• समय से पहले आपके बच्चे को बड़ा बना देगा तनाव, रखें उसका ख्याल

मिताली जैन Jul 21, 2021 12:20

अगर बच्चों में तनाव के अन्य दुष्प्रभावों की बात की जाए तो यह कई मायनों में बच्चों को नुकसान पहुंचाता है। टॉक्सिक तनाव में आपके बच्चे के मस्तिष्क रसायन विज्ञान, मस्तिष्क शरीर रचना विज्ञान और यहां तक कि जीन अभिव्यक्ति को बदलने की क्षमता होती है।

तनाव के विपरीत प्रभाव से तो हम सभी वाकिफ है और आज के समय में इससे केवल बड़े ही प्रभावित नहीं है, बल्कि बच्चे भी इसकी जद में आ चुके हैं। तनाव कई मायनों में बच्चों को प्रभावित करता है। तनाव के कारण बच्चों में हरवक्त चिंता, नींद ना आना, भूख में कमी, चिड़चिड़ा व उदासी जैसे लक्षण नजर आते हैं। लेकिन क्या आप इस बात से वाकिफ है कि यह आपके बच्चे को समय से पहले बड़ा बना सकता है। इससे वह अपने बचपन को कहीं खो देता है। जी नहीं, ऐसा हम नहीं कह रहे हैं। बल्कि रिसर्च में भी यह बात साबित हो चुकी है। तो चलिए जानते हैं बच्चों पर पड़ने वाले तनाव के नकारात्मक प्रभावों के बारे में−

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क्या कहती है रिसर्च

साल 2018 में रेडबौड विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं द्वारा की गई एक रिसर्च से इस बात का खुलासा हुआ कि तनाव किशोरावस्था के दौरान मस्तिष्क की तेजी से परिपक्वता का कारण बन सकता है।  इस रिसर्च में शोधकर्ताओं ने पाया कि तनाव के कारण प्रीफ्रंटल कोर्टेक्स और एमिगडला में तेजी से परिपक्वता आती है। यह किशोरावस्था में बच्चों की भावनाओं को नियंत्रित करने में एक अहम् रोल अदा करते हैं। इसके विपरीत, शोधकर्ताओं ने पाया कि जीवन में बाद में अनुभव किए गए तनाव ने किशोर मस्तिष्क की धीमी परिपक्वता को जन्म दिया। इस तरह अगर बचपन में बच्चे बहुत अधिक तनाव से गुजरते हैं तो वे समय से पहले ही बड़े हो जाते हैं।

होते हैं यह प्रभाव भी

वहीं, अगर बच्चों में तनाव के अन्य दुष्प्रभावों की बात की जाए तो यह कई मायनों में बच्चों को नुकसान पहुंचाता है। टॉक्सिक तनाव में आपके बच्चे के मस्तिष्क रसायन विज्ञान, मस्तिष्क शरीर रचना विज्ञान और यहां तक कि जीन अभिव्यक्ति को बदलने की क्षमता होती है। टॉक्सिक तनाव विकासशील मस्तिष्क के आर्किटेक्चर को कमजोर करता है, जिससे सीखने, व्यवहार और शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य में आजीवन समस्याएं हो सकती हैं।

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ऐसे निकालें हल

हेल्थ एक्सपर्ट कहते हैं कि अगर आपको पिछले कुछ समय में बच्चे में बदलाव नजर आ रहे हैं तो इसे नजरअंदाज ना करें। कई बार बच्चे बोलकर अपनी बात नहीं बता पाते हैं। ऐसे में यह माता−पिता की जिम्मेदारी बनती है कि वह अपने बच्चे की परेशानियों को समझे और उन्हें दूर करने का प्रयास करें। इसके लिए आप उनसे बात कर सकते हैं। अगर वह आपसे अपनी बात शेयर नहीं कर पा रहे हैं तो ऐसे में उनके दोस्तों से बात करने का प्रयास करें। अगर आपको तब भी सफलता ना मिले या बच्चे में गंभीर लक्षण नजर आएं तो प्रोफेशनल हेल्प भी ली जा सकती है।

मिताली जैन