बच्चों के यौन शोषण के दोषी जॉर्ज पेल की अपील पर अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रखा

By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Publish Date: Jun 6 2019 4:59PM
बच्चों के यौन शोषण के दोषी जॉर्ज पेल की अपील पर अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रखा
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विक्टोरिया प्रांत के सुप्रीम कोर्ट के तीन न्यायाधीशों ने पेल के वकीलों की दलीलें दो दिनों तक सुनी। वकीलों ने पेल की दोषसिद्धी रद्द करने की मांग की जबकि सरकारी वकीलों ने इस बात पर जोर दिया कि वेटिकन के शीर्ष अधिकारियों में शामिल रहे पेल के खिलाफ जूरी का फैसला ‘‘स्पष्ट और संदेहों से परे’’ है।

मेलबर्न। बच्चों के यौन शोषण के आरोपों में दोषी करार दिए गए ऑस्ट्रेलियाई रोमन कैथलिक कार्डिनल जॉर्ज पेल की दोषसिद्धी के खिलाफ अपील पर अदालत ने गुरूवार को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। विक्टोरिया प्रांत के सुप्रीम कोर्ट के तीन न्यायाधीशों ने पेल के वकीलों की दलीलें दो दिनों तक सुनी। वकीलों ने पेल की दोषसिद्धी रद्द करने की मांग की जबकि सरकारी वकीलों ने इस बात पर जोर दिया कि वेटिकन के शीर्ष अधिकारियों में शामिल रहे पेल के खिलाफ जूरी का फैसला ‘‘स्पष्ट और संदेहों से परे’’ है।

न्यायाधीशों के पास पेल की अपील खारिज करने, फिर से मुकदमा चलाने या उन्हें बरी करने का अधिकार है। हालांकि, इस बात के कोई संकेत नहीं हैं कि वे कब तक अपना फैसला सुनाएंगे। शनिवार को 78 वर्ष के होने जा रहे पेल के वकीलों ने बच्चों से यौन दुष्कर्म के मामले में पांच धाराओं में उन्हें दोषी करार दिए जाने पर 13 बिंदुओं के जरिए अपनी आपत्ति दर्ज कराई। पेल पर आरोप था कि 1990 के दशक में उन्होंने रविवार की सामूहिक प्रार्थना के बाद 13 साल के दो लड़कों का यौन शोषण किया। उन्हें बीते मार्च में छह साल जेल की सजा सुनाई गई थी।

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इस मामले में अपील पर फैसला जिसके खिलाफ आएगा, वह ऑस्ट्रेलिया की हाई कोर्ट का रुख कर सकता है। अभियोजक क्रिस बोयस ने तीन न्यायाधीशों की पीठ से कहा कि पेल की दोषसिद्धि कायम रखी जानी चाहिए जो एक ही फरियादी की गवाही पर आधारित है। उन्होंने कहा कि शिकायतकर्ता बहुत ही अकाट्य गवाह है। स्पष्ट तौर पर वह झूठा नहीं है। वह सच्चा गवाह है। पीड़ित दोनों लड़कों में से एक अभियोजन पक्ष का प्रमुख गवाह है जो अब 35-36 साल का हो चुका है। वहीं, 2014 में दूसरे लड़के की मौत हेरोइन की अत्यधिक मात्रा के सेवन के चलते हो गई। वह कोई आरोप नहीं लगा पाया था।



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पेल को विशेष सुरक्षा वाली जेल में रखा जा रहा है क्योंकि बच्चों का यौन उत्पीड़न करने वाले कैदियों को अन्य कैदियों से काफी खतरा होता है। वह ऑस्ट्रेलिया का सर्वोच्च रैंकिंग वाला कैथोलिक है, इसलिए वैटिकन उसकी दोषसिद्धि को लेकर खुद भी जांच कर रहा है।

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