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फिटनेस मंत्रा

पर्सनल ट्रेनर का चयन करने से पहले रखें इन बातों का ख्याल, वरना पछताएंगे

By मिताली जैन | Publish Date: Jul 9 2018 5:29PM

पर्सनल ट्रेनर का चयन करने से पहले रखें इन बातों का ख्याल, वरना पछताएंगे
Image Source: Google
बदलते समय में लोग अपनी फिटनेस को लेकर काफी सतर्क हो गए हैं और शायद यही कारण है कि आजकल आपको बहुत से लोग जिम में एक्सरसाइज करते हुए दिख जाएंगे। इतना ही नहीं, कुछ लोग तो बेहतर रिजल्ट पाने के लिए पर्सनल ट्रेनिंग भी लेते हैं। लेकिन वास्तव में आपको फायदा तभी होता है, जब आपका ट्रेनर भी उतना ही अच्छा हो। इसलिए पर्सनल ट्रेनर का चयन करते समय आपको कुछ बातों का विशेष रूप से ध्यान रखना चाहिए। तो चलिए जानते हैं इसके बारे में−
 
चेक करें रेफरेंस
जब भी आप किसी पर्सनल ट्रेनर को खुद के लिए चुनें तो पहले यह अवश्य देखें कि उसने पहले किस किसको ट्रेनिंग दी है। साथ ही उसके रिजल्ट कैसे रहे हैं। इसके लिए आप जिम से ही उन लोगों के नंबर लेकर उनसे बात करें। इससे आपको पता चल जाएगा कि आप जिसके हाथों में खुद को सौंप रहे हैं, वह वास्तव में कितना काबिल है।
 
जरूरी है ट्रायल
किसी भी पर्सनल ट्रेनर को हायर करने से पहले आप करीबन पांच से सात दिन तक ट्रायल अवश्य लें। इतना ही नहीं, ट्रायल के दौरान आप अपने ट्रेनर से इस बारे में भी बात करें कि आपकी बॉडी कैसी है और वह आपकी बॉडी पर किस तरह काम करेगा। इतना ही नहीं, वह सिर्फ आपको एक्सरसाइज करवाता है या फिर आपको हेल्दी रहने के लिए मोटिवेटिड भी करता है या नहीं। एक सप्ताह के भीतर ही आपको उसके गुणों का काफी हद तक अंदाजा हो जाएगा। 
 
बी रिसनेबल
कुछ ट्रेनर ऐसे होते हैं जो हर किसी को एक ही तरह की एक्सरसाइज कराते हैं लेकिन हर व्यक्ति की शारीरिक समस्याएं अलग−अलग होती हैं और उसी को ध्यान में रखते हुए एक्सरसाइज कराना आवश्यक है। इसलिए अगर आपका ट्रेनर आपको ट्रायल के दौरान कोई एक्सरसाइज करवा रहा है तो आप उससे यह अवश्य पूछें कि वह एक्सरसाइज उसकी बॉडी को किस तरह फायदा पहुंचाएगी। अगर आपका ट्रेनर आपको एक्सरसाइज करवाने के साथ−साथ उसके बेनिफिट और प्रिकॉशन्स के बारे में बताता है तो इसका अर्थ है कि उसे अपने काम के बारे में जानकारी है।
 
सीपीआर की जानकारी
बहुत से लोगों को एक्सरसाइज के दौरान अप्रिय घटना का सामना करना पड़ता है। मसलन, हो सकता है कि किसी एक्सरसाइज के बाद आपको सिर में तेज दर्द हो या फिर आप बेहोश हो जाएं। इस स्थिति में ट्रेनर को सीपीआर देना आना चाहिए। एक अच्छे ट्रेनर के लिए सिर्फ एक्सरसाइज करवाना ही जरूरी नहीं होता, बल्कि वह अपने क्लाइंट की डाइट से लेकर उसकी फिजिकल प्रॉब्लम्स पर भी पूरी तरह फोकस करता है। इतना ही नहीं, उसे इस बात का भी ज्ञान होता है कि एक्सरसाइज के दौरान आनी वाले मेडिकल प्रॉब्लम्स को किस तरह हैंडल किया जाता है। 
 
मनी माइंडेड
कुछ जिम जान−बूझकर पैसा कमाने के लिए पर्सनल ट्रेनिंग की सुविधा मुहैया कराते हैं। इतना ही नहीं, आपको जो ट्रेनर दिया गया है, अगर वह भी मनी माइंडेड है तो भी आपको ऐसे व्यक्ति से ट्रेनिंग नहीं लेनी चाहिए। दरअसल, मनी माइंडेड लोगों को अपने क्लाइंट्स की सेहत से ज्यादा पैसा कमाने की चाह होती है। ऐसे लोगों से ट्रेनिंग लेने के बाद आपको वह रिजल्ट नहीं मिल सकता, जिसकी आपको चाह होती है।
 
-मिताली जैन
 
फिटनेस टेनर आयुष सेठी से बातचीत पर आधारित

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