देश में धार्मिक मामलों पर शिकंजा कसने की तैयारी में चीन, आस्थाओं को कम्युनिस्ट पार्टी की नीतियों के अनुरूप ढालना है मकसद

देश में धार्मिक मामलों पर शिकंजा कसने की तैयारी में चीन, आस्थाओं को कम्युनिस्ट पार्टी की नीतियों के अनुरूप ढालना है मकसद

धार्मिक मामलों से संबंधित सम्मेलन में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने कहा कि धार्मिक नेताओं की लोकतांत्रिक निगरानी में सुधार करना और धार्मिक कार्यों में कानून के शासन पर जोर देना और कानून के शासन के बारे में गहन प्रचार और शिक्षा आवश्यक है।

चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने बीजिंग में आयोजित एक राष्ट्रीय धार्मिक कार्य सम्मेलन के दौरान राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने के लिए "धर्म के सिनिसाइजेशन" (वह प्रक्रिया जिसके द्वारा गैर-चीनी समाज चीनी संस्कृति, विशेष रूप से हान लोगों की संस्कृति, भाषा, सामाजिक मानदंडों और जातीय पहचान के प्रभाव में आते हैं) पर विशेष जोर देने के साथ, धर्म पर और कड़े नियंत्रण का आह्वान किया है। बैठक चीन में मुसलमानों और ईसाइयों पर दमनकारी नियंत्रण के व्यापक आरोपों के साथ-साथ धर्मों पर देश की बढ़ती कड़ी निगरानी की पृष्ठभूमि में हुई। वीओन की रिपोर्ट के अनुसार धार्मिक मामलों से संबंधित सम्मेलन में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने कहा कि धार्मिक नेताओं की लोकतांत्रिक निगरानी में सुधार करना और धार्मिक कार्यों में कानून के शासन पर जोर देना और कानून के शासन के बारे में गहन प्रचार और शिक्षा आवश्यक है। 

सिनिसिज़ेशन में तिब्बतियों, मुसलमानों और ईसाइयों का एक चीनी संस्कृति में एकीकरण और आत्मसात करना शामिल है। देश की राजनीतिक विचारधारा और नियमों का पालन करने के लिए भी विस्तारित है। विशेषज्ञों के अनुसार, 2016 के बाद हो रहे पहली बार हो यह सम्मेलन हो रहा है। इसमें अगले कुछ वर्षों के लिए चीन के धार्मिक मामलों और उनके विनियमन पर मानकों को निर्धारित किया गया। शी ने कहा कि चीन में धार्मिक मामलों को देश के समाजवादी समाज के अनुसार नियंत्रित किया जाना चाहिए। उन्होंने धार्मिक क्षेत्र में अधिक राष्ट्रवाद, सामूहिकता, समाजवाद और इतिहास की बेहतर समझ का आग्रह किया। गौरतलब है कि पिछले महीने चीन धार्मिक स्वतंत्रता के उल्लंघन के लिए अमेरिका द्वारा "विशेष चिंता वाले देशों" के रूप में नामित कई देशों में से एक था।