुख्य लक्षण होते हैं− उन्माद, हाइपोमेनिया और डिप्रेशन। उन्माद का महसूस करते समय बाइपोलर डिसऑर्डर वाले व्यक्ति इमोशनली काफी हाई होती है। वे उत्साहित, आवेगी, उत्साह और ऊर्जा से भरा महसूस कर सकते हैं।

बाइपोलर डिसऑर्डर एक मेंटल हेल्थ कंडीशन है, जो बहुत अधिक मूड स्विंग्स का कारण बनता है। यह एक ऐसी कंडीशन है, जिसमें व्यक्ति कभी−कभी बहुत अधिक दुखी या निराश महसूस करता है तो कभी वह खुद को अत्यधिक उत्साह से भरा या असामान्य रूप से चिड़चिड़ा महसूस करता है। बाइपोलर डिसऑर्डर एक लाइफलॉन्ग कंडीशन है, हालांकि उपचार के जरिए मूड स्विंग्स व अन्य लक्षणों को प्रबंधित किया जा सकता है। तो चलिए आज हम आपको बाइपोलर डिसऑर्डर के बारे में विस्तारपूर्वक बता रहे हैं−

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पहचानें लक्षण

हेल्थ एक्सपर्ट बताते हैं कि बाइपोलर डिसऑर्डर के तीन मुख्य लक्षण होते हैं− उन्माद, हाइपोमेनिया और डिप्रेशन। उन्माद का महसूस करते समय बाइपोलर डिसऑर्डर वाले व्यक्ति इमोशनली काफी हाई होती है। वे उत्साहित, आवेगी, उत्साह और ऊर्जा से भरा महसूस कर सकते हैं। हाइपोमेनिया आमतौर पर उन्माद के समान है, लेकिन यह उतना गंभीर नहीं है। उन्माद के विपरीत, हाइपोमेनिया स्थिति में व्यक्ति अपने काम के स्थान पर या सामाजिक संबंधों में किसी भी परेशानी का कारण नहीं बनते हैं। हालांकि, हाइपोमेनिया वाले लोग अभी भी अपने मूड में बदलाव को नोटिस करते हैं। वहीं डिप्रेशन होने पर बहुत अधिक उदासी, निराशा, एनर्जी लॉस होना, बहुत कम या अधिक सोना, आत्मघाती विचार आदि आते हैं। बाइपोलर डिसऑर्डर की पहचान करना कई बार काफी मुश्किल हो सकता है, क्योंकि ऐसे व्यक्ति में कई लक्षण नजर आते हैं।

बाइपोलर डिसऑर्डर के प्रकार

बाइपोलर डिसऑर्डर के मुख्य तीन प्रकार हैं− बाइपोलर I, बाइपोलर II और साइक्लोथाइमिया। जहां बाइपोलर I में व्यक्ति बहुत अधिक अनियमित व्यवहार होता है। यह कम से कम एक सप्ताह तक रहता है और यह कई बार इतना अधिक होता है कि आपको मेडिकल केयर की जरूरत पड़ सकती है। यह पुरूषों व महिलाओं को समान रूप से प्रभावित कर सकता है।

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वहीं, बाइपोलर II विकार वाले लोग एक प्रमुख अवसादग्रस्तता प्रकरण का अनुभव करते हैं जो कम से कम दो सप्ताह तक रहता है। उनके पास कम से कम एक हाइपोमोनिक एपिसोड है जो लगभग चार दिनों तक रहता है। इस तरह के बाइपोलर II विकार को महिलाओं में अधिक सामान्य माना जाता है। 

साइक्लोथिमिया वाले लोगों में हाइपोमेनिया और अवसाद के एपिसोड होते हैं। ये लक्षण बाइपोलर I या बाइपोलर II विकार के कारण उन्माद और अवसाद से कम और गंभीर हैं। इस स्थिति वाले अधिकांश लोग केवल एक या दो महीने का अनुभव करते हैं, जहां उनका मूड स्थिर होता है।

मिताली जैन





डिस्क्लेमर: इस लेख के सुझाव सामान्य जानकारी के लिए हैं। इन सुझावों और जानकारी को किसी डॉक्टर या मेडिकल प्रोफेशनल की सलाह के तौर पर न लें। किसी भी बीमारी के लक्षणों की स्थिति में डॉक्टर की सलाह जरूर लें।


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