महारानी की अंत्येष्टि संपन्न होने के बाद महाराजा चार्ल्स तृतीय के सामने हैं बड़ी चुनौतियां

Charles
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सिटी यूनिवर्सिटी लंदन में आधुनिक राजशाही के इतिहास की प्रोफेसर अन्ना व्हाइटलॉक ने कहा कि चार्ल्स ‘निरंतरता बनाए रखने’ की कोशिश करेंगे, जबकि यह भी संकेत देंगे कि राज व्यवस्था बदलने के लिए तैयार हैं। लेकिन उनके सामने ढेर सारे सवाल कायम हैं।

ब्रिटेन की महारानी एलिजाबेथ द्वितीय की अंत्येष्टि संपन्न होने के बाद महाराजा चार्ल्स तृतीय को राजशाही व्यवस्था को लेकर उठने वाले कई मुद्दों का सामना करना होगा। सात दशकों तक महारानी के शासन के बाद पद संभालने वाले महाराजा चार्ल्स के सामने 1000 साल पुरानी राजशाही को महफूज भी रखना है लेकिन चुनौतियां अपार हैं। महारानी के लिए लोगों में स्नेह का मतलब यह था कि हाल के वर्षों में ब्रिटिश समाज में राजशाही की भूमिका पर शायद ही कभी बहस हुई हो।

लेकिन, अब जब वह दुनिया में नहीं हैं, तो शाही परिवार को इस सवाल का सामना करना पड़ सकता है कि क्या आधुनिक, बहुसांस्कृतिक राष्ट्र में शाही व्यवस्था प्रासंगिक है। एलिजाबेथ की 1952 में ताजपोशी के समय की तुलना में दुनिया बहुत बदल चुकी है। उपनिवेशवाद और गुलामी के इतिहास पर वैश्विक स्तर पर पुनरावलोकन के साथ ब्रिटेन के शहरों और ऑक्सफोर्ड, कैम्ब्रिज जैसे विश्वविद्यालयों में प्रदर्शनकारियों के एक समय ब्रिटिश साम्राज्य के प्रतीक मूर्तियों को गिराने या विकृत करने की भी घटनाएं हुई हैं।

सिटी यूनिवर्सिटी लंदन में आधुनिक राजशाही के इतिहास की प्रोफेसर अन्ना व्हाइटलॉक ने कहा कि चार्ल्स ‘‘निरंतरता बनाए रखने’’ की कोशिश करेंगे, जबकि यह भी संकेत देंगे कि राज व्यवस्था बदलने के लिए तैयार हैं। लेकिन उनके सामने ढेर सारे सवाल कायम हैं। व्हाइटलॉक ने कहा, ‘‘बहु-आस्था, बहु-जातीय समाज में राजशाही का क्या स्थान है? क्या राष्ट्र के भरोसे को बनाए रखने के लिए यह अब सही व्यवस्था है? और क्या विदेश में ब्रिटेन का प्रतिनिधित्व करने वाला महाराजा होना चाहिए? अथवा, क्या यह व्यवस्था समावेशी, विविध समाज का प्रतिनिधित्व नहीं करती है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘एक और सवाल है कि विविध नस्ल, धर्म, रंग वाले समाज में 73 वर्षीय व्यक्ति इन मुद्दों का सामना करने के लिए तैयार हैं।’’ चार्ल्स ने सिंहासन पाने के लिए किसी भी अन्य उत्तराधिकारी की तुलना में अधिक समय तक प्रतीक्षा की और कई मायनों में वह राजशाही के आधुनिकीकरण का प्रतीक हैं। वह पहले महाराजा हैं जिनकी शिक्षा दीक्षा राज परिवार से बाहर हुई, विश्वविद्यालय की डिग्री हासिल करने वाले वह पहले व्यक्ति हैं और और ऐसी शख्सियत भी, जो मीडिया की लगातार बढ़ती चकाचौंध में शाही व्यवस्था के प्रति सम्मान भी फीका पड़ते देख रहे हैं।

उन्हें पर्यावरण मुहिम के शुरुआती पैरोकार के रूप में सराहना मिलीऔर वंचित समुदायों के युवाओं के जीवन को बेहतर बनाने के लिए काम करने को लेकर भी तारीफ मिली है। महारानी की अंत्येष्टि के दौरान उनके सम्मान में सेंट लुसियन समुदाय की तरफ से वेस्टमिंस्टर एबे में लिओन पेश हुए। यह समुदाय द्वितीय विश्व युद्ध के बाद कैरेबिया से प्रवासियों के रूप में ब्रिटेन आया था। लिओन को उम्मीद है कि चार्ल्स राजशाही को एक नयी दिशा में ले जाएंगे।

ब्रिटेन के महाराजा होने के अलावा चार्ल्स 14 ‘क्षेत्रों या देशों’ के लिए राष्ट्र के प्रमुख हैं, जिन्होंने पूर्व ब्रिटिश साम्राज्य से स्वतंत्रता प्राप्त करने के बाद सम्राट को अपने संप्रभु के रूप में बनाए रखा। बहरहाल, इन दूर-दराज के देशों में ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड से लेकर कैरिबियन देश तक हैं जिनसे चार्ल्स को अपनी पहली चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। इसी साल प्रिंस विलियम और उनकी पत्नी कैट को बेलिजे, जमैका और बहामास की यात्रा के दौरान गुलामी के दिनों के लिए शाही परिवार की तरफ से माफी मांगने की अपील का सामना करना पड़ा।

जमैका के प्रधानमंत्री एंड्यू होलनेस ने दौरे के दौरान शाही जोड़े से कहा कि उनका देश ‘आगे बढ़’ रहा है। अगले कुछ महीनों में बारबडोस ने शाही व्यवस्था से अपना नाता तोड़ने की घोषणा की। ब्रिटेन की संवैधानिक राजशाही को नियंत्रित करने वाले कानून और परंपराएं तय करती हैं कि राज परिवार को पक्षपातपूर्ण राजनीति से बाहर रहना चाहिए, लेकिन चार्ल्स ने अपने वयस्क जीवन का अधिकतर समय पर्यावरण समेत उन मुद्दों पर बोलने में बिताया है जो उनके लिए महत्वपूर्ण हैं।

उनकी टिप्पणियों ने नेताओं और कारोबारी समुदाय के साथ टकराव भी पैदा किया, जिन्होंने वेल्स के तत्कालीन राजकुमार पर उन मुद्दों पर ध्यान देने का आरोप लगाया, जिन पर उन्हें चुप रहना चाहिए था। सवाल कायम है कि चार्ल्स अपनी मां के मार्ग का अनुसरण करेंगे और अब अपने निजी विचारों को प्रकट नहीं करेंगे क्योंकि वह महाराजा हैं, या लोगों तक व्यापक पहुंच के लिए अपने नए मंच का उपयोग करेंगे। चार्ल्स ने कहा है, ‘‘मेरे जीवन में निश्चित रूप से बदलाव आएगा क्योंकि मैं अपनी नयी जिम्मेदारियां निभाऊंगा।

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