मकर संक्रांति पर क्यों उड़ायी जाती है पतंग ? क्या इसका भी है कोई धार्मिक महत्व ?

मकर संक्रांति पर क्यों उड़ायी जाती है पतंग ? क्या इसका भी है कोई धार्मिक महत्व ?

मकर संक्रांति के पर्व पर पतंग उड़ाना सेहत के लिए विशेष रूप से लाभदायी माना गया है। हालांकि पतंग उड़ाने के पीछे कोई धार्मिक पक्ष नहीं है लेकिन फिर भी सेहत को देखते हुए इस दिन पतंग उड़ाना अच्छा माना जाता है।

भारत के प्रमुख त्योहारों में शुमार मकर संक्रांति का पर्व प्रत्येक वर्ष जनवरी माह में मनाया जाता है। यूं तो अन्य त्योहारों की भांति मकर संक्रांति के अवसर पर भी कुछ परंपराओं का पालन किया जाता है। लेकिन इन परंपराओं और मान्यताओं के बीच एक चीज जो पूरे त्योहार में आकर्षण का केन्द्र बनकर सामने आती है, वह है पतंग उड़ाना। मकर संक्रांति के मौके पर न सिर्फ हर उम्र के लोग पूरे जोश और मस्ती से पतंग उड़ाते हैं, बल्कि कई जगहों पर तो पतंगोत्सव का एक भव्य आयोजन भी किया जाता है या फिर कई तरह की प्रतियोगिताएं भी आयोजित की जाती हैं। जिसमें पूरे देश के पतंगबाज शामिल होते हैं और अपने दांव−पेचों से अपना ही नहीं दूसरों का भी मनोरंजन करते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि वास्तव में इस मौके पर पतंग क्यों उड़ाई जाती है। नहीं न, तो चलिए आज हम आपको इस बारे में बताते हैं−

सेहत के लिए लाभदायक

मकर संक्रांति के पर्व पर पतंग उड़ाना सेहत के लिए विशेष रूप से लाभदायी माना गया है। हालांकि पतंग उड़ाने के पीछे कोई धार्मिक पक्ष नहीं है लेकिन फिर भी सेहत को देखते हुए इस दिन पतंग उड़ाना अच्छा माना जाता है। अमूमन सर्दी के मौसम में लोग अपने घरों में कम्बल में रहना पसंद करते हैं लेकिन उत्तरायण के दिन अगर कुछ देर धूप के संपर्क में रहा जाए तो इससे शरीर के कई रोग स्वतः ही नष्ट हो जाते हैं। वैज्ञानिक तथ्यों के अनुसार, उत्तरायण में सूर्य की गर्मी शीत के प्रकोप व शीत के कारण होने वाले रोगों को समाप्त करने की क्षमता रखती है। ऐसे में घर की छतों पर जब लोग पतंग उड़ाते हैं तो सूरज की किरणें एक औषधि की तरह काम करती हैं। शायद इसलिए मकर संक्रांति के दिन को पतंग उड़ाने का दिन भी कहा जाता है।


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शुभता की शुरूआत

मकर सक्रांति के पर्व को बेहद पुण्य पर्व माना जाता है। कहा जाता है कि इस पर्व से ही शुभ कार्यों की शुरूआत होती है क्योंकि मकर संक्रांति के दिन से ही सूर्य उत्तर की ओर गमन करने लगता है। ऐसे में शुभता की शुरूआत का जश्न मनाने के लिए पतंग का सहारा लिया जाता है। वैसे भी पतंग को शुभता, आजादी व खुशी का प्रतीक माना जाता है, इसलिए स्वतंत्रता दिवस पर भी पतंगें उड़ाई जाती हैं। ठीक इसी तरह, घर में शुभता के आगमन की खुशी में मकर संक्रांति पर पतंग उड़ाने की प्रथा है।

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इसका रखें ध्यान

यूं तो पतंगें अपने साथ खुशी का माहौल लेकर आती हैं, लेकिन अगर कुछ बातों का ध्यान न रखा जाए तो खुशी को गम में बदलने में पल भर का भी समय नहीं आता। मकर संक्रांति के दिन पतंग उड़ाते समय इन बातों का विशेष रूप से ख्याल रखें। सबसे पहले तो पतंग उड़ाते समय किसी सुरक्षित स्थान का ही चयन करें। अगर आप छत पर पतंग उड़ा रहे हैं तो मुंडेर का ध्यान रखें। चाइना के मांझे का प्रयोग न करें और न ही मांझा की धार को तेज करने के लिए बल्ब का चूरा व सरस आदि का प्रयोग करें। यह जानलेवा हो सकता है। पतंग उड़ाने से पहले सनस्क्रीन व गॉगल्स का प्रयोग करें। सूरज की सीधी किरणों का आंखों या त्वचा पर पड़ना हानिकारक हो सकता है। बहुत तेज धूप में पतंग उड़ाने से परहेज करें। पतंग की डोर से अंगुली को नुकसान न पहुंचे, इसके लिए पतंग उड़ाते समय हाथों में दस्ताने पहनें। पतंग उड़ाते समय अगर वह फट जाए तो उसे तुरंत कूड़े में फेंके।

-मिताली जैन





डिस्क्लेमर: इस लेख के सुझाव सामान्य जानकारी के लिए हैं। इन सुझावों और जानकारी को किसी डॉक्टर या मेडिकल प्रोफेशनल की सलाह के तौर पर न लें। किसी भी बीमारी के लक्षणों की स्थिति में डॉक्टर की सलाह जरूर लें।