ऊर्जा, मुद्रास्फीति, यूक्रेन युद्ध पर बाइडन और जी-7 नेताओं के बीच चर्चा की संभावना

G7 Meeting
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व्हाइट हाउस राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के प्रवक्ता जॉन किर्बी ने कहा कि शिखर सम्मेलन मुद्रास्फीति और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के युद्ध के परिणामस्वरूप वैश्विक अर्थव्यवस्था में आई अन्य चुनौतियों के साथ-साथ पुतिन को जवाबदेह कैसे बनाया जाए, इस पर केंद्रित होगा।

बर्लिन| अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन और जी-7 समूह के नेता रविवार को ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित करने और मुद्रास्फीति से निपटने की रणनीतियों पर चर्चा करेंगे। बाइडन प्रमुख लोकतांत्रिक अर्थव्यवस्थाओं की वार्षिक बैठक के लिए रविवार सुबह जर्मनी के बेवेरियन आल्प्स पहुंचे, जहां यूक्रेन में युद्ध का विषय चर्चा के केंद्र में होगा।

बाइडन एवं उनके सहयोगी यूक्रेन के समर्थन में एक संयुक्त मोर्चा बनाने की पेशकश कर सकते हैं, क्योंकि संघर्ष अपने चौथे महीने में प्रवेश कर गया है। ब्रिटेन, कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान और यूरोपीय संघ (ईयू) के नेताओं के साथ औपचारिक और अनौपचारिक दोनों स्थितियों में दोपहर की बातचीत से पहले बाइडन शिखर सम्मेलन के मेजबान जर्मन चांसलर ओलाफ शोल्ज के साथ द्विपक्षीय बैठक कर अपनी यात्रा की शुरुआत करेंगे।

व्हाइट हाउस राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के प्रवक्ता जॉन किर्बी ने कहा कि शिखर सम्मेलन मुद्रास्फीति और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के युद्ध के परिणामस्वरूप वैश्विक अर्थव्यवस्था में आई अन्य चुनौतियों के साथ-साथ पुतिन को जवाबदेह कैसे बनाया जाए, इस पर केंद्रित होगा।

जिन मुद्दों पर चर्चा की जानी है, उनमें ऊर्जा मूल्य पर लगाम लगाने जैसे मुद्दे शामिल हैं, जिससे कि रूस को तेल और गैस से होने वाले मुनाफे को सीमित कर युद्ध में इस पहलु का इस्तेमाल करने से रोका जा सके। इस विचार का समर्थन अमेरिकी वित्त मंत्री जेनेट येलेन ने किया है।

जर्मनी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने विभाग के नियमों के अनुसार नाम नहीं छापने की शर्त पर कहा कि कीमत पर लगाम लगाने के अमेरिकी प्रस्ताव पर गहन चर्चा की जा रही है कि यह वास्तव में कैसे काम करेगा और अमेरिका, यूरोपीय संघ, ब्रिटेन, कनाडा व जापान की सरकारों द्वारा घोषित पाबंदियों के साथ कैसे लागू होगा।

अधिकारियों ने कहा कि युद्ध के परिणामस्वरूप महत्वपूर्ण ऊर्जा आपूर्ति की जरूरतों के समाधान के साथ जलवायु परिवर्तन को संबोधित करने के लिए प्रतिबद्धताओं को कैसे बनाए रखा जाए, इस पर भी चर्चा की जाएगी।

किर्बी ने कहा, ‘‘जलवायु परिवर्तन से निपटने की प्रतिबद्धताओं में कोई कमी नहीं आई है।

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