आर्मीनिया-आजरबैजान में फिर से संघर्षविराम बहाल, 2 दिन की जंग में 155 सैनिकों की गई जान

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आर्मीनिया की सुरक्षा परिषद के सचिव आर्मेन ग्रिगोरियन ने युद्धविराम को लेकर अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता के प्रति धन्यवाद जताया। रूस की मध्यस्थता में मंगलवार को लागू युद्धविराम शीघ्र ही विफल हो गया था।

येरेवान। आर्मीनिया और आजरबैजान के बीच दो दिन चली लड़ाई में दोनों तरफ के 155 सैनिकों की मौत के बाद बृहस्पतिवार को संघर्षविराम फिर से बहाल हो गया। आर्मीनिया की सुरक्षा परिषद के सचिव आर्मेन ग्रिगोरियन ने युद्धविराम को लेकर अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता के प्रति धन्यवाद जताया। रूस की मध्यस्थता में मंगलवार को लागू युद्धविराम शीघ्र ही विफल हो गया था। आर्मीनिया के रक्षा मंत्रालय ने बृहस्पतिवार को कहा कि आजरबैजान के साथ सीमा पर स्थिति शांत है और संघर्षविराम उल्लंघन की कोई खबर नहीं है। आजरबैजान की सरकार की ओर से तत्काल कोई टिप्पणी नहीं की गई। 

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संघर्षविराम की घोषणा दो दिनों की भारी लड़ाई के बाद हुई, जिसे लगभग दो वर्षों में दोनों विरोधियों के बीच शत्रुता की सबसे बड़ी कार्रवाई के रूप में चिह्नित किया गया। आर्मीनिया और आजरबैजान ने गोलाबारी के लिए एक-दूसरे पर दोषारोपण किया। आर्मीनियाई अधिकारियों ने बाकू पर अकारण हमले का आरोप लगाया, जबकि आजरबैजान के अधिकारियों ने कहा कि उनका देश आर्मीनियाई हमलों का जवाब दे रहा था। आर्मीनियाई प्रधानमंत्री निकोल पशिनयान ने बुधवार को कहा कि मंगलवार तड़के शुरू हुई लड़ाई के बाद से उनके देश के 105 सैनिक मारे गए हैं, जबकि आजरबैजान ने कहा कि उसने 50 सैनिक खो दिए। 

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पूर्व सोवियत देशों के बीच नागोर्नो-काराबाख पर कब्जे को लेकर दशकों से शत्रुता है। नागोर्नो-काराबाख आजरबैजान का हिस्सा है, लेकिन 1994 में एक अलगाववादी युद्ध समाप्त होने के बाद से यह आर्मीनिया समर्थित जातीय आर्मीनियाई बलों के नियंत्रण में रहा है। वर्ष 2020 में छह सप्ताह के युद्ध के दौरान आजरबैजान ने आर्मीनिया के कब्जे वाले नागोर्नो-काराबाख और आपास के व्यापक क्षेत्रों के बड़े हिस्से पर पुनः कब्जा कर लिया। उस जंग में 6,700 से अधिक लोग मारे गये थे।

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