नेपाल में संघर्ष पीड़ितों और कार्यकर्ताओं ने खामियों को लेकर संयुक्त राष्ट्र को पत्र लिखा

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नेपाल सरकार द्वारा संसद में पेश ‘संक्रमणकालीन न्याय संशोधन विधेयक’ में ‘‘कई खामियों’’ का उल्लेख करते हुए संयुक्त राष्ट्र प्रमुख एंतोनियो गुतारेस को संबोधित एक पत्र सोमवार को संघर्ष पीड़ितों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के एक समूह द्वारा संयुक्त राष्ट्र के स्थानीय संयोजक रिचर्ड हॉवर्ड को सौंपा गया।

काठमांडू, 30 अगस्त। नेपाल सरकार द्वारा संसद में पेश ‘संक्रमणकालीन न्याय संशोधन विधेयक’ में ‘‘कई खामियों’’ का उल्लेख करते हुए संयुक्त राष्ट्र प्रमुख एंतोनियो गुतारेस को संबोधित एक पत्र सोमवार को संघर्ष पीड़ितों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के एक समूह द्वारा संयुक्त राष्ट्र के स्थानीय संयोजक रिचर्ड हॉवर्ड को सौंपा गया। ‘संक्रमणकालीन न्याय संशोधन विधेयक’ पिछले महीने प्रतिनिधि सभा में पेश किया गया था। पत्र में कहा गया है, ‘‘हमारा मानना है कि जिस विधेयक को सरकार संसद के माध्यम से त्वरित आधार पर आगे बढ़ाना चाहती है, वह गुनहगारों के अनुकूल है।

यह न्याय के लिए नेपाल के संघर्ष (1996-2006) के पीड़ितों की वैध मांगों को दबाने का प्रयास करता है, और भविष्य में इस तरह के हिंसक संघर्षों की पुनरावृत्ति की संभावना को भी बढ़ाएगा।’’ पत्र में कहा गया है कि ‘‘संक्रमणकालीन न्याय विधेयक’’ नेपाल के उच्चतम न्यायालय के निर्देशों का पालन नहीं करता है और न्याय पर अंतरराष्ट्रीय सिद्धांतों का उल्लंघन करता है।’’

अखबार ‘काठमांडू पोस्ट’ की एक खबर के अनुसार विधेयक कहता है कि उग्रवाद के दौरान ‘‘क्रूर हत्या’’ या यातना के बाद हत्या, बलात्कार, जबरन गायब करना और निहत्थे या आम लोगों के खिलाफ की गई बर्बरता मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन है और माफी योग्य नहीं है। हालांकि, यह विधेयक गंभीर मानवाधिकार उल्लंघन के तहत युद्ध अपराधों और मानवता के खिलाफ अपराधों को सूचीबद्ध नहीं करता है। विधेयक में पूर्व नाबालिग लड़ाकों की चिंताओं को दूर करने का कोई प्रावधान नहीं है।

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