एसिडिटी की समस्या से निजात पाने के लिए दवाई नहीं करें यह योगासन

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मिताली जैन । Mar 02, 2019 5:27PM
सेतुबंधासन आसन का अभ्यास करने के लिए सबसे पहले पीठ के बल लेट जाएं और अपने दोनों पैरों को कूल्हे की तरफ खींचें। अब दोनों पैरों में थोड़ा अंतर रखकर हाथों से पैरों के टखनों को पकड़ लीजिए। अब अपनी पीठ, कूल्हे और जांघों के साथ ऊपर की ओर उठने की कोशिश करें।

आज के समय में लोगों के खानपान की आदतों में काफी अनियमितता देखने को मिलती हैं। कभी−कभी काम के चलते मील स्किप करना या फिर बाहर का हैवी मसालेदार और ऑयली भोजन करना। इस तरह की आदतों के चलते लोगों को एसिडिटी की समस्या का सामना करना पड़ता है। अमूमन देखने में आता है कि लोग एसिडिटी होने पर दवाइयों का सेवन करते हैं। लेकिन अगर आप चाहें तो कुछ योगासनों का नियमित अभ्यास करके एसिडिटी की समस्या को हमेशा के लिए अलविदा कह सकते हैं−

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सेतुबंधासन

इस आसन का अभ्यास करने के लिए सबसे पहले पीठ के बल लेट जाएं और अपने दोनों पैरों को कूल्हे की तरफ खींचें। अब दोनों पैरों में थोड़ा अंतर रखकर हाथों से पैरों के टखनों को पकड़ लीजिए। अब अपनी पीठ, कूल्हे और जांघों के साथ ऊपर की ओर उठने की कोशिश करें। कमर को ज्यादा से ज्यादा ऊपर उठा लें और सिर व कंधे जमीन पर ही रहने दें। इस दौरान आपकी ठुड्डी आपकी छाती से टच करती हो। अब इस स्थिति में कुछ देर रूकें। अब सामान्य स्थिति में वापिस लौटने से पहले पीठ को जमीन पर लाएं। अंत में कुछ क्षण रिलैक्स करें और फिर से इस आसन का अभ्यास करें। वैसे तो इस आसन से एसिडिटी से आराम मिलता है, लेकिन अगर आपको किसी भी तरह की पीठ संबंधित समस्या है तो इस आसन का अभ्यास न करें।

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हलासन

अगर आपने अभी योगासन करना शुरू किया है तो इसका अभ्यास करना थोड़ा कठिन हो सकता है। इसलिए किसी विशेषज्ञ की देख−रेख में ही यह आसन करें। साथ ही रीढ़ संबंधी गंभीर रोग अथवा गले में कोई गंभीर रोग होने की स्थिति में यह आसन न करें। इस आसन का अभ्यास करने के लिए सबसे पहले पीठ के बल ले जाएं। दोनों पैर पूरी तरह सीधे और एक दूसरे से सटे हुए होने चाहिए। अब एक गहरी सांस लेते हुए दोनों पैरों को एक साथ ऊपर लेकर आएं। शरीर के ऊपरी हिस्से से पहले 30 डिग्री, फिर 60, अब दोनों हाथों को कमर पर टिकाते हुए पैरों को 90 डिग्री पर लाएं। अब धीरे−धीरे सांस छोड़ते हुए पैरों को कमर से आगे चेहरे की तरफ लेकर जाएं। ध्यान रखें कि घुटने से पांव मुड़ने नहीं चाहिए। धीरे−धीरे पीछे जाते हुए पैरों को जमीन पर टिकाएं। अपनी दृष्टि नाभि या नाक पर केंद्रित रखें। कुछ क्षण इस अवस्था में रूकें। अब धीरे−धीरे श्वास लेते हुए पैरों को ऊपर उठाते हुए पूर्व रूप में आ जाएं। 

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सुप्तबद्धकोणासन

इस आसन का अभ्यास करने के लिए सर्वप्रथम शवासन की मुद्रा में पीठ के बल लेट जाएं। अब बांहों को शरीर के दोनों तरफ पैर की दिशा में फैलाकर रखें, इस स्थिति में हथेलियां छत की ओर होना चाहिए। इसके बाद घुटनो को मोड़कर और तलवों को जमीन से लगाकर रखें। दोनों तलवों को नमस्कार की मुद्रा में एक दूसरे के करीब लाकर जमीन से लगाएं। जितना संभव हो एडि़यों को जंघा की ओर लाएं। इस मुद्रा में 30 सेकेण्ड से 1 मिनट तक बने रहें। हाथों से दोनों जंघाओं को दबाएं और धीरे धीरे सामान्य स्थिति में लौट आएं।

मिताली जैन

डिस्क्लेमर: इस लेख के सुझाव सामान्य जानकारी के लिए हैं। इन सुझावों और जानकारी को किसी डॉक्टर या मेडिकल प्रोफेशनल की सलाह के तौर पर न लें। किसी भी बीमारी के लक्षणों की स्थिति में डॉक्टर की सलाह जरूर लें।

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