जमीन के नीचे दबा है हीरे का विशाल पहाड़, हजारों ट्रिलियन टन हीरा संभव

By अमृता गोस्वामी | Publish Date: Oct 1 2018 3:06PM
जमीन के नीचे दबा है हीरे का विशाल पहाड़, हजारों ट्रिलियन टन हीरा संभव
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हीरे की चमक किसे नहीं लुभाती। इसकी खूबसूरती और आकर्षण के केवल महिलाएं ही नहीं पुरूष भी कायल हैं। जैसा कि कहा जाता है कि हीरा सदा के लिए, हीरा सदियों-सदियों तक न तो घिसता है और न ही इसके स्वरूप में ही कोई फर्क पड़ता है।

हीरे की चमक किसे नहीं लुभाती। इसकी खूबसूरती और आकर्षण के केवल महिलाएं ही नहीं पुरूष भी कायल हैं। जैसा कि कहा जाता है कि हीरा सदा के लिए, हीरा सदियों-सदियों तक न तो घिसता है और न ही इसके स्वरूप में ही कोई फर्क पड़ता है। सबसे कठोर इस पदार्थ की खासियत है कि इसे तराशने के लिए बेहद नाजुकता बरतनी पड़ती है। 
 
सौन्दर्य के साथ-साथ हीरे को सम्पन्नता से भी जोड़ा जाता है। मात्र 1 कैरेट वजन का हीरा खरीदना भी हर किसी के पहुंच की बात नहीं है। सम्पन्न व्यक्ति ही इसे खरीद सकते हैं। पर, निराश होने की बात नहीं है। हाल ही में हुई वैज्ञानिकों की एक नई खोज पर नजर डालें तो हीरा सदा के लिए ही नहीं सबके लिए भी संभव हो सकेगा।
 


वैज्ञानिकों ने हाल ही में जमीन के नीचे हीरे का ऐसा विशालतम खजाना दबे होने का दावा किया है जो सैंकड़ों साल की खुदाई के बाद भी खत्म नहीं होगा। वैज्ञानिकों के अनुसार यह खजाना जमीन की ऊपरी परत के काफी नीचे दबा है। अमरीका में मैसाच्युसट्स इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नॉलजी के रिसर्च वैज्ञानिक डॉ. अर्लिच फौल का कहना है कि हाल ही में सेसेमिक तकनीक के जरिए जब यह पता लगाने की कोशिश की जा रही थी कि धरती से ध्वनि की तरंगें नीचे कैसे गुजरती हैं इस दौरान धरती के नीचे हीरे के इस अपार भंडार के होने की जानकारी मिली।
 
वैज्ञानिक के मुताबिक जांच में जमीन के नीचे जिन पदार्थों की आवाजें मिली हैं उनमें हीरा भी है। अनुमान लगाया जा रहा है कि यहां हीरे की विशालकाय चट्टान उलटे पहाड़ के रूप में दबी हैं जिसकी खुदाई से हजारों ट्रिलियन टन हीरा प्राप्त हो सकता है। इस हीरे की मात्रा का अंदाजन धरती पर पाए जाने वाले हीरे से करीब हजार गुणा अधिक होगी। अमरीका के मैसाच्युसट्स इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नॉलजी के वैज्ञानिकों की यह खोज जिओकैमिस्ट्री, जियोफिजिक्स, जियोसिस्टम्स जर्नल में प्रकाशित हुई है।
 
वैज्ञानिकों ने हालांकि इस विशालकाय खजाने की प्राप्ति को लेकर अफसोस जताया है। उनका कहना है कि हीरे की यह चट्टान उल्टे पहाड़ के रूप में जमीन की सतह से 100 से 150 मील की गहराई में है, जहां पहुंचना अभी तक इंसान के लिए संभव नहीं हो पाया है। वैज्ञानिकों के अनुसार हीरे धरती की गहराई में तेज दबाव और अत्याधिक तापमान में कार्बन से बनते हैं। सतह के पास ये तभी आते हैं जब ज्वालामुखी फटे, जो दुर्लभ बात है। इस तरह के ज्वालामुखी विस्फोट लाखों-करोड़ों सालों में एक बार होते हैं। 


 
पर, दोस्तों जैसा कि कहा जाता है कि उम्मीद पर दुनिया कायम है तो उम्मीद तो लगाई ही जा सकती है कि भविष्य में कभी कोई युक्ति निकाली जा सकेगी जिससे यह हीरा हम तक पहुंच सकेगा। 
 
-अमृता गोस्वामी


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