जानिए क्या है ल्यूकोडर्मा और कैसे करें इसका उपचार

जानिए क्या है ल्यूकोडर्मा और कैसे करें इसका उपचार

त्वचा विशेषज्ञ बताते हैं कि ल्यूकोडर्मा का कोई स्थायी उपचार उपलब्ध नहीं है, लेकिन उपचार के जरिए प्रभावित एरिया पर अपीयरेंस में सुधार किया जाता है। इस बीमारी के उपचार के लिए लाइट थेरेपी, दवा और सर्जरी तीन प्रमुख विकल्प मौजूद हैं।

ल्यूकोडर्मा जिसे आमतौर पर विटिलगो के नाम से भी जाना जाता है। यह एक ऐसी बीमारी है, जिसमें स्किन पिगमेंटेशन लॉस होने लगता है, जिससे त्वचा सफेद होने लगती है। त्वचा पर सफेद धब्बे को ल्यूकोडर्मा कहा जाता है। जब स्थित गिंभीर हो जाती है, तो धब्बे खोपड़ी, चेहरे और जननांगों सहित शरीर के लगभग सभी हिस्सों को कवर करते हैं। तो चलिए आज हम आपको ल्यूकोडर्मा के बारे में विस्तारपूर्वक बता रहे हैं−

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पहचानें लक्षण

त्वचा विशेषज्ञ बताते हैं कि ल्यूकोडर्मा का मुख्य संकेत व लक्षण स्किन पर मिल्की व्हाइट पैचेस होते हैं। इसके अलावा भी कुछ लक्षण नजर आते हैं−

बालों का समय से पहले सफ़ेद होना 

श्लेष्मा झिल्ली में कलर लॉस होना

रेटिना के रंग में बदलाव

हालांकि ल्यूकोडर्मा शरीर के किसी भी हिस्से को प्रभावित कर सकता है, पिग्मेंटेशन आमतौर पर शरीर के सन एक्सपोजर एरिया पर होता है।

जानिए कारण

त्वचा विशेषज्ञ बताते हैं कि ल्यूकोडर्मा का सटीक कारण अभी भी अज्ञात है। हालाँकि, यह वायरस के संक्रमण, पारिवारिक इतिहास, तनाव या किसी भी ऑटोइम्यून विकार के कारण हो सकता है।

ल्यूकोडर्मा के प्रकार

ल्यूकोडर्मा आमतौर पर दो प्रकार का होता है− सेगमेंटल और गैर−सेगमेंटल।

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सेगमेंटल ल्यूकोडर्मा

सेगमेंटल ल्यूकोडर्मा के लक्षण प्रारंभिक अवस्था में नजर आने लगते हैं, जो बॉडी के एक साइड व सेगमेंट में नजर आते हैं।

गैर−सेगमेंटल ल्यूकोडर्मा

गैर−सेगमेंटल ल्यूकोडर्मा डिस्कलरेशन के साथ शॉर्ट−लिव बर्स्ट होता है। यह बॉडी के दोनों साइड को इफेक्ट करता है।

ल्यूकोडर्मा का उपचार

त्वचा विशेषज्ञ बताते हैं कि ल्यूकोडर्मा का कोई स्थायी उपचार उपलब्ध नहीं है, लेकिन उपचार के जरिए प्रभावित एरिया पर अपीयरेंस में सुधार किया जाता है। इस बीमारी के उपचार के लिए लाइट थेरेपी, दवा और सर्जरी तीन प्रमुख विकल्प मौजूद हैं।

ल्यूकोडर्मा की रोकथाम

त्वचा विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे कई तरीके हैं, जिनकी मदद से ल्यूकोडर्मा से बचाव संभव है। मसलन, केमिकल्स व सूरज के संपर्क में कम आना व तनाव से खुद को दूर रखकर ल्यूकोडर्मा से बचाव किया जा सकता है।

मिताली जैन





डिस्क्लेमर: इस लेख के सुझाव सामान्य जानकारी के लिए हैं। इन सुझावों और जानकारी को किसी डॉक्टर या मेडिकल प्रोफेशनल की सलाह के तौर पर न लें। किसी भी बीमारी के लक्षणों की स्थिति में डॉक्टर की सलाह जरूर लें।