वीडियो कॉल पर हुई बाइडन-पुतिन की बात, यूक्रेन सहित कई मुद्दों पर हुई चर्चा

वीडियो कॉल पर हुई बाइडन-पुतिन की बात, यूक्रेन सहित कई मुद्दों पर हुई चर्चा

यूक्रेन और पश्चिमी देशों के अधिकारी चिंतित हैं कि यूक्रेन के पास रूस द्वारा सैन्य जमावड़ा बढ़ाने से मॉस्को ने अपने पूर्व-सोवियत पड़ोसी पर आक्रमण करने की योजना का संकेत दिया है।

अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन और रूस के उनके समकक्ष समकक्ष व्लादिमीर पुतिन के बीच आज ऑनलाइन वार्ता हुई। यह ऑनलाइन वार्ता ऐसे समय में हुई जब रूस और यूक्रेन के बीच लगातार टकराव बढ़ता जा रहा है। दोनों राष्ट्र अध्यक्षों ने यूक्रेन के साथ-साथ कई और मुद्दों पर चर्चा की। दोनों नेताओं ने साइबर हमले, मानव अधिकार और अमेरिका-रूस संबंध सहित कई मुद्दों पर चर्चा की। इससे पहले रूस के राष्ट्रपति कार्यालय के एक प्रवक्ता ने दावा किया था कि अमेरिका-रूस संबंध गंभीर स्थिति में है। ऐसे में दोनों नेताओं के बीच इस वार्ता को काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। दोनों नेताओं के बीच सीरिया, अफगानिस्तान और उत्तर कोरिया जैसे मुद्दों पर भी चर्चा हुई। 

रूस-यूक्रेन में क्यों बढ़ा है तनाव ?

यूक्रेन और पश्चिमी देशों के अधिकारी चिंतित हैं कि यूक्रेन के पास रूस द्वारा सैन्य जमावड़ा बढ़ाने से मॉस्को ने अपने पूर्व-सोवियत पड़ोसी पर आक्रमण करने की योजना का संकेत दिया है। हालांकि, रूस ने कहा कि उसका ऐसा कोई इरादा नहीं है और उसने यूक्रेन और उसके पश्चिमी समर्थक देशों पर अपने कथित आक्रामक मंसूबे को छिपाते हुए बेबुनियाद दावा करने का आरोप लगाया है। यह स्पष्ट नहीं है कि रूसी सेना के जमावड़े से हमले की शुरुआत होगी या नहीं। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने यूक्रेन में नाटो (उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन) के विस्तार को रोकने के लिए पश्चिमी देशों द्वारा गारंटी दिए जाने पर भी जोर दिया है। मौजूदा तनाव की क्या वजह है? यूक्रेन के रूस समर्थक राष्ट्रपति ने जन विरोधों को नजरअंदाज किया जिसके बाद रूस ने 2014 में यूक्रेन के क्रीमिया पर चढाई कर दी थी। यूक्रेन और पश्चिमी देशों ने रूस पर विद्रोहियों को समर्थन देने के लिए अपने सैनिक और हथियार भेजने का आरोप लगाया। मॉस्को ने इससे इनकार किया और आरोप लगाया कि अलगाववादियों से जुड़ने वाले रूसी कार्यकर्ता थे। यूक्रेन के पूर्वी औद्योगिक क्षेत्र डोनबासी को तबाह करने वाली लड़ाई में 14,000 से अधिक लोग मारे गए। फ्रांस और जर्मनी की मध्यस्थता से 2015 के शांति समझौते ने बड़े पैमाने पर लड़ाई को समाप्त करने में मदद की लेकिन एक राजनीतिक समझौते तक पहुंचने का प्रयास विफल रहा और छिटपुट झड़पें लगातार होती रही हैं।