चुनाव हार जाने के एक सप्ताह बाद गिलानी ने सीनेट के सभापति के चुनाव को दी अदालत में चुनौती

Gilani
पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री युसूफ रजा गिलानी ने सीनेट के सभापति के चुनाव को दी अदालत में चुनौती दी है।गिलानी की ओर से फारूक एच नाईक ने इस्लामाबाद उच्च न्यायालय में याचिका दायर की है जिसे मुख्य न्यायाधीश अतहर मिनाल्लाह ने 24 मार्च को सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिया।

इस्लामाबाद। पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री युसूफ रजा गिलानी ने कड़े मुकाबले में सीनेट के सभापति का चुनाव हार जाने के एक सप्ताह से भी अधिक समय बाद सोमवार को उसके परिणाम को चुनौती दी। सीनेट के वर्तमान सभापति सादिक सांजरानी (42) ने इस चुनाव में 68 वर्षीय गिलानी को हराया था। उन्हें प्रधानमंत्री इमरान खान के सत्तारूढ़ गठबंधन का समर्थन प्राप्त था जबकि गिलानी सभी मुख्य विपक्षी दलों के गठबंधन-- पाकिस्तान डेमोक्रेटिक मूवमेंट के संयुक्त उम्मीदवार थे। निन्यानवे सदस्यीय सीनेट में सांजरानी को 48 वोट मिले जबकि गिलानी के पक्ष में 42 मत पड़े। ऊपरी सदन में बहुमत के बाद भी यह चुनाव नहीं जीत पाना विपक्ष के लिए एक झटका है। मतविभाजन में 98 सदस्यों ने हिस्सा लिया था। आठ वोट खारिज कर दिये गये थे जिनमें से सात पर गिलानी के नाम की मुहर थी।

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उच्च सदन में विपक्ष के 52 सदस्य हैं जबकि सत्तारूढ़ गठबंधन के 47 सदस्य हैं। गिलानी की ओर से फारूक एच नाईक ने इस्लामाबाद उच्च न्यायालय में याचिका दायर की है जिसे मुख्य न्यायाधीश अतहर मिनाल्लाह ने 24 मार्च को सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिया। गिलानी ने पीठासीन अधिकारी सैयद मुज्जफर हुसैन शाह, कानून एवं न्याय मंत्रालय, संसदीय कार्य मंत्रालय, सीनेट सचिवालय और सीनेट के सभापति सादिक सांजरानी को प्रतिवादी बनाया है। उन्होंने अदालत से 12 मार्च को सीनेट के सभापति के लिए हुए चुनाव और सांजरानी की सभापति के रूप में जीत की घोषणा को अमान्य करार देने की दरख्वास्त की है। इस विवाद की जड़ में खारिज किये गये वे सात वोट हैं जो गिलानी के पक्ष थे लेकिन उन्हें पीठासीन अधिकारी ने तकनीकी आधार पर खारिज कर दिया था।

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