कोरोना से टीनएजर्स में हो रही है इर्रेगुलर पीरियड्स और दाढ़ी मूंछ ना आना जैसी समस्याएं

कोरोना से टीनएजर्स में हो रही है इर्रेगुलर पीरियड्स और दाढ़ी मूंछ ना आना जैसी समस्याएं

12 से 16 वर्ष के लड़कों में हाई कोलेस्ट्रोल,चिड़चिड़ापन, घुटने और कमर में दर्द की समस्या देखने को मिली। वहीं लड़कियों में मोटापा, अनियमित मासिक धर्म और इंसुलिन का बढ़ा हुआ स्तर देखने को मिलेगा। ऐसी किशोरों की संख्या करीब 30 प्रतिशत थी। वहीं, माहवारी की अनियमिता से जूझ रही लड़कियों की संख्या करीब 60 प्रतिशत थी।

पिछले 2 सालों से दुनियाभर में कोराना वायरस के कारण कोहराम मचा हुआ है। कोरोना संक्रमण से सभी उम्र के लोगों पर प्रभाव पड़ा है। हालांकि, बच्चे और किशोर कोरोना संक्रमण से काफी हद तक बचे रहे। लेकिन इस वर्ग पर भी अप्रत्यक्ष रूप से कोरोना का प्रतिकूल प्रभाव देखने को मिला। मध्यप्रदेश के भोपाल शहर में हुए एक शोध में यह पाया गया कि कोरोनाकाल में बच्चों के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर बुरा असर हुआ। इस शोध में पाया गया कि कोरोनाकाल के कारण किशोरों में हार्मोनल असंतुलन की समस्या हुई, जिसका एक कारण मानसिक तनाव भी है।

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इस शोध में 12 से 16 वर्ष के लड़कों में हाई कोलेस्ट्रोल,चिड़चिड़ापन, घुटने और कमर में दर्द की समस्या देखने को मिली। वहीं लड़कियों में मोटापा, अनियमित मासिक धर्म और इंसुलिन का बढ़ा हुआ स्तर देखने को मिलेगा। ऐसी किशोरों की संख्या करीब 30 प्रतिशत थी। वहीं, माहवारी की अनियमिता से जूझ रही लड़कियों की संख्या करीब 60 प्रतिशत थी।

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भोपाल में जून 2020 से दिसंबर 2021 तक 100 किशोरों पर हुए शोध में यह बात सामने आई थी अनियमित दिनचर्या और खराब जीवनशैली के कारण हार्मोनल इंबैलेंस की समस्या हुई। लड़कों में चिड़चिड़ापन मोटापा या वक्त पर दाढ़ी मूंछ ना आना जैसी समस्या होती है। वही लड़कियों में मोटापा मासिक धर्म में अनियमितता और अनचाहे बाल आने की समस्या होती है। हेल्थ एक्सपर्ट्स के मुताबिक लॉकडाउन और कोरोनावायरस हुई अनियमित जीवनशैली, जंक फूड का अधिक सेवन और व्यायाम ना करना जैसे कारणों की वजह से ऐसा हुआ। किशोरावस्था में कुछ हार्मोन्स स्त्रावित होते हैं जो बच्चों के विकास में सहायक होते हैं। अगर ये हार्मोंस असंतुलित हो जाएं तो इससे कई समस्याएं होने लगती है।

- प्रिया मिश्रा





डिस्क्लेमर: इस लेख के सुझाव सामान्य जानकारी के लिए हैं। इन सुझावों और जानकारी को किसी डॉक्टर या मेडिकल प्रोफेशनल की सलाह के तौर पर न लें। किसी भी बीमारी के लक्षणों की स्थिति में डॉक्टर की सलाह जरूर लें।