गोदरेज कंपनी के प्रमुख ने Davos में जलवायु परिवर्तन पर प्रस्तुत की कविता

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स्विट्जरलैंड स्थित दावोस में कविता बृहस्पतिवार को पेश की गई। इसके अलावा उनके संगठन की ओर से ‘ब्लू कार्बन’ परियोजना पर किये गये कार्यों, जलवायु संकट पर उनके दृष्टिकोण और सामान्य कार्रवाई की जरूरत से जुड़ा ब्योरा दिया गया।

भारतीय कंपनी गोदरेज इंडस्ट्रीज लिमिटेड के प्रमुख नादिर गोदरेज ने यहां विश्व आर्थिक मंच (डब्ल्यूईएफ) के वार्षिक कार्यक्रम में सामूहिक परिचर्चा सत्र के दौरान संबोधन के बजाय जयवायु परिवर्तन पर एक कविता प्रस्तुत की। गोदरेज ने छह मिनट से अधिक लंबी कविता की शुरुआत इस वाक्यांश से की, ‘‘ एक सहनीय सीमा के अंदर जलवायु परिवर्तन नहीं होता, एक संकट जो आग, बाढ़ और सूखे के बारे में है।’’

स्विट्जरलैंड स्थित दावोस में कविता बृहस्पतिवार को पेश की गई। इसके अलावा उनके संगठन की ओर से ‘ब्लू कार्बन’ परियोजना पर किये गये कार्यों, जलवायु संकट पर उनके दृष्टिकोण और सामान्य कार्रवाई की जरूरत से जुड़ा ब्योरा दिया गया। ‘ब्लू कार्बन’ का आशय विश्व के महासागरों और तटवर्ती पारिस्थितिकी तंत्र द्वारा संग्रहित कार्बन से है। केवल पांच फीसदी भूमि पर फैली तटवर्ती नम भूमि महासागरीय सतह में दफन कार्बन की कुल मात्रा का आधा हिस्सा संग्रहित करती है।

यूरोपीय संघ के पर्यावरण और मत्स्यकीय मामलों की आयुक्त वर्जिनिजस सिनकेविसियस ने कहा कि ‘नीले के बगैर कोई हरा नहीं’ है। उन्होंने कहा कि हमें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि महासागरीय पारिस्थितिकी तंत्र की सेहत अच्छी रहे। पिछले साल दिसंबर में मांट्रियल में संयुक्त राष्ट्र जैवविविधता सम्मेलन या कॉप-15 में हुए समझौते के प्रति देशों ने प्रतिबद्धता जताई है।

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