• तिब्बत के हर कोने में छाए हुए है चीनी राष्ट्रपति शी के पोस्टर, क्या नई चाल चल रहा ड्रैगन?

आपको बता दें कि, पिछले हफ्ते क्षेत्र के एक सरकारी दौरे में, एक रॉयटर्स पत्रकार ने कक्षाओं, सड़कों, धार्मिक संस्थानों, घरों और यहां तक की बौद्ध भिक्षु के शयनकक्ष में चीनी राष्ट्रपति शी के तस्वीरों को देखा गया है।बता दें कि इस दौरे पर एक दर्जन से अधिक अन्य पत्रकार भी गए थे।

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के पोस्टर अब तिब्बत के हर जगहों पर छाये हुए है। टीओआई में छपी एक खबर के मुताबिक, तिब्बत की राजधानी ल्हासा में केवल एक ही चीज सर्वव्यापी है और वो है चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और साथी नेताओं की तस्वीरें। अब सवाल है कि क्या तिब्बत पर कब्जा जमाए हुए चीन अब अपनी पकड़ और मजबूत करना चाहता है? आपको बता दें कि चीन की न केवल तिब्बत बल्कि सीमा से लगने वाले अन्य देशों पर भी काफी तेज नजर बनी हुई है।

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आपको बता दें कि, पिछले हफ्ते क्षेत्र के एक सरकारी दौरे में, एक रॉयटर्स पत्रकार ने कक्षाओं, सड़कों, धार्मिक संस्थानों, घरों और यहां तक की बौद्ध भिक्षु के शयनकक्ष में चीनी राष्ट्रपति शी के तस्वीरों को देखा गया है।बता दें कि इस दौरे पर एक दर्जन से अधिक अन्य पत्रकार भी गए थे। पांच दिवसीय यात्रा पर सरकार ने जिन नागरिकों और धार्मिक हस्तियों के साक्षात्कार की, उन्होंने कम्युनिस्ट पार्टी और चीनी राष्ट्रपति शी के प्रति वफादारी का वादा किया। यह पूछे जाने पर कि उनका आध्यात्मिक गुरु कौन है, ल्हासा के जोखांग मंदिर में एक भिक्षु, जिसका नाम शी था। आपको बता दें कि शी की तस्वीरें लगभग सभी विज़िट किए गए स्थलों पर दिखाई दिए गए। तिब्बती अध्ययन के विद्वान रॉबर्ट बार्नेट ने कहा, "पोस्टर एक बड़े राजनीतिक शिक्षा कार्यक्रम के साथ मेल खाते हैं, जिसे 'पार्टी के प्रति आभार' की भावना कहा जाता है।" यात्रा के दौरान, सरकारी अधिकारियों ने सुझाव दिया कि चीनी झंडे के साथ ऐसी तस्वीरें तिब्बत में "देशभक्ति की भावना" का संकेत देती है।

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चीनी सैनिकों द्वारा तत्कालीन देश में प्रवेश करने और इसके प्रशासन को संभालने के बाद बीजिंग का कहना है कि उसने 1951 में तिब्बत को शांतिपूर्वक मुक्त कर दिया है। तिब्बती बौद्ध धर्म के आध्यात्मिक नेता दलाई लामा, चीनी शासन के खिलाफ असफल विद्रोह के बाद 1959 में तिब्बत से भाग गए, और तब से धर्मशाला में एक निर्वासित सरकार की स्थापना की। रॉयटर्स ने 31 मई से 5 जून की यात्रा पर दलाई लामा की कोई तस्वीर नहीं देखी, जो पहले पूरे तिब्बत में घरों में आम थी।