नासा ने खोजा नया ग्रह जहां मात्र 7 घंटे में होता नया साल!

By अमृता गोस्वामी | Publish Date: Jan 16 2018 4:22PM
नासा ने खोजा नया ग्रह जहां मात्र 7 घंटे में होता नया साल!
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अंतरिक्ष में एक ग्रह ऐसा भी है जो सूर्य के चक्कर तो नहीं लगाता पर इसका अपना तारा है जिसका चक्कर यह मात्र 7 घंटे में पूरा कर लेता है यानि कि इस ग्रह पर यदि नये साल का सैलिब्रेशन किया जाए तो यहां हर सात घंटे के अंतराल पर नया साल सैलिब्रेट किया जा सकता है।

दोस्तों, यह तो हम सभी जानते हैं कि हमारी पृथ्वी को सूर्य का एक चक्कर पूरा करने में 365 दिनों का समय लगता है और इन्हीं हर 365 दिनों के उपरांत हम पृथ्वीवासी नए जोश, नई उमंग और नए संकल्पों के साथ नए साल का स्वागत पूरे जोर-शोर, हर्षोउल्लास के साथ करते हैं पर, गौर किया जाए तो ब्रह्मांड में पृथ्वी की ही तरह और भी बहुत सारे ग्रह मौजूद हैं और ये सभी ग्रह हमारे पृथ्वी ग्रह की ही तरह अपने किसी न किसी तारे के इर्द-गिर्द ठीक उसी प्रकार से चक्कर लगा रहे हैं जैसे पृथ्वी अपने तारे सूर्य का चक्कर लगाती है।

सूर्य का चक्कर पृथ्वी के अलावा सात अन्य ग्रह बुध, शुक्र, मंगल, बृहस्पति, शनि, युरेनस और नेपच्यून भी लगाते हैं, इन ग्रहों द्वारा तारे सूर्य का चक्कर लगाने में लगने वाले समय की बात की जाए तो सभी ग्रहों का काल अलग-अलग होता है और आपको जानकर आश्चर्य होगा कि अंतरिक्ष में एक ग्रह ऐसा भी है जो सूर्य के चक्कर तो नहीं लगाता पर इसका अपना तारा है जिसका चक्कर यह मात्र 7 घंटे में पूरा कर लेता है यानि कि इस ग्रह पर यदि नये साल का सैलिब्रेशन किया जाए तो यहां हर सात घंटे के अंतराल पर नया साल सैलिब्रेट किया जा सकता है।
 
इस नए ग्रह की खोज हाल ही में नासा के केपलर टेलिस्कोप से की गई जिसके मुताबिक इस ग्रह का ऑरबिटल पीरियड महज 6.7 घंटों का होता है। गौरतलब है कि नासा का केपलर टेलीस्कोप के2 अपने प्लैनेट हेटिंग मिशन के दौरान करीब 2300 ग्रहों की खोज कर चुका है. नासा द्वारा खोजे नए ग्रह को एपिक 246393474 बी नाम दिया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक ग्रह एपिक 246393474 बी पृथ्वी से पांच गुना अधिक बड़ा है। इस ग्रह पर आयरन की मात्रा 70 प्रतिशत के आसपास हो सकती है।
 


शोधकर्ताओं के अनुसार इस नए ग्रह की खोज अत्यंत खास है, इस ग्रह का एक्यूबीरियम तापमान 2039के है। यहां का पूरा वायुमंडल स्टेलर रेडियेशन की वजह से बर्बाद हो चुका है, किन्तु अपने तारे के बेहद करीब होने के बावजूद भी यह ग्रह अभी तक वाष्प में नहीं बदला है। यदि 7 घंटों में एक साल के कॉन्सेप्ट को ध्यान में रखा जाए तो इस ग्रह पर रहना नामुमिकन है।
 
वैज्ञानिकों के मुताबिक साल में महज सात घंटों वाले इस ग्रह पर एक दिन कितने घंटों का होगा हालांकि इसका पता अभी नहीं लगाया जा सका है किन्तु पृथ्वी के डे-टू-इयर रेशियो के इस्तेमाल से यह जानने के प्रयत्न किये जा रहे हैं।
 
- अमृता गोस्वामी

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